कैसे RapidShyp बदल रहा है भारत का लॉजिस्टिक्स गेम, AI से घटा रहा है RTO और डिलीवरी खर्च
भारत में ई-कॉमर्स तेजी से बदल रहा है. अब ग्राहक सिर्फ सस्ते प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि तेज और भरोसेमंद डिलीवरी एक्सपीरियंस भी चाहते हैं. ऐसे दौर में RapidShyp जैसे प्लेटफॉर्म दिखा रहे हैं कि लॉजिस्टिक्स केवल कूरियर सर्विस नहीं, बल्कि कस्टमर एक्सपीरियंस और बिजनेस ग्रोथ का अहम हिस्सा है.
भारत में ई-कॉमर्स तेजी से बढ़ रहा है. छोटे शहरों से लेकर बड़े मेट्रो तक लोग ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं. Boston Consulting Group (BCG) और McKinsey की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश का ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक 180 से 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. वहीं, Bain & Company की रिपोर्ट बताती है कि 2020 के बाद जुड़े हर पांच में से तीन नए ऑनलाइन खरीदार टियर थ्री और उससे छोटे शहरों से आए हैं. दूसरी ओर, Unicommerce की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में D2C (डायरेक्ट टू कंज्यूमर) ब्रांड्स के 66 प्रतिशत नए ऑर्डर टियर टू और टियर थ्री शहरों से आए.
तेजी से बढ़ते इस डिजिटल कारोबार के साथ लॉजिस्टिक्स की अहमियत भी बढ़ी है. Mordor Intelligence की रिपोर्ट के अनुसार भारत का ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स बाजार 2025 में 6.65 अरब डॉलर का था, जो 2031 तक 11 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है. ऐसे समय में जब लाखों छोटे कारोबार ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं, डिलीवरी, रिटर्न और ग्राहक अनुभव जैसी चुनौतियां पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं.
इसी बदलते दौर में गुरुग्राम स्थित स्टार्टअप RapidShyp अपनी जगह बना रहा है. कंपनी का फोकस सिर्फ पार्सल भेजना नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स को ज्यादा समझदार और आसान बनाना है.
पुराने सिस्टम की मुश्किलों से निकला आइडिया
RapidShyp की शुरुआत साल 2023 में हुई. कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राघव सिंघल ने इसे शुरू किया. यह प्लेटफॉर्म OM Logistics के लंबे अनुभव से निकला एक नया प्रयोग था. OM Logistics कई सालों से बड़े स्तर पर B2B (बिजनेस टू बिजनेस) फ्रेट मूवमेंट में काम कर रही थी. वहीं RapidShyp को खास तौर पर ई-कॉमर्स और D2C ब्रांड्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया.
शुरुआत में कंपनी सिर्फ एक शिपिंग एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म थी. लेकिन धीरे-धीरे यह एक बड़े लॉजिस्टिक्स टेक सिस्टम में बदल गई. आज RapidShyp 29 हजार से ज्यादा पिनकोड्स तक पहुंच बना चुका है. प्लेटफॉर्म पर 16 से ज्यादा कूरियर पार्टनर्स जुड़े हुए हैं. कंपनी ने AI समर्थित RS Ayumi, RS Cargo+, RS Connect और मोबाइल शिपिंग टूल्स जैसे कई प्रोडक्ट भी लॉन्च किए हैं.
YourStory से बात करते हुए RapidShyp के CEO रवि गोयल बताते हैं, “जब हमने इस सेक्टर को करीब से देखा तो समझ आया कि ई-कॉमर्स कंपनियों की सबसे बड़ी दिक्कत सिर्फ ऑर्डर्स लाना नहीं है. असली चुनौती उन ऑर्डर्स को सही समय पर और सही तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाना है. बहुत से सेलर्स अलग अलग कूरियर डैशबोर्ड संभालते थे. डिलीवरी अपडेट्स मैन्युअली ट्रैक करते थे. कई बार RTO लॉसेस पूरी कमाई पर असर डालते थे. हमें लगा कि लॉजिस्टिक्स को सिर्फ ट्रांसपोर्ट की तरह नहीं बल्कि बिजनेस इंटेलिजेंस की तरह देखना होगा.”

