कर्नाटक बनेगा एशिया की AI राजधानी, कैसे? IT मंत्री प्रियांक खड़गे ने TechSparks 2025 में बताया
कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे का लक्ष्य है राज्य को एशिया की ‘डीप टेक कैपिटल’ बनाना. 1,600 करोड़ रुपये के फंड, नई AI नीतियों और क्षेत्रीय इनोवेशन हब्स के ज़रिए कर्नाटक तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप टेक की अगली राजधानी बन रहा है.
जब कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात करते हैं, तो उनके शब्दों में आत्मविश्वास झलकता है—और यह आत्मविश्वास कमाया हुआ लगता है, बनाया हुआ नहीं.
आंकड़े भी उनकी बात को साबित करते हैं. बेंगलुरु आज दुनिया के टॉप 5 AI शहरों में शामिल है और स्किल पेनिट्रेशन (कौशल पहुंच) के मामले में तीसरे स्थान पर है. लेकिन खड़गे की असली ताकत उनकी आने वाले वक्त की सोच में झलकती है.
एशिया की ‘डीप टेक कैपिटल’ बनने की तैयारी
TechSparks 2025 के मंच पर YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा के साथ हुई बातचीत में खड़गे ने बताया कि कर्नाटक अब “एशिया की डीप टेक कैपिटल” बनने की दिशा में काम कर रहा है.
यह सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस नीति और पूंजी दोनों हैं.
खड़गे के लिए AI सिर्फ एक फैशन या बिजनेस टूल नहीं है. उनके अनुसार, “हम AI का इस्तेमाल गवर्नेंस को बेहतर करने के लिए कर रहे हैं.”
राज्य सरकार ने ई-गवर्नेंस में एक नया केंद्र शुरू किया है, जहां यह देखा जा रहा है कि AI नागरिक सेवाओं को तेज़ और प्रभावी कैसे बना सकती है.
कर्नाटक ने इस दिशा में एक एमर्जिंग टेक्नोलॉजी एडवाइजरी कमिटी भी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता खुद खड़गे कर रहे हैं. यह कमिटी AI, मशीन लर्निंग (ML), साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फॉरेंसिक्स पर काम करेगी, ताकि राज्य के युवाओं को भविष्य की नौकरियों और टेक्नोलॉजी के लिए तैयार किया जा सके.
राज्य ने हाल ही में अपनी ‘रेस्पॉन्सिबल AI पॉलिसी’ भी जारी की है. इसका मकसद है—इनोवेशन को बढ़ावा देना, लेकिन सीमाओं में रखना.
खड़गे ने कहा, “यूरोप बहुत सख्त नियम बना रहा है, अमेरिका में टेक कंपनियां बहुत ताकतवर हैं. हम दोनों से सीख रहे हैं. हमारा लक्ष्य है कि इनोवेशन पर रोक न लगे, लेकिन माहौल सुरक्षित और संतुलित हो.”

प्रियांक खड़गे — IT, बायोटेक और ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग मंत्री, कर्नाटक सरकार
डीप टेक डिकेड: कैपिटल और इन्फ्रास्ट्रक्चर
कर्नाटक की नजर सिर्फ AI पर नहीं है. सरकार ने 600 करोड़ रुपये का डीप टेक (DeepTech) फंड बनाया है, जो एडवांस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में निवेश करेगा.
इसके साथ ही 1,000 करोड़ रुपये का LEAP (Local Economic Acceleration Program) शुरू किया गया है, ताकि इनोवेशन सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे राज्य में फैले.
खड़गे ने कहा, “हम इसे डीप टेक डिकेड (DeepTech Decade) कह रहे हैं. हमारा मकसद है कि डीप टेक, AI और नई तकनीकों को पूंजी, मेंटरशिप और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मिले.”
LEAP प्रोग्राम के तहत, सरकार मैसूरु, मंगलुरु, हुबली-धारवाड़ और मणिपाल जैसे शहरों को इनोवेशन हब के रूप में विकसित कर रही है. हर शहर में कॉमन लैब्स, छोटे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (nano GCCs) और इनक्यूबेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं.
खड़गे ने मुस्कराते हुए कहा, “ये क्लस्टर अब नतीजे दे रहे हैं. सिर्फ मैसूरु से ही 6,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के IT एक्सपोर्ट्स हो चुके हैं. मंगलुरु अब GCC हब बन रहा है — वहां के लोग सुबह 7 बजे सर्फिंग करते हैं और 9 बजे ऑफिस में पहुंच जाते हैं!”
सरकार जो सुनती है
खड़गे की सोच का एक अहम पहलू है—पॉलिसी संवाद से बनती है, आदेश से नहीं.
उन्होंने कहा, “हमारी हर नीति बातचीत और लोगों की राय से बनती है. यह सहयोगात्मक प्रक्रिया है.”
2017 में शुरू हुए Elevate प्रोग्राम के तहत, कर्नाटक सरकार शुरुआती स्टार्टअप्स को 50 लाख रुपये तक की फंडिंग देती है.
खड़गे ने बताया, “अब तक हमने 1,087 स्टार्टअप्स को फंडिंग दी है. और सिर्फ ग्रांट नहीं दे रहे, सरकार खुद इन स्टार्टअप्स की पहली ग्राहक भी बन रही है.”
महिला उद्यमियों के लिए भी राज्य ने कई कदम उठाए हैं. कर्नाटक में पंजीकृत कुल स्टार्टअप्स में से 32% महिलाएं चला रही हैं. इन्हें विशेष फंड और मेंटरशिप सपोर्ट दिया जा रहा है.
हकीकत में बसा आशावाद
जब उनसे पूछा गया कि भारत के भविष्य के बारे में उन्हें क्या उम्मीद देता है, तो खड़गे ने मुस्कराते हुए कहा, “मैं यथार्थवादी हूं. सरकार में रहते हुए मुझे अगले दस साल में नतीजे देने हैं, 2047 तक इंतज़ार नहीं कर सकता.”
उनकी उम्मीदें कर्नाटक के युवाओं से जुड़ी हैं.
उन्होंने कहा, “हमारे पास टैलेंट है, ज्ञान है, स्किल है, और सबसे ज़रूरी है – महत्वाकांक्षा. हमें बस सही नीति और माहौल बनाना है ताकि यह टैलेंट खिल सके.”
खड़गे ने अंत में कहा, “मैंने कर्नाटक जैसी फुर्तीली डेमोग्राफी कहीं नहीं देखी. यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है, यही मुझे उम्मीद देती है.”

Edited by रविकांत पारीक




