Owners ID को मिली $260,000 की फंडिंग; QR टेक्नोलॉजी से खोए हुए सामान को वापस दिलाने का बना रहा सिस्टम
यह स्टार्टअप QR कोड वाली स्मार्ट रिकवरी टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है, जिसकी मदद से खोया हुआ सामान उसके मालिक तक आसानी से पहुंच सकेगा. इस ताजा फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी प्रोडक्ट डेवलपमेंट, AI पावर्ड रिकवरी सिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग स्केल अप, मोबाइल ऐप इम्प्रूवमेंट और ग्लोबल एक्सपेंशन में करेगी.
भारत में हर साल लाखों लोग अपना सामान खो देते हैं. कभी एयरपोर्ट पर बैग छूट जाता है तो कभी चाबियां, वॉलेट, पासपोर्ट या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स कहीं गुम हो जाते हैं. ज्यादातर मामलों में सामान किसी को मिल भी जाता है, लेकिन असली समस्या यह होती है कि सामान मालिक तक वापस कैसे पहुंचे.
इसी समस्या का समाधान लाया है बेंगलुरु का स्टार्टअप Owners ID. कंपनी ने अब दुबई स्थित VC फर्म Crucifer Investments से $260,000 की प्री-सीड फंडिंग हासिल की है.
यह स्टार्टअप QR कोड वाली स्मार्ट रिकवरी टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है, जिसकी मदद से खोया हुआ सामान उसके मालिक तक आसानी से पहुंच सकेगा. कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य हर वैल्यूएबल आइटम को डिजिटल पहचान देना है ताकि कोई भी खोई हुई चीज तुरंत लौटाई जा सके.
इंडस्ट्री अनुमानों के अनुसार भारत में हर साल करीब 8.2 करोड़ लॉस्ट आइटम इंसिडेंट्स होते हैं. इनमें बैग, चाबियां, इलेक्ट्रॉनिक्स, वॉलेट, पासपोर्ट और दूसरी निजी चीजें शामिल हैं. दुनिया भर में यह आंकड़ा 31.9 करोड़ से ज्यादा है.
Owners ID की फाउंडर जेसिंथा लुइस (Jesintha Louis) इससे पहले एंटरप्राइज क्लाउड कंपनी G7 CR Technologies बना चुकी हैं. बाद में इस कंपनी का अधिग्रहण Noventiq ने किया था. जेसिंथा का कहना है कि Owners ID का आइडिया एक बेहद सामान्य लेकिन बड़ी समस्या से आया. लोग अक्सर सामान खो देते हैं और उसे पाने वाला व्यक्ति मालिक से संपर्क नहीं कर पाता.
कंपनी अब खुद को केवल लॉस्ट एंड फाउंड प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि एक “डिजिटल आइडेंटिटी लेयर” के रूप में देख रही है. इसका इस्तेमाल लोगों के सामान, पेट्स, गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, लगेज और जरूरी डॉक्यूमेंट्स तक में किया जा सकता है.
Owners ID का सिस्टम बेहद आसान तरीके से काम करता है. यूजर एक स्मार्ट QR टैग खरीदकर उसे अपने सामान पर लगा सकता है. अगर वह सामान कहीं खो जाता है और किसी व्यक्ति को मिलता है, तो वह केवल QR स्कैन करके मालिक से संपर्क कर सकता है.
सबसे खास बात यह है कि इसमें मालिक का फोन नंबर या निजी जानकारी सामने नहीं आती. इससे प्राइवेसी भी सुरक्षित रहती है और सामान वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.
कंपनी का कहना है कि फाइंडर को किसी ऐप की जरूरत नहीं होती. QR को सामान्य स्मार्टफोन कैमरे से स्कैन किया जा सकता है. यही वजह है कि यह सिस्टम Android और iPhone दोनों पर आसानी से काम करता है.
Owners ID अपने प्रोडक्ट्स को कई कैटेगरी में लेकर जा रही है. इसमें लगेज, चाबियां, वॉलेट, पासपोर्ट, गैजेट्स, व्हीकल्स, पेट टैग्स और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स शामिल हैं.
इस ताजा फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी प्रोडक्ट डेवलपमेंट, AI पावर्ड रिकवरी सिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग स्केल अप, मोबाइल ऐप इम्प्रूवमेंट और ग्लोबल एक्सपेंशन में करेगी.
फाउंडर जेसिंथा लुइस का कहना है कि आने वाले समय में फिजिकल बिलॉन्गिंग्स की डिजिटल आइडेंटिटी बेहद जरूरी बनने वाली है. उनका मानना है कि रिकवरी टेक्नोलॉजी का भविष्य इसी दिशा में है, जहां हर सामान डिजिटली आइडेंटिफाएबल और ग्लोबली रिकवरेबल होगा.
भारत में तेजी से बढ़ती स्मार्टफोन पेनिट्रेशन, QR एडॉप्शन और डिजिटल फर्स्ट बिहेवियर को देखते हुए कंपनी को भरोसा है कि यह टेक्नोलॉजी बड़े स्तर पर अपनाई जा सकती है. खासतौर पर ट्रैवल और अर्बन लाइफस्टाइल के बढ़ने के साथ ऐसी सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है.
Owners ID अब भारत से ग्लोबल मार्केट तक अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. कंपनी का लक्ष्य ऐसा यूनिवर्सल रिकवरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, जिससे दुनिया में कहीं भी खोया सामान आसानी से उसके असली मालिक तक पहुंच सके.




