Thrive Global AI: AI और ई-कॉमर्स का दमदार कॉम्बिनेशन, डेटा की उलझन खत्म!
हर कंपनी के पास आज डेटा तो है, लेकिन उसे समझना आसान नहीं. प्रियंका एरॉन ने इसी समस्या को पहचाना और Thrive Global AI शुरू किया. यह AI प्लेटफॉर्म ब्रांड्स को आसान तरीके से डेटा समझने और बेहतर फैसले लेने में मदद करता है.
आज का दौर डेटा का दौर है. हर क्लिक, हर सर्च, हर खरीद एक कहानी कहती है. कंपनियों के पास अब पहले से कहीं ज्यादा जानकारी है. लेकिन सच यह भी है कि इस जानकारी को समझना आसान नहीं है. कई ब्रांड्स डेटा के बोझ में दब जाते हैं. उनके पास आंकड़े तो होते हैं, पर दिशा नहीं होती. फैसले लेने में देर होती है. और यही देरी उन्हें पीछे कर देती है.
ऐसे समय में कुछ लोग समस्या नहीं, समाधान देखते हैं. प्रियंका एरॉन (Priyanka Aeron) उन्हीं में से एक हैं. उन्होंने करीब 15 साल तक मार्केटिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दुनिया को करीब से देखा. उन्होंने समझा कि असली कमी डेटा की नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने की है.
यहीं से एक विचार जन्म लेता है. एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो डेटा को आसान बना दे. जो कंपनियों को तेज और सही फैसले लेने में मदद करे. इसी सोच ने Thrive Global AI को जन्म दिया.
Thrive Global AI की को-फाउंडर प्रियंका एरॉन YourStory हिंदी से बातचीत में कहती हैं, “आज हर कंपनी के पास बहुत सारा डेटा है, लेकिन असली बात उसे सही तरह से समझने की है. हमने Thrive Global AI इसी सोच के साथ शुरू किया.”
आज यह सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं रहा. यह एक नई सोच बन चुका है, जहां AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि बिज़नेस बढ़ाने का जरिया है.
यहीं से प्रियंका का सफर भी आगे बढ़ता है—एक साधारण शुरुआत से लेकर AI-समर्थित प्लेटफॉर्म खड़ा करने तक.
15 साल का अनुभव और एक बड़ी समस्या
समय के साथ प्रियंका का अनुभव बढ़ता गया. उन्होंने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और मार्केटिंग में 15 साल से ज्यादा काम किया. EcoSoul Home में बतौर Co-founder और Head of Products and Technology उन्होंने वैश्विक स्तर पर काम संभाला.
यहीं उन्हें एक बड़ी समस्या दिखी. कंपनियों के पास बहुत डेटा था. लेकिन उस डेटा से सही फैसले लेना मुश्किल था. हर जगह अलग सिस्टम. अलग टूल्स. सब कुछ बिखरा हुआ.
प्रियंका कहती हैं, “डेटा तो बहुत था, लेकिन साफ समझ नहीं थी. टीम के पास जानकारी थी, पर आगे क्या करना है, ये स्पष्ट नहीं था. तभी लगा कि कुछ नया बनाने की जरूरत है.”
यही सोच Thrive Global AI की शुरुआत का कारण बनी.
Thrive Global AI की शुरुआत
मई 2025 में Thrive Global AI की शुरुआत हुई. यह एक AI-समर्थित ग्रोथ इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म है. इसका मकसद साफ था. डेटा और फैसलों के बीच की दूरी खत्म करना.
ई-कॉमर्स ब्रांड्स के लिए यह खासतौर पर बनाया गया. ताकि वे सही समय पर सही फैसले ले सकें.
प्रियंका कहती हैं, “हमने Thrive Global AI इसलिए बनाया क्योंकि मार्केटिंग बहुत जटिल हो गई थी. हम इसे आसान बनाना चाहते थे. ताकि हर ब्रांड डेटा के आधार पर फैसले ले सके, बिना किसी कन्फ्यूजन के.”
यह प्लेटफॉर्म अलग-अलग डेटा को एक जगह लाता है. फिर AI के जरिए उसे आसान insights में बदलता है. जिससे कंपनियां तेजी से काम कर सकें.
AI प्लेटफॉर्म जो काम को बनाते हैं आसान
नोएडा स्थित Thrive Global AI के दो बड़े प्रोडक्ट हैं — Vector AI और Beacon IQ.
Vector AI कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स सही तरीके से लिस्ट करने, उनकी कीमत तय करने और मांग का अंदाजा लगाने में मदद करता है. यह रियल टाइम डेटा पर काम करता है, जिससे बार-बार हाथ से करने वाला काम कम हो जाता है और बिक्री बढ़ने में मदद मिलती है.
वहीं Beacon IQ, जो अभी लॉन्च होने वाला है, मार्केटिंग को आसान और समझदार बनाने पर फोकस करता है. यह ग्राहकों के व्यवहार को समझता है और उसी हिसाब से कैंपेन को बेहतर बनाता है, ताकि बेहतर रिजल्ट मिल सके.
