इंडियन एयरफोर्स को मिला रतन टाटा का साथ, Airbus के साथ मिलकर बनाएंगे डिफेंस एयरक्राफ्ट

By रविकांत पारीक
October 29, 2022, Updated on : Mon Oct 31 2022 04:45:49 GMT+0000
इंडियन एयरफोर्स को मिला रतन टाटा का साथ, Airbus के साथ मिलकर बनाएंगे डिफेंस एयरक्राफ्ट
Airbus Defence and Space और Tata Group मिलकर भारत में कम से कम 40 सी-295 (C295) ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बनाएंगे. दोनों दिग्गज कंपनियों के बीच 21,935 करोड़ रुपये की डील हुई है. 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत ये एयरक्राफ्ट गुजरात के वडोदरा में बनाए जाएंगे.
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देश के सबसे सम्मानित उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा (Ratan Tata) ने एक बार फिर देशवासियों का दिल छू लिया है. अब वे इंडियन एयरफोर्स (Indian Air Force - IAF) के लिए डिफेंस एयरक्राफ्ट (Defence aircraft) बनाएंगे. इसके लिए उन्होंने यूरोप की विमानन प्रमुख कंपनी एयरबस (Airbus) के साथ हाथ मिलाया है. Airbus Defence and Space और टाटा ग्रुप (Tata Group) मिलकर भारत में कम से कम 40 सी-295 (C295) ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बनाएंगे. दोनों दिग्गज कंपनियों के बीच 21,935 करोड़ रुपये की डील हुई है. 'मेक इन इंडिया' (Make In India) पहल के तहत ये एयरक्राफ्ट गुजरात के वडोदरा में बनाए जाएंगे.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) रविवार (30 अक्टूबर) को इस प्रोडक्शन यूनिट की आधारशिला रखेंगे. यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है जिसमें एक प्राइवेट कंपनी द्वारा भारत में डिफेंस एयरक्राफ्ट बनाए जाएंगे.


आधुनिक तकनीक के साथ 5 से 10 टन क्षमता के 56 C-295MW विमानों के लिए पिछले साल किए गए समझौते को आगे बढ़ाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के लिए विनियामक अनुमोदन रक्षा मंत्रालय (MoD) के तहत वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (DGAQA) द्वारा दिया गया था, जो सेना से संबंधित खरीद और विकास कार्यक्रमों के लिए जिम्मेदार है.


मीडिया रिपोर्ट्स में रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि जरूरत के मुताबिक देश में विभिन्न स्थानों पर विमान के कुछ हिस्सों का निर्माण किया जाएगा. वडोदरा में विमान का पहला स्क्वाड्रन भी तैयार किया जाएगा.


इस प्रोजेक्ट पर 2010 से काम चल रहा है और यह 1961 में पहली बार उड़ान भरने वाले एवरो (Avro) ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के पुराने बेड़े की जगह लेने के लिए तैयार है.


जबकि अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) की लागत वार्ता सात साल पहले पूरी हो गई थी, यह सौदा वित्तीय मुद्दों और विभिन्न अन्य परियोजनाओं की प्राथमिकता के कारण अटका हुआ था. 2014 के बाद से एयरबस द्वारा कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गई है.

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'मेक इन इंडिया' के तहत बनेंगे 40 एयरक्राफ्ट

कॉन्ट्रैक्ट के तहत, 16 एयरक्राफ्ट उड़ान के लिए तैयार होने की स्थिति में दिए जाएंगे और 40 का निर्माण भारत में इंडियन एयरक्राफ्ट कॉन्ट्रैक्टर - TATA Consortium of Tata Advanced Systems Limited (TASL) और Tata Consultancy Services (TCS) द्वारा TASL के नेतृत्व में किया जाएगा.


पहले 16 तैयार एयरक्राफ्ट सितंबर 2023 और अगस्त 2025 के बीच एयरबस, स्पेन से प्राप्त होने वाले हैं, जबकि पहला मेड इन इंडिया (Made In India) एयरक्राफ्ट सितंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है. ये बात रक्षा सचिव अजय कुमार ने नई दिल्ली में पत्रकारों को बताई. उन्होंने कहा कि 2026 से भारत में प्रति वर्ष आठ एयरक्राफ्ट बनाए जाएंगे.


कुमार ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को C-295 एयरक्राफ्ट बनाने के एक बार के प्रयास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि विमानन क्षेत्र (aviation sector) के लिए एक नए इकोसिस्टम के अग्रदूत के रूप में देखा जाना चाहिए.


