ना ऐप, ना लॉगिन, सिर्फ WhatsApp: स्टार्टअप SkillBytes कैसे बदल रहा है पढ़ाई का तरीका
क्या पढ़ाई के लिए अलग ऐप की जरूरत है? SkillBytes का मानना है कि नहीं. WhatsApp पर चलने वाला यह AI-समर्थित अपस्किलिंग प्लेटफॉर्म 6 लाख छात्रों तक पहुंच चुका है. जानिए कैसे प्रेमप्रीत सिंह का यह स्टार्टअप शिक्षा में पहुंच, जुड़ाव और AI की मदद से नया बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है.
भारत में शिक्षा तक पहुंच पहले से कहीं बेहतर हुई है. ASER 2024 (Annual Status of Education Report 2024) के अनुसार ग्रामीण भारत में 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का स्कूल नामांकन 98 प्रतिशत से अधिक है. वहीं UDISE+ 2024-25 रिपोर्ट बताती है कि देश के 63 प्रतिशत से अधिक स्कूल अब कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधाओं से जुड़े हैं. इसके बावजूद चुनौती केवल स्कूल पहुंचने की नहीं, बल्कि प्रभावी ढंग से सीखने की है.
UNESCO की Global Education Monitoring (GEM) रिपोर्ट 2024-25 भी इस बात पर जोर देती है कि नामांकन बढ़ने के बावजूद सीखने के परिणाम और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं. ऐसे समय में कुछ नए स्टार्टअप पारंपरिक मॉडल से हटकर छात्रों तक पहुंचने के नए तरीके तलाश रहे हैं.
इसी कोशिश का एक उदाहरण है स्टार्टअप SkillBytes, जिसने पढ़ाई को अलग ऐप या वेबसाइट से निकालकर सीधे WhatsApp पर पहुंचाने का मॉडल तैयार किया है. दिसंबर 2025 में शुरू हुआ प्लेटफॉर्म आज करीब 6 लाख छात्रों तक पहुंच चुका है और शिक्षा में “फॉर्मेट” की समस्या को हल करने की कोशिश कर रही है.
SkillBytes के फाउंडर और CEO प्रेमप्रीत सिंह (Prempreet Singh) का मानना है कि शिक्षा की सबसे बड़ी समस्या कंटेंट की कमी नहीं, बल्कि उसके प्रस्तुत करने का तरीका है.

कॉर्पोरेट करियर से ऑन्त्रप्रेन्योरशिप तक का सफर
प्रेमप्रीत सिंह का करियर इंडियन कंज्यूमर टेक सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों से जुड़ा रहा है. उन्होंने MIT Manipal से पढ़ाई की और करीब 14 वर्षों तक Zomato, FreeCharge, PhonePe और Paytm जैसी कंपनियों में काम किया. इस दौरान उन्होंने बड़े पैमाने पर टेक प्रोडक्ट्स बनाने और उन्हें आम लोगों तक पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.
उनका कहना है कि उन्हें हमेशा चीजों को बेहतर तरीके से बनाने में रुचि रही. समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय वे उनके समाधान तैयार करने में विश्वास रखते हैं. यही सोच आगे चलकर SkillBytes की नींव बनी.
हाल ही में YourStory से हुई बातचीत में प्रेमप्रीत सिंह बताते हैं, “मैंने अपने पूरे करियर में एक बात बार बार देखी. कोई भी अच्छा प्रोडक्ट पहले एक छोटे ग्रुप के लिए काम करता है और फिर उसे लाखों लोगों तक पहुंचाने की चुनौती आती है. मुझे हमेशा इसी प्रक्रिया में दिलचस्पी रही. SkillBytes भी उसी सोच का विस्तार है. यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. एक समय के बाद लगा कि अगर शिक्षा को लेकर मेरा अपना नजरिया है तो उसे सिर्फ विचारों तक सीमित रखने के बजाय उसे वास्तविक रूप देना चाहिए.”
समस्या कंटेंट की नहीं, फॉर्मेट की थी
SkillBytes की शुरुआत एक साधारण लेकिन महत्वपूर्ण सवाल से हुई. इंटरनेट पर पहले से ही बड़ी मात्रा में मुफ्त और भुगतान वाली शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध है. इसके बावजूद छात्र अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं हासिल कर पा रहे हैं.
प्रेमप्रीत सिंह के अनुसार समस्या सामग्री की कमी नहीं है. असली चुनौती यह है कि अधिकांश प्लेटफॉर्म छात्रों से उम्मीद करते हैं कि वे अलग से ऐप डाउनलोड करें, लॉगिन करें और निर्धारित समय निकालकर पढ़ाई करें. जबकि वास्तविकता इससे अलग है.
इसी सोच के आधार पर SkillBytes को WhatsApp से जोड़कर डेवलप किया गया. छात्रों को किसी अलग ऐप की जरूरत नहीं पड़ती. वे उसी प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई कर सकते हैं जिसका उपयोग वे रोज करते हैं.
