Pringle Homeware: 21 साल में 120 करोड़ रु का कारोबार! अब पैन-इंडिया विस्तार की तैयारी
2005 में शुरू हुई Pringle Homeware डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस से आगे बढ़कर किचन और होम अप्लायंसेज ब्रांड बनी. कंपनी अब 120 करोड़ रुपये के रेवेन्यू, पैन-इंडिया विस्तार और 2030 तक अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है.
भारत के होम और किचन अप्लायंसेज बाजार में एक तरफ बड़े ब्रांड हैं, तो दूसरी तरफ कम कीमत वाले कई विकल्प भी मौजूद हैं. इसी बाजार में 2005 में Pringle Homeware ने कदम रखा. कंपनी की शुरुआत किसी बड़े फंडरेज या तेज विस्तार की रणनीति के साथ नहीं हुई थी. इसके पीछे परिवार का डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस और बाजार को करीब से समझने का अनुभव था.
आज कंपनी करीब 120 करोड़ रुपये के सालाना रेवेन्यू तक पहुंचने का अनुमान लगा रही है. Pringle के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में उसका कारोबार करीब 30% की सालाना दर से बढ़ा है और चालू साल में वह करीब 50% ग्रोथ का अनुमान लगा रही है. कंपनी के मुताबिक, उसने अब तक कारोबार को अपनी कमाई से चलाया है. कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है और वह मुनाफे में है.
अब कंपनी के सामने अगला सवाल केवल कारोबार बढ़ाने का नहीं, बल्कि उत्तर भारत से बाहर अपनी मौजूदगी बनाने, डिजिटल चैनलों को मजबूत करने और मैन्युफैक्चरिंग में अधिक नियंत्रण हासिल करने का है.
पिता से मिली बिजनेस की समझ
नई दिल्ली स्थित Pringle की शुरुआत को इसके फाउंडर विजय सिंघानिया के फैमिली बिजनेस से अलग करके देखना मुश्किल है. उनके पिता, स्वर्गीय आत्मा राम सिंघानिया ने सेल्सपर्सन के तौर पर काम शुरू किया और बाद में डिस्ट्रीब्यूटर बने. विजय और उनके परिवार ने इस सफर को करीब से देखा.
डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस ने परिवार को यह समझने का मौका दिया कि रिटेल बाजार में किसी प्रोडक्ट की सफलता केवल उसकी कीमत से तय नहीं होती. प्रोडक्ट की उपलब्धता, क्वालिटी, ग्राहक का अनुभव और सर्विस भी खरीदारी के फैसले को प्रभावित करते हैं.
2005 में परिवार ने इसी अनुभव को एक कंज्यूमर ब्रांड में बदलने की कोशिश की. शुरुआती वर्षों में कंपनी ने अपनी बचत और रिटेन्ड अर्निंग्स का इस्तेमाल किया. पहले सीमित बाजार में प्रोडक्ट्स को उतारा गया और ग्राहक प्रतिक्रिया के आधार पर पोर्टफोलियो बढ़ाया गया.
YourStory से बात करते हुए Pringle Homeware के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर विजय सिंघानिया बताते हैं, “हमारे पिता ने सेल्सपर्सन के तौर पर अपना सफर शुरू किया था और धीरे-धीरे डिस्ट्रीब्यूटर बने. हमने उन्हें बहुत करीब से मेहनत करते देखा. 2005 में Pringle की शुरुआत इसी सोच से हुई. हमने पहले छोटे स्तर पर बाजार को समझा, प्रोडक्ट को परखा और फिर धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाया.”
किफायती प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस
Pringle ने शुरुआत से ऐसे प्रोडक्ट्स पर ध्यान दिया जिन्हें कंपनी ‘अफोर्डेबल प्रीमियम’ कहती है. यानी कीमत अपेक्षाकृत सुलभ रखने के साथ क्वालिटी और डिजाइन पर भी ध्यान देना.
कंपनी के मौजूदा पोर्टफोलियो में मिक्सर ग्राइंडर, इलेक्ट्रिक केतली, चॉपर, न्यूट्री ब्लेंडर, एयर फ्रायर, इंडक्शन कुकटॉप, कॉफी मेकर और दूसरे छोटे घरेलू उपकरण शामिल हैं. कुकवेयर भी कारोबार का हिस्सा है. कंपनी के अनुसार, उसके करीब 60% रेवेन्यू का योगदान अप्लायंसेज से और 40% कुकवेयर से आता है.