इंडियन एयरफोर्स ने अब तक केवल 56 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया था, नौसेना (Navy) और तटरक्षक बल (Coast Guard) भी 16-16 एयरक्राफ्ट के ऑर्डर पर विचार कर रहे हैं.

C-295 की खूबियां

C-295 में दो प्रैट एंड व्हिटनी PW-127 टर्बोप्रॉप इंजन लगाए गए हैं और मुख्य रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए एक सामरिक और सैन्य विमान के रूप में उपयोग किया जाता है.


C-295 नौ टन पेलोड या 71 कर्मियों (या 45 पैराट्रूपर्स) तक ले जा सकता है और इसकी अधिकतम गति 480 किमी प्रति घंटे है. अधिकारियों ने कहा कि यह छोटी या बिना तैयार हवाई पट्टियों से भी उड़ान भर सकता है, इसमें तेज प्रतिक्रिया और सैनिकों और कार्गो के पैरा ड्रॉपिंग के लिए एक रियर रैंप दरवाजा है, और भारतीय वायुसेना की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को मजबूत करेगा.


इसके अलावा, चूंकि C-295 बेहतर एवियोनिक्स, ईंधन दक्षता और लैंडिंग क्षमताओं के साथ भार क्षमता के मामले में AN32s के साथ तुलनीय हैं, IAF भविष्य में परिवहन क्षमता के लिए शुरू किए गए अध्ययन के आधार पर अतिरिक्त ऑर्डर दे सकता है.


चूंकि यह आकार में IAF के C-130Js, C-17s और IL-76s के बेड़े से छोटे हैं, इसलिए C-295 कई हवाई पट्टियों और हवाई अड्डों पर उड़ान भर सकते हैं और उतर सकते हैं जहाँ बड़े एयरक्राफ्ट नहीं जा सकते.

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IAF होगा दुनिया में C-295 का सबसे बड़ा ऑपरेटर

कुमार ने कहा कि एयरक्राफ्ट के लिए एक निर्यात क्षमता है, और योजना एक रखरखाव मरम्मत और ओवरहाल (MRO) स्थापित करने की होगी जो क्षेत्र की मांग को पूरा कर सके.


संयुक्त अरब अमीरात, फिलीपींस, थाईलैंड, उज्बेकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे देशों में C-295 एयरक्राफ्ट मौजूद हैं.


वहीं, IAF वाइस चीफ एयर मार्शल संदीप सिंह ने कहा कि IAF अंततः दुनिया में C-295 सुविधा का सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा.


रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि इंजन, लैंडिंग गियर, एवियोनिक्स, ईडब्ल्यू सूट आदि जैसे विभिन्न सिस्टम एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा मुहैया किए जाएंगे और टाटा कंसोर्टियम द्वारा एयरक्राफ्ट में एंटीग्रेट किए जाएंगे.


सभी 56 एयरक्राफ्ट भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Bharat Electronics Ltd) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (Bharat Dynamics Limited) द्वारा निर्मित स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (Electronic Warfare) सूट से लैस होंगे.


टाटा कंसोर्टियम द्वारा एयरक्राफ्ट को इंटीग्रेटेड सिस्टम के रूप में टेस्ट किया जाएगा और देश में पहली बार स्व-प्रमाणन के माध्यम से वितरित किया जाएगा. यह अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं को अपनाने की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में किया जा रहा है क्योंकि एयरबस विदेश में अपने खुद के एयरक्राफ्ट स्व-प्रमाणित करता है.


रक्षा सचिव ने कहा कि एक नई नीति पर काम किया जा रहा है ताकि इसे अन्य निर्माताओं पर भी लागू किया जा सके.

मिलेंगी हजारों नौकरियां

यह प्रोजेक्ट भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा और हजारों नौकरियां पैदा करेगा.


एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के सीईओ माइकल शॉएलहॉर्न (Michael Schoellhorn) ने 2021 में कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम के आगे विकास का समर्थन करेगा, निवेश और 15,000 कुशल प्रत्यक्ष रोजगार और आने वाले 10 वर्षों में 10,000 अप्रत्यक्ष पदों को लाएगा.


 Tata Consortium ने सात राज्यों में फैले 125 से अधिक घरेलू MSME आपूर्तिकर्ताओं की पहचान की है. यह रोजगार सृजन के लिए एक एक्सीलरेटर के रूप में काम करेगा और इससे प्रत्यक्ष रूप से 600 अत्यधिक कुशल रोजगार, 3,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार और 3,000 अतिरिक्त मध्यम कौशल रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. साथ ही, लगभग 240 इंजीनियरों को स्पेन में एयरबस यूनिट में प्रशिक्षित किया जाएगा.