प्रियंका बताती हैं, “हमने कोशिश की कि AI सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे. छोटे और मिड साइज बिजनेस भी इसका फायदा उठा सकें. यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है.”
बिना फंडिंग खड़ी की कंपनी
आज के दौर में ज्यादातर स्टार्टअप्स जल्दी से जल्दी फंडिंग पाने की कोशिश में लगे रहते हैं, लेकिन Thrive Global AI ने थोड़ा अलग रास्ता चुना. इस कंपनी ने शुरुआत से ही अपने दम पर आगे बढ़ने का फैसला किया. यानी यह पूरी तरह bootstrapped है और बिना बाहरी निवेश (फंडिंग) के खड़ी हुई है.
शुरुआत में प्रियंका और उनकी टीम ने EcoSoul के साथ काम करते हुए जो अनुभव हासिल किया, उसी से उन्हें दिशा मिली. वहीं से मिलने वाले शुरुआती रेवेन्यू को उन्होंने दोबारा अपने प्रोडक्ट और कंपनी को बेहतर बनाने में लगाया. धीरे-धीरे उन्होंने बिना जल्दबाजी किए एक मजबूत नींव तैयार की.
प्रियंका बताती हैं, “हमने शुरुआत में फंडिंग लेने की जल्दी नहीं की. हमारा फोकस पहले एक अच्छा और भरोसेमंद प्रोडक्ट बनाने पर था. हम चाहते थे कि हमारी ग्रोथ लंबे समय तक टिकने वाली हो, न कि सिर्फ कुछ समय के लिए तेज दिखे.”
आज इसी सोच का असर है कि Thrive Global AI भारत के साथ-साथ UK, UAE और US जैसे देशों में भी क्लाइंट्स के साथ काम कर रही है. कंपनी ने धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ाया है और अब अलग-अलग बाजारों में अपनी पहचान बना रही है.

Thrive Global AI की टीम
चुनौतियां
AI प्लेटफॉर्म बनाना बिल्कुल आसान नहीं था. सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि डेटा अलग-अलग जगहों पर बिखरा हुआ था. उसे एक साथ लाना, उसे सही तरीके से जोड़ना और फिर उससे काम की जानकारी निकालना अपने आप में एक बड़ा काम था. हर सिस्टम का डेटा अलग फॉर्मेट में था, जिसे समझना और एक प्लेटफॉर्म पर लाना टीम के लिए बड़ी चुनौती बन गया.
इसके अलावा एक और मुश्किल थी—AI को इतना आसान बनाना कि छोटे और मंझोले बिजनेस भी उसे बिना किसी तकनीकी झंझट के इस्तेमाल कर सकें. अक्सर AI को बहुत जटिल माना जाता है, लेकिन टीम चाहती थी कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका टेक बैकग्राउंड हो या नहीं, इसे आसानी से समझ पाए और इस्तेमाल कर सके.
लेकिन इन चुनौतियों से पीछे हटने के बजाय टीम ने इन्हें एक मौके की तरह लिया. उन्होंने लगातार काम किया, चीजों को आसान बनाने पर फोकस रखा और धीरे-धीरे एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जो समझने में भी आसान हो और काम में भी असरदार.
प्रियंका कहती हैं, “सबसे मुश्किल काम था AI से जुड़ी मुश्किलों को आसान बनाना. हम चाहते थे कि कोई भी यूजर इसे आसानी से समझ सके. जब लोग बिना परेशानी के इसे इस्तेमाल करने लगे, वही हमारे लिए सबसे बड़ी जीत थी.”
आगे की राह
Thrive Global AI का मकसद साफ है—AI की मदद से मार्केटिंग को हर ब्रांड तक पहुंचाना, चाहे वह छोटा हो या बड़ा. कंपनी चाहती है कि बिजनेस डेटा को बेहतर तरीके से समझें और उसी के आधार पर अपने फैसले लें, ताकि ग्रोथ आसान और तेज हो सके.
इसी दिशा में कंपनी अपने प्रोडक्ट Vector AI को लगातार बेहतर बना रही है, ताकि ब्रांड्स को ज्यादा सटीक इनसाइट्स मिल सकें. वहीं Beacon IQ को बड़े स्तर पर लॉन्च करने की तैयारी चल रही है, जिससे मार्केटिंग को और स्मार्ट और असरदार बनाया जा सके. टीम का फोकस सिर्फ प्रोडक्ट बनाने पर नहीं है, बल्कि उन्हें इस तरह तैयार करना है कि वे असल बिजनेस समस्याओं को हल कर सकें.
साथ ही कंपनी भारत तक सीमित नहीं रहना चाहती. उसका लक्ष्य UK, UAE और US जैसे बाजारों में अपनी पकड़ और मजबूत करना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्लोबल ब्रांड्स के साथ काम किया जा सके.
अंत में प्रियंका कहती हैं, “हम सिर्फ एक कंपनी नहीं बना रहे, बल्कि एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहे हैं जो ब्रांड्स को सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करे. हमारा सपना है कि हम ग्लोबल स्तर पर असर डालें और ज्यादा से ज्यादा बिजनेस की ग्रोथ में योगदान दे सकें.”




