The Sweet Change को Rebalance की अगुवाई में मिली 1.7 करोड़ रु की प्री-सीड फंडिंग
कंपनी इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने, नए प्रोडक्ट लॉन्च करने और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने के लिए करेगी. इससे पहले, The Sweet Change ने 70 लाख रुपये की शुरुआती फंडिंग जुटाई थी. The Sweet Change की शुरुआत साल 2024 में मानवी अग्निहोत्री और शीन हितैषी ने मिलकर की थी.
हेल्दी स्वीटनर ब्रांड The Sweet Change ने ₹1.7 करोड़ की प्री-सीड फंडिंग हासिल की है. इस फंडिंग राउंड की अगुवाई Rebalance ने की. कंपनी इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने, नए प्रोडक्ट लॉन्च करने और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए करेगी.
इससे पहले, बीते महीने कंपनी ने ₹70 लाख की शुरुआती फंडिंग जुटाई थी. इस फंडिंग राउंड की अगुवाई IAN Angel Fund ने की और इसमें Udaan Angel Partners ने भी हिस्सा लिया था.
The Sweet Change की शुरुआत साल 2024 में मानवी अग्निहोत्री (को-फाउंडर और CEO) और शीन हितैषी (को-फाउंडर और CBO) ने की थी. कंपनी का दावा है कि उसने भारत का पहला Gut Friendly Monk Fruit Sweetener विकसित किया है. यह प्रोडक्ट मोंक फ्रूट, एलुलोज और प्रीबायोटिक ग्वार फाइबर से तैयार किया गया है.
इस स्टार्टअप के पीछे एक मजबूत व्यक्तिगत अनुभव भी जुड़ा हुआ है. मानवी अग्निहोत्री पिछले एक दशक से क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट के रूप में काम कर रही थीं. इस दौरान उन्होंने 12,000 से अधिक ऐसे मरीजों की मदद की जो डायबिटीज, Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome - PMOS (पहले Polycystic Ovary Syndrome - PCOS), मोटापे और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे.
मरीजों के साथ काम करते हुए उन्होंने एक बात बार बार महसूस की. लोग चीनी कम करना चाहते थे, लेकिन बाजार में उपलब्ध विकल्प स्वाद, भरोसे और गुणवत्ता के मामले में उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते थे. इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए The Sweet Change की नींव रखी गई.

कंपनी का कहना है कि बाजार में मौजूद अधिकांश Monk Fruit Sweeteners में एरिथ्रिटॉल और अन्य फिलर्स का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं The Sweet Change ने अपने प्रोडक्ट को बिना एरिथ्रिटॉल, बिना आर्टिफिशियल सामग्री और बिना कड़वे आफ्टर टेस्ट के तैयार किया है. कंपनी का दावा है कि उसके प्रोडक्ट में भारत के सबसे अधिक सांद्रता वाले Monk Fruit Formulations में से एक का उपयोग किया गया है.
नई दिल्ली स्थित कंपनी अब नेचुरल स्वीटनर्स की पूरी रेंज विकसित कर रही है ताकि लोग आसानी से चीनी का बेहतर विकल्प अपना सकें.
The Sweet Change की को-फाउंडर और CEO मानवी अग्निहोत्री के अनुसार कंपनी का उद्देश्य केवल एक प्रोडक्ट बेचना नहीं है, बल्कि चीनी की खपत कम करने को लोगों की सामान्य जीवनशैली का हिस्सा बनाना है.
उन्होंने बताया कि कंपनी ने केवल एक वर्ष में ₹1.69 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल किया है और 15,000 से ज्यादा ऑर्डर पूरे किए हैं. पिछले तीन महीनों में कंपनी ने 84 प्रतिशत की मासिक कंपाउंड ग्रोथ दर्ज की है. मार्च 2026 में Sweetener Drops लॉन्च करने के बाद कंपनी का मासिक रेवेन्यू ₹8 लाख से बढ़कर ₹50 लाख तक पहुंच गया. कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 75 प्रतिशत है और वह वर्तमान में Amazon India पर टॉप स्वीटनर ब्रांड्स में शामिल है.
मानवी का कहना है कि उनका दीर्घकालिक लक्ष्य भारतीय घरों, कैफे, फूड सर्विस और पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में चीनी के सबसे भरोसेमंद विकल्प के रूप में पहचान बनाना है.
Rebalance की को-फाउंडर ऐश्वर्या मल्ही और विकास कुमार का मानना है कि आने वाले वर्षों में सबसे सफल कंज्यूमर ब्रांड्स वे होंगे जो स्वास्थ्य और रोजमर्रा की आदतों के बीच संतुलन बना सकें.
उनके अनुसार The Sweet Change केवल एक स्वीटनर ब्रांड नहीं है. यह लोगों को बिना स्वाद से समझौता किए एक बेहतर जीवनशैली अपनाने में मदद कर रहा है. कंपनी के संस्थापकों की गहरी समझ, प्रोडक्ट की गुणवत्ता और ग्राहकों के बीच तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता ने उन्हें निवेश के लिए आकर्षित किया.
भारत में शुगर सब्स्टीट्यूट बाजार का आकार पहले ही 650 मिलियन डॉलर से अधिक आंका जा चुका है और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ यह तेजी से विस्तार कर रहा है. ऐसे समय में The Sweet Change जैसे स्टार्टअप इस सेक्टर में नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं.
कंपनी का मानना है कि भविष्य उन्हीं ब्रांड्स का होगा जो स्वस्थ विकल्पों को लोगों के लिए आसान और स्वाभाविक बना सकें. The Sweet Change इसी दिशा में अपनी मजबूत पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है.