RapidShyp की टीम
छोटे कारोबारियों के लिए आसान बना लॉजिस्टिक्स
भारत में हजारों छोटे सेलर्स इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और मार्केटप्लेस के जरिए अपना कारोबार चला रहे हैं. लेकिन जैसे ही ऑर्डर्स बढ़ते हैं, लॉजिस्टिक्स संभालना मुश्किल होने लगता है. फेस्टिव सेल या इन्फ्लुएंसर कैंपेन के दौरान अचानक सैकड़ों ऑर्डर्स आ जाते हैं. ऐसे समय में डिलीवरी डिले और कस्टमर शिकायतें तेजी से बढ़ती हैं.
RapidShyp इसी परेशानी को आसान बनाने की कोशिश करता है. प्लेटफॉर्म एक ही डैशबोर्ड पर शिपिंग, ट्रैकिंग, एनडीआर मैनेजमेंट और बायर कम्युनिकेशन जैसी सुविधाएं देता है. सेलर्स को अलग अलग कूरियर कंपनियों से बात नहीं करनी पड़ती. सिस्टम खुद बेहतर कूरियर पार्टनर सुझा देता है.
कंपनी ने बायर कम्युनिकेशन पर भी खास ध्यान दिया है. व्हाट्सऐप अपडेट्स, आईवीआर कॉल्स और डिलीवरी अलर्ट्स के जरिए ग्राहकों को लगातार जानकारी मिलती रहती है. इससे डिलीवरी सक्सेस रेट बेहतर होता है.
रवि गोयल कहते हैं, “आज छोटे ब्रांड्स भी वही एक्सपेक्टेशंस रखते हैं जो बड़े एंटरप्राइज ब्रांड्स रखते हैं. उन्हें फास्ट डिलीवरी चाहिए. उन्हें विजिबिलिटी चाहिए. लेकिन हर छोटे बिजनेस के पास बड़ी ऑपरेशंस टीम नहीं होती. हमने कोशिश की कि एडवांस्ड लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी सिर्फ बड़े कारोबार तक सीमित न रहे. एक छोटे फैशन सेलर या होमग्रोन ब्यूटी ब्रांड को भी वही सुविधा मिले जो बड़े प्लेयर्स इस्तेमाल करते हैं.”
AI से बदल रही है डिलीवरी की दुनिया
RapidShyp का सबसे बड़ा फोकस AI-समर्थित लॉजिस्टिक्स इंटेलिजेंस पर है. कंपनी का AI इंजन Ayumi शिपमेंट बिहेवियर को लगातार एनालाइज करता है. यह सिर्फ शिपिंग कॉस्ट नहीं देखता, बल्कि यह भी समझता है कि कौन सा कूरियर पार्टनर किस इलाके में बेहतर परफॉर्मेंस दे सकता है.
त्योहारी सीजन में कई डिलीवरी हब्स पर दबाव बढ़ जाता है. पहले सेलर्स को डिलेज का पता तब चलता था जब शिकायतें आने लगती थीं. लेकिन अब AI पहले ही रिस्क पहचानने की कोशिश करता है. इससे शिपमेंट्स को दूसरे रूट्स या कूरियर नेटवर्क्स पर भेजा जा सकता है.
कंपनी खास तौर पर RTO (रिटर्न-टू-ओरिजिन) को कम करने पर काम कर रही है. भारत में सीओडी ऑर्डर्स अभी भी बहुत ज्यादा हैं. ऐसे में फेल्ड डिलीवरी कारोबारियों के लिए बड़ा नुकसान बन जाती हैं.
रवि गोयल कहते हैं, “AI अब लॉजिस्टिक्स में सिर्फ एक बजवर्ड नहीं रह गया है. इसका प्रैक्टिकल इम्पैक्ट दिख रहा है. हर शिपमेंट का बिहेवियर अलग होता है. बायर इंटेंट अलग होता है. कई बार एक ही कूरियर अलग अलग रीजन में अलग परफॉर्मेंस देता है. हमारा AI इंजन इन पैटर्न्स को समझकर डिसीजन्स लेने में मदद करता है. खासकर COD (कैश ऑन डिलीवरी) मार्केट में RTO कम करना बहुत जरूरी है क्योंकि कई बिजनेस प्रॉफिट नहीं बल्कि फेल्ड डिलीवरी की वजह से नुकसान झेलते हैं.”

