पलायन से प्रगति तक: 'बिहार की कहानी' मंत्री नीतीश मिश्रा की जुबानी
कभी पलायन के लिए बदनाम बिहार, आज प्रगति का प्रतीक बन चुका है. हाल ही में बिहार सरकार के उद्योग मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा से हुई बातचीत में बिहार के बदलाव के सफर के बारे में बताया.
भारत के तेजी से बदलते स्टार्टअप इकोसिस्टम में अब बिहार भी अपनी नई पहचान बना रहा है. पहले बिहार को खेती और पलायन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं.
बिहार के उद्योग मंत्री श्री नीतीश मिश्रा ने YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा से हुई बातचीत में कहा, “जब स्टार्टअप्स की बात होती है तो कोई बिहार की चर्चा नहीं करता. लेकिन मुझे लगता है कि अब बिहार स्टार्टअप मैप पर दिखने लगा है. पिछले एक साल में बिहार में 1,000 नए स्टार्टअप्स जुड़े हैं.”
स्टार्टअप पॉलिसी और बिहार आइडिया फेस्टिवल
इस बढ़त के पीछे बिहार सरकार की स्टार्टअप नीति है, जो युवाओं को प्लेटफॉर्म, फंडिंग और अवसर दे रही है.
मंत्री मिश्रा का मानना है कि यहां की युवा पीढ़ी में अनगिनत संभावनाएं हैं. वे अब नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनना चाहते हैं. इसी सोच से बिहार आइडिया फेस्टिवल शुरू किया गया है. यह डेढ़ महीने तक चलेगा और इसका लक्ष्य 534 ब्लॉकों से कम से कम एक आइडिया चुनना है.
गांव से जिला स्तर तक ब्रेनस्टॉर्मिंग होगी और पटना में ग्रैंड कॉन्क्लेव होगा. हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज हैं और हर सबडिविजन में पॉलिटेक्निक और आईटीआई हैं. यानी टैलेंट की कोई कमी नहीं है.
मंत्री कहते हैं, “राष्ट्रीय स्तर पर हम पीछे हैं. लेकिन यहां के युवाओं में संभावनाएं असीमित हैं. उन्हें सिर्फ एक मंच चाहिए. हमारी नीति यही मंच देती है. अब युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनना चाहते हैं. स्टार्टअप्स यही सोच बदल रहे हैं.”
ग्रामीण और शहरी विकास
पटना आज मेट्रो शहरों की तरह उभर रहा है, लेकिन राज्य के बाकी हिस्सों में भी तेजी से बदलाव हो रहा है.
मंत्री मिश्रा बताते हैं, “पटना अब कई महानगरों की बराबरी करता है. लेकिन राजधानी के बाहर भी विकास की गति तेज हो रही है. शहरों की संख्या बढ़ी है. नगर पंचायतें नगर परिषद बनीं, नगर परिषदें नगर निगम बनीं.”
वे आगे बताते हैं कि गांवों में सड़क, बिजली और सेवाओं में काफी सुधार हुआ है. अब लोग गांवों में रहना पसंद कर रहे हैं और कई लोग तो रिटायरमेंट के बाद भी गांव में बसना चाहते हैं.
मुज़फ्फरपुर से दरभंगा, गया से पूर्णिया तक नए शहर आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन रहे हैं. यहां रिवर्स माइग्रेशन यानी लोग वापस लौट रहे हैं.
औद्योगिक निवेश और नए रोजगार
मंत्री मानते हैं कि पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा संभावनाएं बिहार में हैं.
बिहार में बंद पड़ी फैक्ट्रियां फिर से शुरू हो रही हैं. मधुबनी जिले में 400 करोड़ की लागत से बड़ा टेक्सटाइल यूनिट लग रहा है, जिससे 12,500 नौकरियां मिलेंगी. अररिया का फोर्ब्सगंज इंडस्ट्रियल एरिया भी नए रोजगार लाएगा. गया को 12 औद्योगिक नोड्स में शामिल किया गया है. यहां एक बड़ा औद्योगिक टाउनशिप बनेगा जो लाखों नौकरियां देगा.
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 1,81,000 करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए हैं और 90,000 करोड़ का प्रोजेक्ट भी पास हुआ है. अब यह मिथक टूट रहा है कि बिहार में बड़े निवेश नहीं आ सकते.
पलायन पर रोक और स्थानीय अवसर
बिहार से बाहर काम करने जाना एक बड़ी समस्या रही है. मंत्री मिश्रा कहते हैं कि पलायन पूरे पूर्वी भारत की समस्या है. अच्छे अवसर की तलाश स्वाभाविक है, लेकिन मजबूरी में पलायन होना दुखद है. अब स्थिति बदल रही है. कोविड के बाद फैक्ट्रियां भी अब मजदूरों के पास आ रही हैं. MSME और नई नीतियों से स्थानीय स्तर पर नौकरियां बढ़ रही हैं.
मंत्री याद दिलाते हैं, “20 साल पहले हमारा बजट 23,000 करोड़ था. आज यह 3,17,000 करोड़ है. इस सफर ने नए मौके दिए हैं. इससे रोजगार और अवसर दोनों बढ़े हैं.”
सार्वजनिक निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर
बिहार का आर्थिक उत्थान सरकारी निवेश से जुड़ा है. राज्य में सड़कें, पुल, बिजली और संस्थान तेजी से बने हैं. नई संस्थाओं ने लोगों तक विकास पहुंचाया है.
जीविका जैसी योजनाएं ग्रामीण गरीबों को सशक्त बना रही हैं. जलवायु और समुदाय को ध्यान में रखकर नई इमारतें और ढांचा तैयार हो रहा है.
बिहार सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच साल में एक करोड़ रोजगार दिए जाएं. यह सरकार और निजी दोनों सेक्टर में होंगे. साथ ही विकास का संदेश है, “सबका साथ, सबका विकास…सबको न्याय.”
बिहार का नया सफर
आइडिया फेस्टिवल से लेकर नए उद्योगों तक, बिहार अब नई उड़ान भर रहा है.
मंत्री कहते हैं, “2005 में बिहार की स्थिति क्या थी? नकारात्मक विकास दर थी. लेकिन अब बिहार डबल डिजिट ग्रोथ कर रहा है. यह बेहतर फिस्कल मैनेजमेंट और साफ नीयत का नतीजा है.
वे आगे कहते हैं, “बिहार की पहचान अब पलायन से नहीं, बल्कि विकास और स्टार्टअप्स से होगी.”
मंत्री नीतीश मिश्रा कहते हैं, “बिहार मेरी आत्मा है. बिहार मेरी पहचान है. बिहार ने मुझे सबकुछ दिया है. और मैं बिहार के लिए अपना 100% दूंगा.”
Edited by Ravi Pareek