हालांकि इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा पहले से काफी ज्यादा है. बड़े राष्ट्रीय ब्रांडों के अलावा कई क्षेत्रीय और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड भी कम और मिड-प्राइस सेगमेंट में ग्राहक हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
Pringle के लिए चुनौती यह है कि कीमत के दबाव के बीच वह क्वालिटी, ब्रांड के भरोसे और सर्विस को किस तरह बनाए रखता है. कंपनी का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में करीब 30% की सालाना ग्रोथ के बाद इस साल वह करीब 50% ग्रोथ का अनुमान लगा रही है. इससे रेवेन्यू लगभग 120 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
विजय कहते हैं, “जब हमने Pringle शुरू किया, तब हमारा मकसद सिर्फ सस्ता प्रोडक्ट बेचना नहीं था. हम ऐसा ब्रांड बनाना चाहते थे जो गुणवत्ता और टिकाऊपन दे और फिर भी भारतीय ग्राहक की पहुंच में रहे.”
कंपनी का कहना है कि उसने अभी तक बाहरी फंडिंग के बजाय कारोबार से हुई पूंजी के जरिए विस्तार किया है. इसी के साथ कंपनी EBITDA पॉजिटिव रहने की बात भी कहती है.
EBITDA पॉजिटिव का मतलब है कि कंपनी अपने रोजमर्रा के कारोबार से खर्च निकालने के बाद मुनाफा कमा रही है. इसमें ब्याज, टैक्स और कुछ अन्य खर्चों को शामिल नहीं किया जाता.

Pringle Homeware की टीम
देश भर में विस्तार की तैयारी
Pringle का शुरुआती कारोबार मुख्य रूप से दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तर भारतीय बाजारों में केंद्रित रहा. अब कंपनी इस भौगोलिक निर्भरता को कम करना चाहती है.
कंपनी ने पूर्वी और मध्य भारत में विस्तार शुरू किया है. इसमें पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, नागपुर, छत्तीसगढ़ और नॉर्थ ईस्ट के बाजार शामिल हैं. कंपनी कोलकाता को पूर्वी भारत के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बाजार मानती है.
यह विस्तार केवल नए शहरों में प्रोडक्ट भेजने तक सीमित नहीं है. नए बाजार में डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स का नेटवर्क तैयार करना, स्टॉक उपलब्ध रखना और आफ्टर-सेल्स सर्विस देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा.
पारंपरिक रिटेल के साथ कंपनी अब ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स पर भी ध्यान दे रही है. Pringle ने Blinkit पर बिक्री शुरू की है और कंपनी के मुताबिक Zepto पर भी विस्तार की योजना है.
कंपनी के लिए डिजिटल चैनल केवल एक अतिरिक्त बिक्री माध्यम नहीं हैं. ऑनलाइन बिक्री से प्राइसिंग, प्रोडक्ट की डिमांड और ग्राहक के खरीदारी व्यवहार को समझने के लिए डेटा भी मिलता है. हालांकि, इन चैनलों में डिस्काउंटिंग और ग्राहक अधिग्रहण की लागत जैसी चुनौतियां भी रहती हैं.
विजय के मुताबिक, “हम कई वर्षों तक मुख्य रूप से उत्तर भारत में मजबूत रहे. अब हमारा लक्ष्य इस दायरे को बढ़ाना है. हमने पूर्वी और मध्य भारत में विस्तार शुरू किया है. साथ ही ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स में भी आगे बढ़ रहे हैं.”
बदलती पसंद के साथ बदलता पोर्टफोलियो
छोटे किचन अप्लायंसेज का बाजार भी उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं से प्रभावित हो रहा है. एयर फ्रायर, न्यूट्री ब्लेंडर और दूसरे उपकरणों की मांग में उपयोगिता के साथ डिजाइन, सुविधा और हेल्थ-कॉन्शसनेस जैसे पहलू भी जुड़ रहे हैं.
Pringle अपने पोर्टफोलियो को इसी दिशा में बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. कंपनी ने Platinum Series पर काम शुरू किया है, जिसमें डिजाइन और हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट्स पर जोर देने की योजना है.
