किसी कंपनी का सीईओ बनने से पहले खुद के सीईओ बनिए: Physics Wallah को-फाउंडर अलख पांडे

By Upasana
November 12, 2022, Updated on : Mon Nov 21 2022 05:39:38 GMT+0000
किसी कंपनी का सीईओ बनने से पहले खुद के सीईओ बनिए: Physics Wallah को-फाउंडर अलख पांडे
तीन दिवसीय इवेंट TechSparks 2022 के आखिरी दिन YourStory की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा के साथ बातचीत में Physics Wallah के को-फाउंडर अलख पांडे ने स्टार्टअप ऑन्त्रप्रेन्योर्स को सलाह देते हुए यह बात कही.
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एडटेक जगत की यूनिकॉर्न और प्रॉफिटेबल कंपनी फिजिक्स वाला (Physics Wallah) के को-फाउंडर अलख पांडे (Alakh Pandey) ने गुरुवार को कहा कि कंपनी का अगला टारगेट यूजी, पीजी कोर्सेज को स्टूडेंट्स के लिए किफायती बनाना है. हम एजुकेशन का डेमोक्रेटाइजेशन करना चाहते हैं. कोर्सेज को किफायती बनाने के बाद हमारा मकसद क्वॉलिटी को और ज्यादा बेहतर बनाने पर होगा.


YourStory के तीन दिवसीय फ्लैगशिप इवेंट TechSparks 2022 के आखिरी दिन कंपनी की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा के साथ बातचीत में अलख पांडे ने ये बातें कहीं.

YourStory के तीन दिवसीय फ्लैगशिप इवेंट TechSparks 2022 के आखिरी दिन कंपनी की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा के साथ बातचीत में अलख पांडे ने ये बातें कहीं.

उन्होंने आगे कहा कि इंडिया में स्टूडेंट्स की एक बहुत बड़ी आबादी है जो महंगे कोर्सेज नहीं खरीद सकते. इस वजह से उन्हें पढ़ाई से दूरी बनानी पड़ी.


हम Physics Wallah के जरिए एजुकेशन सेक्टर में इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं. कंपनी धीरे-धीरे अलग-अलग भाषाओं में स्टूडेंट्स को कोर्सेज उपलब्ध कराने पर भी काम शुरू करेगी.


बतौर ऑन्त्रप्रेन्योर आपको हमेशा जमीनी मुश्किलों को समझने की कोशिश करनी चाहिए. ये देखना पड़ता है कि आप इस स्टार्टअप के जरिए जो प्रॉब्लम सॉल्व करना चाह रहे हैं वह असल में सॉल्व हो भी रही है या नहीं. असल में आपके स्टार्टअप से किसी को फायदा मिल रहा है या नहीं.


क्या एडटेक अब सैचुरेशन लेवल पर पहुंच चुका है? क्या एडटेक का समय खत्म हो गया? इस सवाल पर अलख ने कहा कि एडटेक को ऑनलाइन के दायरे में बांधना गलत है. एडटेक का मतलब है एजुकेशन + टेक्नोलॉजी. एडटेक मतलब सिर्फ ऑनलाइन प्रजेंस होना नहीं है.


एडटेक का मतलब आसान शब्दों में कहें तो टेक्नोलॉजी को एजुकेशन के साथ जोड़ना है. चाहें वो ऑफलाइन हो या ऑनलाइन.आप जहां भी काम करें आपका मकसद पूरा होना चाहिए. बतौर स्टार्टअप फाउंडर आपका असल मकसद बच्चों को पढ़ाना है और वो पूरा होना चाहिए.


बिजनेस मॉडल पर बात करते हुए अलख ने कहा कि इंडिया में JEE, NEET के कोर्स डेढ़-दो लाख रुपये में मिलते थे, जिसे हमने 4000 की रेंज में उपलब्ध कराना शुरू किया. कई लोगों ने कहा कि ये हमारा कस्टमर एक्वायर करने का तरीका है.


लेकिन हमें शुरू हुए 2 साल हो चुके हैं. अगर Physics Wallah के सफर को देखेंगे तो हमने इन दो सालों में अपने स्टूडेंट्स के लिए और नई सर्विसेज जोड़ी हैं. इसमें कोई कटौती नहीं की है.


ये सवाल उठाए गए क्योंकि लोगों को लग रहा था कि इस कीमत के साथ हम मार्जिन नहीं बना पाएंगे. लेकिन कंपनी प्रॉफिटेबल है. दरअसल कस्टमर बेस ज्यादा होता है तो सस्ती कीमत के बाद भी आप आसानी से मार्जिन बना सकते हैं. 

ऑन्त्रप्रेन्योर्स को टिप्स

एक ऑन्त्रप्रेन्योरियल सफर पर आपको अनुशासित होना होगा, बिना उसके आपका सफर यकीनन मुश्किल होने वाला है. इसलिए किसी कंपनी का सीईओ बनने से पहले खुद के सीईओ बनिए. 


जब प्रोडक्ट बनाने की बात आती है तो आप यकीनन अकेले इस सफर पर चल सकते हैं मगर बिजनेस को अकेले आगे नहीं बढ़ा सकते. अलग-अलग लोगों से आपको अलग-अलग नजरिया मिलता है. खुद को फीडबैक सुनने के लिए फ्लेक्सिबल बनाना होगा. तभी आपके पास कुछ अलग और नया करने का विकल्प होगा.


इन सबके अलावा सबसे जरूरी बात - एक ऑन्त्रप्रेन्योर को हमेशा प्रोडक्ट पर ध्यान देना चाहिए. मार्केटिंग जरूरी है लेकिन प्रोडक्ट से बढ़कर नहीं. आप मार्केटिंग में कितना भी पैसा झोंक दें लेकिन प्रोडक्ट बढ़िया नहीं है, तो वो नहीं बिकेगा. इसलिए एक ऑन्त्रप्रेन्योर की प्राथमिकता हमेशा उसका प्रोडक्ट होना चाहिए.

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