जीविका निधि: बिहार की महिलाओं को PM मोदी की सौगात; मिलेगा सस्ता लोन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ का शुभारंभ किया. अब जीविका दीदियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से सस्ता लोन मिलेगा. यह पहल महिलाओं की उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण को नई उड़ान देगी. करीब 20 लाख महिलाओं ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को देखा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड (Jeevika Nidhi) का शुभारंभ किया. यह संस्था बिहार (Bihar) की लाखों महिलाओं के लिए बड़ी सौगात है. अब जीविका दीदियां आसानी से किफायती ब्याज दर पर कर्ज ले सकेंगी. इससे उनके काम और छोटे कारोबार को नई गति मिलेगी. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे.
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि पहली बार बिहार की ग्रामीण महिलाओं के लिए एक पूरी तरह डिजिटल वित्तीय प्रणाली बनाई गई है. अब पैसे पाने के लिए बिचौलियों या महंगे माइक्रोफाइनेंस संस्थानों पर निर्भरता खत्म होगी. महिलाएं मोबाइल फोन के जरिए ही आवेदन कर सकेंगी और कर्ज सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचेगा.
करीब 20 लाख महिलाओं ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को लाइव देखा. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की दिशा में एक मजबूत कदम है. उन्होंने अपील की कि हर दुकान और बाजार में ‘Made in India’ और ‘Swadeshi’ उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए.
महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम
पीएम मोदी ने कहा कि “महिलाएं सशक्त होंगी तो भारत विकसित होगा.” उन्होंने बताया कि सरकार लगातार माताओं और बहनों के जीवन को आसान बनाने के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण से महिलाओं को सम्मान मिला है, प्रधानमंत्री आवास योजना में घर महिलाओं के नाम पर दिए गए हैं और हर घर जल योजना से स्वच्छ पेयजल मिला है. इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी है और मुफ्त राशन योजना ने हर मां की चिंता कम की है.
उन्होंने यह भी बताया कि लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बैंक सखी जैसी योजनाओं से महिलाओं की आय लगातार बढ़ रही है. प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में सरकार इन योजनाओं को और तेज़ करेगी, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी.
प्रधानमंत्री ने बिहार की संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती हमेशा से मातृशक्ति को सर्वोच्च स्थान देती आई है. गंगा मैया, कोसी मैया, गंडकी मैया, पुनपुन मैया और छठी मैया की पूजा यहां की पहचान है. जनकनंदिनी सीता माता भी बिहार की बेटी हैं. उन्होंने कहा कि यह परंपरा दिखाती है कि महिलाओं का सम्मान बिहार की आत्मा में बसा है.
जीविका निधि क्यों है खास
जीविका से जुड़ी महिलाएं अब तक छोटे-छोटे व्यवसाय जैसे दूध उत्पादन, अगरबत्ती बनाना, सब्जी उगाना, बकरी पालन और सिलाई-कढ़ाई करके परिवार की आय बढ़ा रही थीं. लेकिन उन्हें अक्सर 18%–24% तक महंगे ब्याज पर माइक्रोफाइनेंस संस्थानों से कर्ज लेना पड़ता था.
जीविका निधि इस समस्या का हल लेकर आई है. अब कम ब्याज दर पर बड़े कर्ज मिलेंगे और पैसा सीधे बैंक खाते में जाएगा. 12,000 सामुदायिक कार्यकर्ताओं को टैबलेट दिए जा रहे हैं, ताकि डिजिटल लेन-देन आसानी से हो सके. इससे महिलाओं को ज्यादा मुनाफा होगा और वे अपने कारोबार को विस्तार दे सकेंगी.
ग्रामीण उद्यमिता को नई उड़ान
जीविका की महिलाएं अब तक लाखों छोटे कारोबार और उत्पादक कंपनियां खड़ी कर चुकी हैं. इस नए फंड से वे और मजबूत होंगी. अब बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, डेयरी, हथकरघा, सब्जी उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिहार की महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बदल रही हैं. जीविका निधि इस बदलाव को और गति देगा.
आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं जीविका दीदियां
जीविका की शुरुआत 2006 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी, वर्ल्ड बैंक के सहयोग से. उस समय बिहार में ग़रीबी, आर्थिक बहिष्करण और महिलाओं की भागीदारी बेहद कम थी. 2011 में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत पूरे राज्य में फैलाया गया. यह योजना अब बिहार के 534 ब्लॉक और हर पंचायत में पहुंच चुकी है.
इस योजना की खास बात है इसका तीन-स्तरीय ढांचा. स्वयं सहायता समूह (SHG) में 10 से 15 महिलाएं मिलकर एक समूह बनाती हैं. फिर ये SHG मिलकर ग्राम संगठन (VO) बनाती हैं, और इनसे मिलकर क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) तैयार होता है. अब तक 10.6 लाख SHGs बनाए जा चुके हैं. आज बिहार की 1.35 करोड़ जीविका दीदियां 1 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था चला रही हैं. वो भी 99.5% रीपेमेंट रेट के साथ. अब तक 78,000 करोड़ रुपये से अधिक का लोन इन समूहों को दिया जा चुका है.
इस योजना को चलाने और विस्तार देने का जिम्मा संभाला है हिमांशु शर्मा (IAS), CEO – BRLPS (Bihar Rural Livelihoods Promotion Society) ने. बीते दिनों YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे यह योजना एक प्रयोग से शुरू होकर आज 1 लाख करोड़ रुपये की ग्रामीण अर्थव्यवस्था बन गई है — और वो भी महिलाओं के नेतृत्व में.
हिमांशु शर्मा ने कहा, “यह कोई राहत योजना नहीं है. यह आत्म-सम्मान, आर्थिक शक्ति और सामूहिक भरोसे की कहानी है.”