प्रेमप्रीत सिंह कहते हैं, “भारत में लगभग हर छात्र के फोन में WhatsApp है. हम यह समझना चाहते थे कि अगर छात्र पहले से किसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं तो उन्हें किसी दूसरी जगह क्यों भेजा जाए. हमारा उद्देश्य पढ़ाई को छात्रों की दिनचर्या का स्वाभाविक हिस्सा बनाना था. जब सीखना उसी जगह उपलब्ध हो जहां छात्र पहले से सक्रिय हैं, तो जुड़ाव अपने आप बढ़ता है.”
बिजनेस मॉडल
कंपनी का मॉडल पूरी तरह WhatsApp से जुड़ा है. छात्र चैट के माध्यम से पढ़ाई करते हैं, सवाल हल करते हैं और अभ्यास सामग्री प्राप्त करते हैं. SkillBytes ने फ्रीमियम मॉडल अपनाया है. शुरुआती स्तर पर छात्रों को मुफ्त सुविधा मिलती है. इसके बाद प्रैक्टिस प्रॉब्लम्स और असेसमेंट जैसी सेवाओं के लिए 49 से 99 रुपये मासिक शुल्क लिया जाता है.
कंपनी का दावा है कि अब तक लगभग 6 लाख छात्र इससे जुड़ चुके हैं. इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर करोड़ों लर्निंग इंटरैक्शन दर्ज किए गए हैं. सक्रिय सत्रों में औसतन 30 से अधिक संदेशों का आदान प्रदान होता है.
SkillBytes के फाउंडर और CEO प्रेमप्रीत सिंह कहते हैं, “हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े रेवेन्यू के नहीं बल्कि उपयोग से जुड़े हैं. शिक्षा में सबसे कठिन काम किसी छात्र को पहली बार जोड़ना नहीं, बल्कि उसे रोज वापस लाना है. जब कोई छात्र लगातार बातचीत करता है, सवाल हल करता है और दोबारा लौटता है, तभी पता चलता है कि प्रोडक्ट वास्तव में उसकी जरूरत पूरी कर रहा है.”

SkillBytes की टीम
AI और एजुकेशन का बदलता दौर
हाल के वर्षों में एजुकेशन सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर काफी चर्चा हुई है. हालांकि प्रेमप्रीत सिंह मानते हैं कि AI की सबसे बड़ी भूमिका सिर्फ कंटेंट तैयार करने में नहीं है.
उनके अनुसार AI की असली ताकत शिक्षा को बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत और सुलभ बनाने में है. भारत जैसे देश में जहां करोड़ों छात्र हैं, वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बड़े स्तर तक पहुंचाने में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
प्रेमप्रीत सिंह कहते हैं, “अक्सर AI की चर्चा कंटेंट जनरेशन तक सीमित रह जाती है. लेकिन मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या AI लाखों छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण तैयारी पहुंचा सकता है. अगर हम यह समझ सकें कि छात्र कहां अटकते हैं, किस तरह सीखते हैं और किस चीज से उनकी रुचि बनी रहती है, तो सीखने का अनुभव कहीं अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है.”
उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में अच्छी शिक्षा किसी छात्र के भौगोलिक स्थान पर निर्भर नहीं रहेगी. टेक्नोलॉजी इस दूरी को कम कर सकती है.
भविष्य की योजनाएं
SkillBytes फिलहाल कक्षा 10 और 12 के छात्रों पर केंद्रित है. कंपनी अब JEE, NEET और UPSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी अपने मॉडल का विस्तार कर रही है. इसके अलावा SAT और IELTS जैसे अंतरराष्ट्रीय परीक्षा मॉड्यूल भी विकास के चरण में हैं.
कंपनी को Manipal Universal Technology Business Incubator (MUTBI) का सहयोग मिला है. शुरुआती दौर में इसी इनक्यूबेशन सपोर्ट ने प्रोडक्ट डेवलप करने और मॉडल को परखने में मदद की. कंपनी प्री-सीड फंडिंग जुटा चुकी है और अब सीड राउंड की तैयारी में है.
SkillBytes के फाउंडर और CEO प्रेमप्रीत सिंह कहते हैं, “मेरा लक्ष्य सिर्फ एक सफल शिक्षा कंपनी बनाना नहीं है. मैं चाहता हूं कि किसी छात्र का भविष्य उसके पिन कोड या परिवार की आर्थिक स्थिति से तय न हो. अगर मेहनत करने वाला हर छात्र समान गुणवत्ता की तैयारी हासिल कर सके तो देश की प्रतिभा का दायरा अपने आप बढ़ जाएगा. SkillBytes उसी दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है.”
भारत में डिजिटल एजुकेशन का अगला दौर केवल नए कंटेंट बनाने का नहीं, बल्कि सीखने के अनुभव को सरल और सहज बनाने का हो सकता है. SkillBytes इसी आइडिया पर काम कर रहा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़ा यह मॉडल आने वाले वर्षों में एजुकेशन सेक्टर में कितना बड़ा प्रभाव छोड़ पाता है.