सांकेतिक चित्र (image: AI generated)
टियर टू और टियर थ्री बाजार पर बड़ा दांव
भारत के छोटे शहर अब ई-कॉमर्स ग्रोथ का बड़ा केंद्र बन रहे हैं. टियर टू और टियर थ्री शहरों से नए ब्रांड्स तेजी से सामने आ रहे हैं. लेकिन इन इलाकों में लॉजिस्टिक्स कंडीशंस हर जगह अलग होती हैं. कहीं डिलीवरी नेटवर्क कमजोर है तो कहीं एड्रेस वेरिफिकेशन की दिक्कत रहती है.
RapidShyp का कहना है कि आने वाले समय में भारत का अगला बड़ा डिजिटल कॉमर्स ग्रोथ वेव छोटे शहरों से ही आएगा. इसी वजह से कंपनी मोबाइल फर्स्ट टूल्स और ऑटोमेशन पर ज्यादा काम कर रही है ताकि छोटे सेलर्स भी आसानी से लॉजिस्टिक्स संभाल सकें.
Cargo+ के जरिए कंपनी एंटरप्राइज फ्रेट मैनेजमेंट में भी विस्तार कर रही है. इसके साथ भारत सरकार के ULIP प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन पर भी काम हुआ है ताकि शिपमेंट ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग बेहतर हो सके.
रवि गोयल कहते हैं, “आज भारत का ई-कॉमर्स मैप बदल रहा है. ग्रोथ सिर्फ मेट्रोस तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों के ब्रांड्स भी नेशनल लेवल पर कस्टमर्स तक पहुंच रहे हैं. लेकिन उन्हें ऐसे लॉजिस्टिक्स सिस्टम्स चाहिए जो उनके साथ स्केल कर सकें. हमारा फोकस सिर्फ पार्सल मूवमेंट पर नहीं है. हम चाहते हैं कि बिजनेस को ज्यादा विजिबिलिटी मिले, डिलीवरी ज्यादा प्रेडिक्टेबल बने और ऑपरेशंस का दबाव कम हो.”
आगे की योजना
RapidShyp आने वाले वर्षों में नेटवर्क एक्सपेंशन, वेयरहाउसिंग और पैकेजिंग सॉल्यूशंस पर काम करना चाहता है. कंपनी इन्वेंट्री को बायर्स के करीब स्टोर करने के मॉडल पर भी फोकस कर रही है ताकि डिलीवरी और तेज हो सके.
इसके साथ-साथ AI ड्रिवन कूरियर ऑप्टिमाइजेशन और एंटरप्राइज लॉजिस्टिक्स कैपेबिलिटीज को भी मजबूत किया जा रहा है. कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स सेक्टर सिर्फ ट्रांसपोर्टेशन तक सीमित नहीं रहेगा. प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन इसकी सबसे बड़ी ताकत बनेंगे.
CEO रवि गोयल बताते हैं, “हम लॉजिस्टिक्स को बैकग्राउंड प्रोसेस की तरह सीमलेस बनाना चाहते हैं. कई बिजनेस आज अलग अलग सिस्टम्स संभालते संभालते थक जाते हैं. फ्यूचर यूनिफाइड प्लेटफॉर्म्स का होगा जहां पार्सल शिपिंग, फ्रेट मूवमेंट और बायर कम्युनिकेशन सब एक साथ मैनेज हो सके. हमारा विजन यही है कि चाहे कोई नया ऑन्त्रप्रेन्योर हो या बड़ा एंटरप्राइज, लॉजिस्टिक्स उसकी ग्रोथ को रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ाने में मदद करे.”
भारत में ई-कॉमर्स का बाजार लगातार बदल रहा है. ग्राहक अब सिर्फ सस्ते प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि बेहतर डिलीवरी एक्सपीरियंस भी चाहते हैं. ऐसे समय में RapidShyp जैसे प्लेटफॉर्म यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि लॉजिस्टिक्स अब सिर्फ कूरियर सर्विस नहीं, बल्कि कस्टमर एक्सपीरियंस और बिजनेस ग्रोथ का अहम हिस्सा बन चुका है.




