TechSparks 2025: IT मंत्री प्रियांक खड़गे बोले — “स्टार्टअप्स के बिना सरकार अधूरी है”
कर्नाटक सरकार अब स्टार्टअप्स की पहली ग्राहक बन गई है. IT मंत्री प्रियांक खड़गे ने TechSparks 2025 में बताया कि सरकार स्टार्टअप्स से प्रोडक्ट खरीद रही है और 600 करोड़ रुपये का DeepTech फंड बनाकर बेंगलुरु के अलावा राज्य के अन्य शहरों में भी इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है.
कर्नाटक सरकार अब स्टार्टअप्स की पहली ग्राहक बन गई है. यह बात राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और बायोटेक्नोलॉजी मंत्री प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने कही. वे बेंगलुरु में आयोजित हो रहे TechSparks 2025 समिट में YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा के साथ बातचीत कर रहे थे.
मंत्री ने कहा, “हम स्टार्टअप्स से प्रस्ताव मंगवा रहे हैं और उनके प्रोडक्ट्स भी खरीद रहे हैं.” उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लगातार नई नीतियों के ज़रिए स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूत बना रही है.
प्रियांक खड़गे ने कहा, “हमारी सरकार की सबसे अच्छी बात यह है कि हम सुनते हैं, समझते हैं और फिर समाधान ढूंढते हैं. हमारी नीतियां ‘सहभागिता’ पर आधारित हैं, इसलिए हम एक समृद्ध राज्य बन पाए हैं.”
1,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स को मिला समर्थन
मंत्री ने बताया कि सरकार के Elevate प्रोग्राम के तहत अब तक 1,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स को इक्विटी-फ्री ग्रांट दी गई है. इनमें से 28% स्टार्टअप्स की फाउंडर महिलाएं हैं और 32% टियर-II शहरों से आते हैं.
सरकार अब स्टार्टअप्स की पहुंच बेंगलुरु से आगे बढ़ाकर राज्य के अन्य हिस्सों तक ले जाना चाहती है. इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये का लोकल इकोनॉमिक एक्सेलरेशन प्रोग्राम शुरू किया गया है. इस योजना के तहत राज्यभर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, लैब्स, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और नैनो GCC (Global Capability Centres) स्थापित किए जा रहे हैं.
मंत्री ने बताया कि एक डेनिश कंपनी मंगलुरु में GCC सेंटर खोल रही है. इसका मकसद है—कर्नाटक के टियर-II शहरों में स्टार्टअप क्लस्टर बनाना और नवाचार (इनोवेशन) को विकेन्द्रित (डिसेंट्रलाइज) करना.

प्रियांक खड़गे — IT, बायोटेक और ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग मंत्री, कर्नाटक सरकार — TechSparks 2025 के मंच पर YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा के साथ बातचीत के दौरान
डीपटेक के लिए अलग इकोसिस्टम
सरकार अब डीपटेक (DeepTech) स्टार्टअप्स के लिए अलग इकोसिस्टम बना रही है. इसके लिए 600 करोड़ रुपये का फंड घोषित किया गया है. लक्ष्य है कि कर्नाटक डीपटेक का केंद्र बने—सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में.
प्रियांक खड़गे ने कहा, “हम बेंगलुरु के ट्रैफिक और भीड़ को कम करना चाहते हैं. इन नीतियों से न केवल शहर को राहत मिलेगी बल्कि नवाचार भी पूरे राज्य में फैलेगा.”
बेंगलुरु भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का दिल है — प्रियांक खड़गे
आईटी मंत्री ने कहा, “दुनिया में कोई भी सरकार शहरीकरण और तकनीकी बदलाव की इस गति के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. लेकिन हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि बेंगलुरु को डी-कंजेस्ट करें और इनोवेशन को डी-सेंट्रलाइज़ करें.”
बेंगलुरु भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का दिल है, जहां इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर हमेशा एक-दूसरे से दौड़ लगाते रहते हैं. शहर अपनी उद्यमी ऊर्जा और वैश्विक महत्वाकांक्षा के लिए जाना जाता है, लेकिन ट्रैफिक और भीड़भाड़ के लिए भी उतना ही बदनाम है.
खड़गे ने कहा, “हम बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं. इसलिए सरकार अब बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है—95 किलोमीटर नई मेट्रो लाइन, 160 किलोमीटर सब-अर्बन रेल, 4,500 इलेक्ट्रिक बसें और 42 किलोमीटर की टनल रोड्स बनाई जा रही हैं. सरकार हमेशा विकास के पीछे दौड़ती है, लेकिन हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं.”
रचनात्मक राजनेता
राजनीति में आने से पहले प्रियांक खड़गे का बैकग्राउंड ग्राफिक डिजाइन और एनीमेशन का रहा है. वे कुछ समय यूरोपीय कंपनियों के साथ भी काम कर चुके हैं.
उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “मैं खुद एनिमेटर हूं, इसलिए अगर आपको मेरे विभाग के विज्ञापन अच्छे लगते हैं, तो अब समझिए क्यों.”
उन्होंने कहा कि रचनात्मकता और तकनीकी समझ ने उनकी शासन शैली को गहराई से प्रभावित किया है.
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई मुझे कुछ नया सिखाता है, तो मैं वापस जाकर उसे समझता हूं, फिर दोबारा सीखता हूं. हमेशा अपने से समझदार लोगों के बीच रहना अच्छा होता है.”
मैं 2047 नहीं, अगले 10 साल में नतीजे चाहता हूं — प्रियांक खड़गे
जब उनसे भारत के भविष्य को लेकर उम्मीदों के बारे में पूछा गया तो खड़गे बोले, “मैं यथार्थवादी हूं. सरकार के रूप में मेरा काम अगले दस सालों में डिलीवर करना है, 2047 तक का इंतज़ार नहीं.”
लेकिन उनका भरोसा लोगों पर है — खासकर कर्नाटक के युवाओं की प्रतिभा, फुर्ती और महत्वाकांक्षा पर. उन्होंने कहा, “हमारे पास सब कुछ है — लोग, ज्ञान, कौशल और सपने. अब हमें बस ऐसी नीतियां और माहौल बनाना है, जो उन्हें आगे बढ़ने और सफल होने में मदद करें.”
खड़गे के मुताबिक, बेंगलुरु की कहानी मेहनत, हलचल और लगातार नए रूप में ढलने की है — और यही भारत की भी कहानी है.
उनका मानना है कि चुनौती रफ्तार कम करने की नहीं, बल्कि यह देखने की है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासन और अवसर लोगों की गति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें.

Edited by रविकांत पारीक





