साथी महिला को मोलेस्टेशन से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाली कोलकाता की इस महिला की हो रही तारीफ़

निलांजना चटर्जी ने छेड़छाड़ की शिकार महिला को बचाया और इस घटना में उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया।

साथी महिला को मोलेस्टेशन से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाली कोलकाता की इस महिला की हो रही तारीफ़

Tuesday September 15, 2020,

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इस महीने की शुरुआत में, कोलकाता निवासी नीलांजना चटर्जी (47) के बाएं पैर में एक दुखद चोट लगी थी। लेकिन यह चोट किसी दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना के कारण नहीं लगी।


अपने पति दीप सतपथी और बेटी श्रेयसी चटर्जी के साथ एक सामाजिक सभा से लौटते समय, नीलांजना ने दक्षिण कोलकाता के आनंदपुर क्षेत्र में एक कार में एक महिला को संकट की स्थिति में पाया और उसके सामने अपनी कार रोक दी।


यह देखकर, नीलांजना महिला की मदद करने के लिए पहुंची, जबकि दूसरी कार में बैठा आदमी नीलांजना के बाएं पैर को कुचलते हुए भाग गया। जिससे नीलांजना को टिबिया और फिबुला में फ्रैक्चर हुआ और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।


छेड़छाड़ की शिकार और कार से फेंकी जाने वाली 31 वर्षीय पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई और आरोपी अभिषेक कुमार पांडे को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। वह भी कुछ घावों से पीड़ित थी और उन्हें कई टांके आए।


कोलकाता वासी नीलांजना के बहादुरी भरे इस कार्य से प्रभावित हुए, साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार नीलांजना का कठिन समय में समर्थन करेगी।

नीलांजना चटर्जी सर्जरी के बाद जल्द ही ठीक हो जाएंगी (फोटो साभार: द बेटर इंडिया)

नीलांजना चटर्जी सर्जरी के बाद जल्द ही ठीक हो जाएंगी (फोटो साभार: द बेटर इंडिया)

सीएम ममता बनर्जी ने अपने आधिकारिक निवास नाबन्ना से इसकी घोषणा की, द टेलीग्राफ इंडिया के अनुसार, "दूसरी महिला को बचाने की कोशिश करने वाली महिला घायल हो गई और रूबी (सामान्य अस्पताल में) भर्ती हो गई, साथ ही सभी चिकित्सकीय खर्चों के लिए राज्य सरकार का सहयोग मिलेगा।"

उन्होंने आगे कहा,“हम उनकी मदद करने के लिए हैं। ऐसे मामलों में पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी।"


नीलांजना के ठीक होने के बारे में द बेटर इंडिया से बात करते हुए, उनकी बेटी श्रेयसी ने कहा कि वह अच्छी प्रगति कर रही है, और कुछ दिन पहले, उन्होंने एक वॉकर की मदद से चलना शुरू किया। डॉक्टरों ने कहा है कि रिकवरी की अवधि 15-18 सप्ताह के बीच है।"


श्रेयसी का कहना है कि उनकी माँ उनकी सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक रही है, जिन्होंने उन्हें विपत्तियों के समय में कभी भी नीचा नहीं देखना सिखाया है। उन्होंने कहा, "यह न तो पहली बार है जब वह किसी अजनबी की मदद करने के लिए बाहर गई है और न ही वह आखिरी होगी।"