हार्वर्ड से एमबीए की पढ़ाई कर भारत लौटे, लगवा चुके 25 लाख से अधिक पेड़

By yourstory हिन्दी
April 22, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:06 GMT+0000
हार्वर्ड से एमबीए की पढ़ाई कर भारत लौटे, लगवा चुके 25 लाख से अधिक पेड़
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तस्वीर साभार- द लॉजिकल इंडियन

बीते कुछ दशक में देश में हर इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर शहरीकरण का तेजी से विकास हुआ है। विकास की इस अंधी दौड़ में हमने पर्यावरण की परवाह ही ननहीं की। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि अगर हम 12 साल में नहीं जागे तो हमारा विनाश तय है। पर्यावरण को बचाने के लिए कई संगछन काम कर रहे हैं। मुंबई स्थित 'ग्रो ट्रीज' (Grow-Trees) ऐसा ही एक संगठन है जिसने बीते एक दशक में 25 लाख पौधे लगाए हैं। पर्यावरण की रक्षा करने के साथ ही संगठन ने 205,000 दिनों का रोजगार भी सृजित किया।


इस एनजीओ की स्थापना हार्वर्ड से एमबीए की पढ़ाई कर चुके करन शाह ने अपने पिता प्रदीप शाह के साथ मिलकर 2010 में की थी। प्रदीप शाह भारत की सबसे बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CRISIL के संस्थापक भी हैं। आज 9 साल में ग्रो ट्रीज की उपस्थिति 14 से अधिक राज्यों में है। इस मकसद के बारे में बात करते हुए करन कहते हैं, 'हम सार्वजनिक जगहों पर पौधरोपण करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना चाहते थे। हमारे पास अलग-अलग विषयों से संबंधित प्रॉजेक्ट्स हैं। जैसे, हाथियों के लिए, आदिवासियों के लिए पेड़।'


प्रदीप शाह (बाएं) और करण शाह

करण आगे कहते हैं, 'पेड़ हमारे सिर्फ मित्र नहीं होते बल्कि कई लोगों को आजीविका भी उपलब्ध कराते हैं, वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देते हैं, जल संरक्षण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।' फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह संगठन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और विश्व वन्यजीव फाउंडेशन द्वारा भी समर्थित है। करन व्यक्तिगत तौर पर भी लोगों से मिलकर उन्हें पौधरोपण करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।


उन्होंने कहा, 'हम लोगों को केवल 85 रुपये के मामूली खर्च पर अपने प्रियजनों के नाम पर एक पेड़ लगाने की पेशकश करते हैं। इसके बाद हम उन्हें एक ई-प्रमाण पत्र भी देते हैं जो ककि डिजिटल रूप से वितरित किया जाता है। यह संगठन बिना किसी मदद या सरकारी सहायता के केवल सार्वजनिक भूमि पर पौधे और पेड़ लगाता है। इसके अलावा हर साल प्रत्येक वृक्षारोपण का ऑडिट किया जाता है, उसमें जो पौधे बेकार हो जाते हैं उन्हें फिर से लगाया जाता है।


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