कंपनी का कहना है कि प्रोडक्ट तैयार करने में बिक्री और बाजार से जुड़े डेटा का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ई-कॉमर्स और डिजिटल चैनलों से मिलने वाले डेटा के जरिए कंपनी यह समझने की कोशिश करती है कि अलग-अलग बाजारों में किस तरह के प्रोडक्ट और प्राइस पॉइंट काम कर रहे हैं.
विजय कहते हैं, “आज का भारतीय ग्राहक पहले से ज्यादा जागरूक है. वह केवल कीमत नहीं देखता. वह क्वालिटी, डिजाइन और अपनी लाइफस्टाइल से जुड़े पहलुओं को भी देखता है. हमारे लिए इनोवेशन का मतलब ग्राहक की जरूरत को समझकर उसके मुताबिक प्रोडक्ट तैयार करना है.”
सेल्स के साथ मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
कंपनी की अगली बड़ी योजना मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी है. Pringle के मुताबिक, उसने 10 एकड़ जमीन खरीदी है, जहां नई मैन्युफैक्चरिंग युनिट लगाने की योजना है. कंपनी इसे दो चरणों में तैयार करना चाहती है. पहला चरण 2028 तक और दूसरा 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है. कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य 2030 तक अपने सभी प्रोडक्ट्स का निर्माण अपनी फैक्ट्री में करने का है.
अपनी मैन्युफैक्चरिंग युनिट लगाने करने से प्रोडक्ट तैयार करने और सप्लाई चेन पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है. दूसरी ओर, इसके लिए बड़े पूंजी निवेश, क्षमता उपयोग और संचालन संबंधी जोखिमों को संभालना भी जरूरी होगा.
कंपनी अगले तीन वर्षों में रेवेन्यू तीन गुना करने का लक्ष्य रखती है. इसके साथ EBITDA पॉजिटिव बनाए रखना भी उसकी योजना का हिस्सा है.
भविष्य में कंपनी बड़े होम अप्लायंसेज बनाने पर भी विचार कर रही है. विजय ने टीवी, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसी कैटेगरी का संकेत दिया है. हालांकि, इस सेगमेंट में कदम रखने पर कंपनी को मौजूदा बड़े ब्रांडों से कहीं तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा.
विजय कहते हैं, “अगले तीन साल हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. हम रेवेन्यू को तीन गुना करने के साथ EBITDA पॉजिटिव रहना चाहते हैं. मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता भी हमारी बड़ी प्राथमिकता है.”
आगे की राह और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
2005 में डिस्ट्रीब्यूशन के अनुभव से शुरू हुआ Pringle अब एक बड़े और अधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में विस्तार की कोशिश कर रहा है. कंपनी के सामने एक साथ कई मोर्चे हैं: नए बाजारों में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बनाना, ऑनलाइन चैनलों पर बिक्री बढ़ाना, ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और प्रस्तावित मैन्युफैक्चरिंग युनिट में निवेश करना.
किचन और फूड-प्रिपरेशन अप्लायंसेज के बाजार में Pringle को Bajaj Electricals, Philips और Preethi, Butterfly, Maharaja Whiteline और TTK Prestige जैसे मंझे हुए ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा करनी होगी. इसके अलावा Wonderchef, Havells, Crompton और Morphy Richards जैसे ब्रांड भी अलग-अलग कैटेगरी में मौजूद हैं.
ऐसे बाजार में Pringle के लिए अगला चरण केवल तेजी से रेवेन्यू बढ़ाने का नहीं होगा. उसे यह भी साबित करना होगा कि उत्तर भारत में बनाई गई डिस्ट्रीब्यूशन-बेस्ड कारोबारी समझ को वह राष्ट्रीय स्तर पर दोहरा सकता है.
विजय की महत्वाकांक्षा अगले दशक में Pringle को एक बड़े इंडियन होमवेयर ब्रांड के रूप में स्थापित करने की है. कंपनी का घोषित लक्ष्य अगले तीन वर्षों में कारोबार तीन गुना करना और 2030 तक अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना है. इन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कंपनी की असली परीक्षा आने वाले वर्षों में नए बाजारों में ग्राहक हासिल करने, प्रतिस्पर्धी कीमत बनाए रखने और बढ़ते कारोबार के साथ वित्तीय अनुशासन बरकरार रखने की होगी.




