प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: वक्त पर EMI दे रहे हैं छोटे कारोबारी! 7 वर्षों में NPA केवल 3.3%

By yourstory हिन्दी
November 28, 2022, Updated on : Mon Nov 28 2022 09:14:12 GMT+0000
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: वक्त पर EMI दे रहे हैं छोटे कारोबारी! 7 वर्षों में NPA केवल 3.3%
मुद्रा योजना में लोन की तीन कैटेगरी हैं और मैक्सिमम लोन अमाउंट 10 लाख रुपये है.
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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri MUDRA Yojana) को लॉन्च हुए 7 वर्ष हो चुके हैं. इन 7 वर्षों में मुद्रा ऋण के उधारकर्ताओं, अनिवार्य रूप से सूक्ष्म और लघु उद्यमों ने बैंकों को अपनी ईएमआई (इक्वेटेड मंथली इन्स्टॉलमेंट्स) का भुगतान किया है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि मुद्रा ऋण के लिए बैंकों के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स, पूरे बैंकिंग सेक्टर के औसत एनपीए से कम हैं. मुद्रा लोन के लिए बैंकों के एनपीए में कोविड-19 महामारी के दौरान एक्सटेंड किए गए ऋण भी शामिल हैं, जब छोटे उद्यम सबसे बुरी तरह प्रभावित थे.


8 अप्रैल, 2015 को योजना के लॉन्च के बाद से सभी बैंकों (सार्वजनिक, निजी, विदेशी, राज्य सहकारी, क्षेत्रीय ग्रामीण और लघु वित्त) के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत खराब ऋण (Bad Loan) का आंकड़ा 30 जून 2022 तक 46,053.39 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यह आंकड़ा इस अवधि के दौरान योजना के तहत हुए 13.64 लाख करोड़ रुपये के कुल डिस्बर्समेंट का केवल 3.38 प्रतिशत है. पूरे बैंकिंग सेक्टर पर मौजूद कुल एनपीए की बात करें तो यह वित्त वर्ष 2021—22 के दौरान कुल लोन डिस्बर्समेंट का 5.97 प्रतिशत रहा.


वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में इससे पहले के 6 वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र का सकल एनपीए बहुत अधिक था. यह वित्त वर्ष 2020-21 में कुल डिस्बर्समेंट का 7.3 प्रतिशत, 2019-20 में 8.2 प्रतिशत, 2018-19 में 9.1 प्रतिशत, 2017-18 में 11.2 प्रतिशत और 2016-17 में 9.3 प्रतिशत और 2015-16 में 7.5 प्रतिशत था. .

3 कैटेगरी के तहत मिलता है लोन

मुद्रा योजना में लोन की तीन कैटेगरी हैं, और उनके तहत मिलने वाला लोन अमाउंट इस तरह है…


शिशु लोन: 50,000 रुपये तक के कर्ज के लिए

किशोर लोन: 50,001 से 5 लाख रुपये तक के कर्ज के लिए

तरुण लोन: 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के कर्ज के लिए


इन तीनों कैटेगरी में शिशु ऋणों के मामले में एनपीए, लोन डिस्बर्समेंट का 2.25 प्रतिशत रहा, जो सबसे कम है. वहीं किशोर ऋणों के मामले में एनपीए की दर सबसे ज्यादा 4.49 प्रतिशत रही. तरुण ऋणों के लिए खराब ऋण, ​लोन डिस्बर्समेंट का 2.29 प्रतिशत था.

कुछ दिलचस्प पॉइंट

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग द्वारा प्राप्त आरटीआई प्रतिक्रिया के तहत डेटा 5 दिलचस्प रुझानों का खुलासा करता है:


1. इस वर्ष 30 जून तक दिए गए सभी मुद्रा ऋणों के मामले में मूल्य के संदर्भ में लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का रहा. उनकी बैलेंस शीट में 31,025.30 करोड़ रुपये का बैड लोन हो गया, जो उनके 6,23,279.85 करोड़ रुपये के डिस्बर्समेंट का 4.98 प्रतिशत है. कुल एडवांसेज के प्रतिशत के रूप में, यह समग्र रूप से बैंकिंग क्षेत्र के लिए 5.97 प्रतिशत से भी कम है.


2. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में निजी क्षेत्र के बैंकों की वसूली कहीं बेहतर है. उनके लिए, सात साल की अवधि के दौरान खराब ऋण या एनपीए 6,469.2 करोड़ रुपये पर रहे, जो उनके 4,90,652.6 करोड़ रुपये के डिस्बर्समेंट का केवल 1.32 प्रतिशत है. इस वर्ष 30 जून तक दिए गए सभी मुद्रा ऋणों के मामले में मूल्य के संदर्भ में लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र के बैंकों का रहा.


3. शिशु, किशोर और तरुण लोन कैटेगरीज में कुल 19.78 करोड़ लाभार्थियों (ऋण खातों के रूप में भी संदर्भित) में से केवल 82.98 लाख ऋण खाते या 4.19 प्रतिशत बैड लोन में तब्दील हुए. इसका मतलब है कि 100 लाभार्थियों में से केवल 4 लाभार्थियों ने ही पुनर्भुगतान में चूक की.


4. निजी क्षेत्र के बैंक मुद्रा लोन के 10.46 करोड़ लाभार्थियों या कुल 19.78 करोड़ ऋण खातों में से लगभग 53 प्रतिशत को कवर करते हैं. इससे पता चलता है कि निजी क्षेत्र के बैंकों ने छोटे मूल्यवर्ग के ऋण दिए, लेकिन उनका दायरा बहुत व्यापक था. इसकी पुष्टि आंकड़ों से होती है. शिशु श्रेणी के ऋण में निजी क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी बहुत अधिक है. शिशु श्रेणी के तहत 15.39 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 4.21 लाख करोड़ रुपये के लोन वितरित किए गए. इसमें निजी क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है.


5. इसके विपरीत, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, मुद्रा लोन के तहत केवल 4.66 करोड़ लाभार्थियों को या कुल मुद्रा ऋण खातों के 24 प्रतिशत से कम को कवर करते हैं. किशोर लोन के डिस्बर्समेंट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी 35.64 प्रतिशत थी, और तरुण श्रेणी में 61 प्रतिशत थी.


Edited by Ritika Singh