Mast Banarasi Paan: किसान के बेटे ने 2 लाख रु से खड़ा किया 7 करोड़ का बिजनेस
किसान परिवार में जन्मे पीएन ठाकुर ने 2 लाख रु से Mast Banarasi Paan (MBP) की शुरुआत की. उनकी पत्नी माया कुमारी ने नौकरी छोड़कर अपनी बचत के पैसों से उनकी मदद की. आज 20 से ज्यादा राज्यों और 300 से ज्यादा शहरों में 400+ आउटलेट्स के साथ यह ब्रांड मौजूद है.
कभी गलियों के नुक्कड़ों पर दिखने वाला पान आज कैफे कल्चर का हिस्सा बन रहा है. पहले छोटे शहरों या मोहल्लों में पान की वही पुरानी दुकानें दिखती थीं. एक कोना, कुछ डिब्बे, और वही पारंपरिक अंदाज़. तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही पान एक दिन चमकदार कैफे में, नए अंदाज़ और नई पहचान के साथ परोसा जाएगा.
धीरे-धीरे वक्त बदला. लोगों की पसंद बदली. और इसी बदलाव के बीच कुछ लोगों ने इस साधारण सी चीज में एक बड़ा मौका देखा. उन्होंने पान को सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि एक अनुभव बनाने की कोशिश की. साफ सुथरा माहौल, बेहतर प्रेजेंटेशन और आधुनिक सोच ने इस पारंपरिक प्रोडक्ट को पूरी तरह बदल दिया. यही बदलाव आज पान को एक नई पहचान दे रहा है.
इसी बदलाव को असल रूप देने वालों में एक नाम है पीएन ठाकुर (P.N. Thakur) का. एक साधारण परिवार से आने वाले इस युवा ने उस बिजनेस को नई दिशा दी, जिसे कभी लोग गंभीरता से नहीं लेते थे.
शुरुआत
पीएन ठाकुर का बचपन एक किसान परिवार में बीता. मेहनत और अनुशासन उनकी परवरिश का हिस्सा थे. बचपन से ही वे छोटे कारोबारों को ध्यान से देखते थे. पान की दुकानें हर जगह थीं, लेकिन उनमें न सफाई थी, न कोई खास पहचान.
YourStory से बात करते हुए Mast Banarasi Paan (MBP) के फाउंडर और CEO पीएन ठाकुर बताते हैं: “मैंने बचपन से पान की दुकानों को बहुत करीब से देखा. हर गली में यह कारोबार था, लेकिन उसमें कोई व्यवस्था नहीं थी. मुझे हमेशा लगता था कि इतनी लोकप्रिय चीज को बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है. अगर इसे साफ सुथरे माहौल और सही तरीके से पेश किया जाए तो यह एक सम्मानजनक और बड़ा बिजनेस बन सकता है. यही सोच धीरे धीरे मेरे अंदर मजबूत होती गई.”
अपनी पढ़ाई के दौरान, खासकर MBA करते समय, उन्होंने बिजनेस की बारीकियां समझीं. उन्हें पता चला कि ग्राहक क्या चाहता है और कैसे एक साधारण प्रोडक्ट को अलग बनाया जा सकता है.
नौकरी के अनुभव ने उन्हें चुनौतियों को नए नजरिए से देखना सिखाया.
पीएन ठाकुर बताते हैं: “मेरी पढ़ाई ने मुझे यह सिखाया कि सिर्फ कॉपी करने से कुछ नया नहीं बनता. आपको अलग सोचना पड़ता है. नौकरी के दौरान मुझे समझ आया कि हर समस्या में एक मौका छिपा होता है. इसी ने मुझे हिम्मत दी कि मैं पान जैसे अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में कुछ नया करने की कोशिश करूं.”
पत्नी ने नौकरी छोड़ी, सेविंग्स से की मदद
पीएन ठाकुर ने साल 2016 में सिर्फ 2 लाख रुपये लगाकर Mast Banarasi Paan की शुरुआत की. यह रकम भी उनके लिए आसान नहीं थी. उनकी पत्नी माया कुमारी ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपनी सेविंग्स इस बिजनेस में लगा दीं.
यह एक बड़ा जोखिम था, लेकिन यही उनका सबसे बड़ा सहारा भी बना.
ठाकुर बताते हैं: “हमने बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी. पैसे कम थे, लेकिन भरोसा बहुत था. मेरी पत्नी ने अपनी नौकरी छोड़कर मेरी मदद की. यह हमारे लिए आसान फैसला नहीं था. लेकिन उसी भरोसे ने हमें आगे बढ़ने की ताकत दी. जब कोई आपके सपने पर यकीन करता है, तो आप खुद भी उसे सच करने के लिए पूरी जान लगा देते हैं.”
पीएन ठाकुर ने पान को एक नई पहचान दी. उन्होंने इसे कैफे स्टाइल में पेश किया. साफ सुथरा माहौल बनाया और इसे पूरी तरह तंबाकू मुक्त रखा.
धीरे-धीरे लोगों की सोच बदलने लगी. अब पान सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि एक अनुभव बन गया.
पीएन ठाकुर कहते हैं: “शुरुआत में लोगों को समझाना मुश्किल था. पान का मतलब तंबाकू माना जाता था. लेकिन हमने इसे एक हेल्दी और रिफ्रेशिंग डेज़र्ट की तरह पेश किया. जब लोगों ने इसे नए तरीके से अनुभव किया, तो उनकी सोच बदलने लगी. आज परिवार और युवा दोनों इसे पसंद कर रहे हैं. यह बदलाव धीरे धीरे आया, लेकिन बहुत मजबूत है.”

Mast Banarasi Paan (MBP) की टीम
बिना फंडिंग के 400+ आउटलेट्स
आज Mast Banarasi Paan के 400 से ज्यादा आउटलेट्स हैं. 20 से ज्यादा राज्यों और 300 से ज्यादा शहरों में यह ब्रांड मौजूद है. इसका हेडक्वार्टर नोएडा में है.
सबसे खास बात यह है कि यह पूरा सफर बिना किसी बाहरी फंडिंग के तय हुआ है.
पीएन ठाकुर कहते हैं: “हमने कभी बाहरी फंडिंग नहीं ली. हमने अपने बिजनेस को खुद ही धीरे धीरे बढ़ाया. आज हमारे पास 400 से ज्यादा आउटलेट्स हैं. यह दिखाता है कि अगर सही प्लानिंग और सिस्टम हो, तो अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर भी बड़े स्तर पर बढ़ सकता है. हमारा फ्रेंचाइजी मॉडल लोगों को एक स्थिर और भरोसेमंद कमाई का मौका देता है.”
चुनौतियां और आगे का रास्ता
इस बिजनेस में सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सोच बदलना थी. पान को लोग एक छोटे और अनऑर्गेनाइज्ड बिजनेस के रूप में देखते थे.
लेकिन समय के साथ, साफ सुथरे आउटलेट्स और बेहतर अनुभव ने इस सोच को बदल दिया. आज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Swiggy और Zomato भी इस बिजनेस को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं.
पीएन ठाकुर कहते हैं: “सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सोच बदलना था. शुरुआत में लोग इसे एक छोटा और अनऑर्गेनाइज्ड बिजनेस मानते थे. लेकिन जब उन्होंने हमारे आउटलेट्स देखे और प्रोडक्ट का अनुभव किया, तो उनकी राय बदलने लगी. आज हमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, जिससे हम नए ग्राहकों तक पहुंच पा रहे हैं.”




