5 साल में कई AI कंपनियां खत्म हो जाएंगी: TechSparks 2025 के मंच से Ronnie Screwvala की चेतावनी!
TechSparks 2025 में हुई बातचीत में अनुभवी उद्यमी रोनी स्क्रूवाला ने कई अहम मुद्दों पर बात की. उन्होंने कहा कि AI अभी अपनी शुरुआती प्रोडक्ट स्टेज में है. साथ ही, उन्होंने मितव्ययता, फाउंडर्स पर भरोसा, लचीलापन, स्पेसटेक में हो रहे बदलाव और अपनी सोच पर डटे रहने की अहमियत पर भी चर्चा की.
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) पर मचा शोर आने वाले समय में शांत पड़ सकता है. के को-फाउंडर और चेयरपर्सन रोनी स्क्रूवाला (Ronnie Screwvala) का मानना है कि आने वाले पांच साल में बहुत सी AI कंपनियां टिक नहीं पाएंगी.
YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा के साथ TechSparks 2025 के मंच पर हुई बातचीत के दौरान रोनी ने कहा, “AI अभी सिर्फ प्रोडक्ट स्टेज पर है. यह वह समय नहीं है जब सिर्फ पैसा जुटाने के लिए भागना चाहिए, क्योंकि प्रोडक्ट डेवलपमेंट में अभी बहुत काम बाकी है.”
उन्होंने कहा कि AI की असली चुनौती है — टिके रहना. उन्होंने आगे कहा, “अगर आप AI की पॉजिटिव दिशा में सही तरीके से काम कर रहे हैं, तो आपके लंबे समय तक टिकने की संभावना ज्यादा है. लेकिन आने वाले पांच साल में इस सेक्टर में बहुत सी कंपनियां खत्म हो जाएंगी,” .
रोनी ने यह भी कहा कि AI में सफलता चुपचाप इंजीनियरिंग टीमों और क्लासरूम्स में होती है, ना कि सिर्फ मार्केटिंग या फंडिंग से.
उन्होंने कहा, “यह ऐसा सेक्टर नहीं है जिसे जितना पैसा मिला उतना चाहिए था. अगर आप सिर्फ पैसा फेंकते हैं और मार्केटिंग करते हैं, तो आप नकारात्मक माहौल बना देते हैं.”
स्पेसटेक में निवेश और Lenskart की कहानी
रोनी ने अपनी निवेश सोच के बारे में बात करते हुए बताया कि वह दो स्पेसटेक (Spacetech) कंपनियों में निवेश कर चुके हैं.
उन्होंने कहा, “पहले अंतरिक्ष सिर्फ सरकार या ISRO के पास था. लेकिन अब 15,000 से 16,000 सैटेलाइट ऐसे हैं जो सरकारी नहीं हैं. हर सैटेलाइट की उम्र करीब 5 साल होती है. अब कंपनियां ऐसे सैटेलाइट्स को रिपेयर और रिफ्यूल करने पर काम कर रही हैं.”
उन्होंने बताया कि कई कंपनियां अब अंतरिक्ष में मलबे को साफ करने पर भी काम कर रही हैं ताकि जब कोई सैटेलाइट खत्म हो, तो वह बाकी 15,000 सैटेलाइट्स को नुकसान न पहुंचाए.
रोनी ने अपने पुराने निवेश Lenskart का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय उन्होंने कंपनी को अपनी एक्सेसरी लाइनें (Watchkart, Bagskart, Jewelskart) बंद करने की सलाह दी थी.
उन्होंने आगे कहा, “छह महीनों में उन्होंने ये तीनों प्रोडक्ट बंद कर दिए. अगर वे ऐसा नहीं करते, तो शायद Lenskart आज इतनी सफल नहीं होती.”
“मैं लोगों पर दांव लगाता हूं, सेक्टर पर नहीं”
रोनी ने कहा कि वे हमेशा व्यक्ति पर भरोसा करते हैं, न कि उद्योग पर.
उन्होंने कहा, “लोग अक्सर पूछते हैं कि आप किस सेक्टर में पैसा लगाना पसंद करते हैं. मेरा जवाब हमेशा यही होता है—अगर मेरे पास एक रुपया या एक करोड़ है, तो मैं खुद पर दांव लगाऊंगा. क्योंकि अगर आप खुद पर भरोसा नहीं करते, तो किसी कंपनी पर कैसे करेंगे?”
उन्होंने बताया कि Lenskart में उनका भरोसा पीयूष बंसल (Peyush Bansal) और उनकी टीम पर था.
असफलताओं से मिली सीख
रोनी ने कहा कि सफलता से ज़्यादा उन्होंने अपनी असफलताओं से सीखा है.
उन्होंने कहा, “मेरे करियर में आठ असफलताएं और दो बड़ी सफलताएं रही हैं. जब आप असफल होते हैं, तो वो बहुत तकलीफदेह होता है, लेकिन वही असफलता आगे की सफलता की नींव रखती है.”
उन्होंने समझाया, “अगर पांच असफलताएं और पांच सफलताएं होतीं, तो शायद वे सफलताएं इतनी बड़ी नहीं होतीं. मेरा फॉर्मूला है—अगर आठ बार हारो, तो दो बार में 20 गुना जीतना ज़रूरी है. तभी बैलेंस बनता है.”
“सादगी ही ताकत है”
रोनी ने कहा कि वे हमेशा मितव्ययता यानी सादगी को अपनाते हैं.
उन्होंने कहा, “हम जैसे-जैसे सफल होते हैं, हमारे अंदर अधिकार की भावना बढ़ जाती है और मितव्ययता खत्म हो जाती है. लेकिन जब तक आप मितव्ययी हैं, तब तक आप ईमानदार हैं.”
रोनी ने बताया कि वे अपनी टीम को ग्रामीण इलाकों के छात्रों से मिलवाते हैं, ताकि उन्हें समझ आए कि सीमित साधनों में भी सपने कितने बड़े हो सकते हैं.
उन्होंने कहा, “अगर वो बच्चे इतने कम संसाधनों में सपने देख सकते हैं, तो हम जो सबकुछ पाकर बैठे हैं, हमारा कोई बहाना नहीं बनता.”
रोनी ने कहा कि एक उद्यमी के लिए सबसे ज़रूरी है आत्मविश्वास.
उन्होंने कहा, “आपको आलोचना झेलनी ही होगी. अगर आप आलोचना से डर गए, तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे.”
उन्होंने बताया कि अगर उन्होंने लोगों की राय सुनकर अपने फैसले बदले होते, तो वे आज यहां नहीं होते.
रोनी ने कहा, “अगर आप खुद पर भरोसा रखते हैं और अपने रास्ते पर टिके रहते हैं, तो सफलता देर से ही सही, लेकिन मिलेगी ज़रूर.”

Edited by रविकांत पारीक




