भारत में बनने जा रहा है कमर्शियल एयरप्लेन, जानिए क्या बोले उड्डयन मंत्री नायडू
भारत अब अपना खुद का कमर्शियल एयरप्लेन बनाने की तैयारी में है. नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजारापु ने कहा कि बहुत जल्द भारतीय नागरिक ‘Made in India’ विमान में उड़ान भरेंगे. सरकार मिशन मैन्युफैक्चरिंग के तहत Airbus और Boeing जैसी कंपनियों को टक्कर देने की दिशा में काम कर रही है.
भारत अब सिर्फ विमान उड़ाने वाला नहीं, बल्कि विमान बनाने वाला देश बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजारापु (Rammohan Naidu Kinjarapu) ने कहा कि उनका सपना है कि जल्द ही भारत में बने पहले वाणिज्यिक विमान में भारतीय नागरिक उड़ान भरें.
नायडू ने यह बात YourStory और The Bharat Project की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा के साथ TechSparks 2025 के मंच पर हुई बातचीत के दौरान कही. उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि इस देश में कमर्शियल एयरप्लेन (वाणिज्यिक विमान) बने और हमारे लोग उसी विमान में उड़ें. बहुत जल्द हम यह करने जा रहे हैं.”
नायडू ने बताया कि अब एविएशन सेक्टर (विमानन क्षेत्र) का फोकस "मिशन मैन्युफैक्चरिंग" पर है. इसमें सिर्फ विमान बनाना ही नहीं बल्कि हर पुर्जा, हर तकनीक को भारत में तैयार करना शामिल है. उनका कहना है कि दूसरे देश अपने लिए विमान बना रहे हैं और भारत को ऑर्डर के लिए उनके इंतजार में रहना पड़ता है.
उन्होंने कहा, “हमारे पास प्रतिभा है, संसाधन हैं और क्षमता भी है. जरूरत सिर्फ इन सबको जोड़ने की है.”
नायडू ने बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे का उदाहरण देते हुए कहा कि ये शहर एयरोस्पेस और एविएशन इंडस्ट्री के बड़े केंद्र बन चुके हैं. इन जगहों पर एमएसएमई कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं.
उन्होंने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनियां एयरबस और बोइंग भारत से अब अरबों डॉलर के पुर्जे खरीद रही हैं. एयरबस भारत से करीब 1.4 बिलियन डॉलर, जबकि बोइंग 1 बिलियन डॉलर के पुर्जे खरीद रही है. यह बाजार आने वाले पांच वर्षों में 4 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है.
नायडू ने कहा, “एयरबस (Airbus) और बोइंग (Boeing) जैसी कंपनियां भारत की करीब 400 से 600 एमएसएमई कंपनियों के साथ काम कर रही हैं. वे भारतीय स्टार्टअप्स से भी जुड़ रही हैं. दुनिया को भरोसा है कि भारत अब ग्लोबल स्टैंडर्ड के प्रोडक्ट बना सकता है.”
उन्होंने कहा कि अब वक्त है कि भारतीय स्टार्टअप्स इस मौके को पहचानें और बड़े समाधान लेकर आएं.
उन्होंने आगे कहा, “स्टेज तैयार है. अब सपना देखो, बड़ा सोचो और उड़ान भरो.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारत में बोइंग या एयरबस जैसी कंपनी देखते हैं, तो नायडू ने कहा, “यह मेरे लिए एक व्यक्तिगत चुनौती है. मैं चाहता हूं कि यह सपना हकीकत बने.”
उन्होंने बताया कि भारत के पास पहले से तकनीकी क्षमता है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पहले से डॉर्नियर 228 विमान बना रहा है. चुनौती अब इंजीनियरिंग की नहीं, बल्कि पैमाने और अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) की है.
उन्होंने कहा, “हम एक विमान बना सकते हैं, लेकिन अब हमें 100 विमान बनाने की दिशा में बढ़ना होगा. इसके लिए निजी कंपनियों की भागीदारी और मजबूत बाजार की जरूरत है.”
नायडू ने कहा कि विमानन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का गुणक (मल्टीप्लायर) है. इस सेक्टर में जो भी निवेश होता है, उसका असर बाकी सभी उद्योगों पर पड़ता है.
उन्होंने कहा, “मैं 1.4 अरब अवसर देखता हूं. हर व्यक्ति कुछ नया बनाने, नवाचार करने और इस नेटवर्क से जुड़ने के लिए तैयार है.”
उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा करते हैं. नायडू ने बताया, “हैदराबाद एयरपोर्ट अकेले लगभग पांच लाख नौकरियां पैदा करता है.”
नायडू ने कहा कि विमानन उद्योग की जड़ में नवाचार (Innovation) है. बिना नवाचार के यह क्षेत्र आगे नहीं बढ़ सकता. उन्होंने कहा कि सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है और इसे डिज़ाइन स्तर पर ही जोड़ा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “यह उद्योग तकनीक पर आधारित है. हर दिन नए प्रयोग, परीक्षण और नई तकनीकें आ रही हैं. नवाचार ही इस क्षेत्र की ‘मां’ है.”
नायडू ने बताया कि सरकार ड्रोन निर्माण को लेकर भी बड़े कदम उठा रही है. सरकार PLI योजना और Drone Act लाने की दिशा में काम कर रही है.
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ड्रोन का हर पेंच और हर पुर्जा भारत में बने. यही हमारा अंतिम लक्ष्य है.” उन्होंने कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन के उपयोग को एक बड़ा बदलाव बताया.
नायडू ने स्वीकार किया कि सरकारी प्रक्रियाएं कई बार धीमी होती हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण से इन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकता है. उन्होंने DGCA की डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रणाली और ऑनलाइन ड्रोन अनुमति कार्यक्रम के उदाहरण दिए.
उन्होंने बताया कि कैसे सरकार छोटे लेकिन असरदार कदम उठा रही है, जैसे ‘उड़ान यात्री कैफे’, जो यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं.
नायडू ने कहा, “आज हवाई चप्पल वाला व्यक्ति भी हवाई जहाज में उड़ रहा है. यही असली परिवर्तन है.”

Edited by Ravi Pareek




