किसानों की लागत घटाने के लिए इस यूनिवर्सिटी ने बना दिया देश का पहला ई-ट्रैक्टर, डीजल ट्रैक्टर के मुक़ाबले होगी इतनी बचत

By शोभित शील
November 03, 2021, Updated on : Mon Nov 08 2021 06:20:17 GMT+0000
किसानों की लागत घटाने के लिए इस यूनिवर्सिटी ने बना दिया देश का पहला ई-ट्रैक्टर, डीजल ट्रैक्टर के मुक़ाबले होगी इतनी बचत
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भारत के कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी आज देश के किसानों की आमदनी तमाम पश्चिमी देशों के किसानों की तुलना में काफी कम है हालांकि अब देश के तमाम संस्थान किसानों की आय को लगातार बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं और ऐसा ही एक सराहनीय काम हरियाणा स्थित एक विश्वविद्यालय ने किया है।


चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU) के कृषि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कॉलेज (COAE & T) ने एक खास इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर विकसित करने में कामयाबी हासिल की है और इसी के साथ यह इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों पर शोध करने वाला भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय बन गया है।


16.2 किलोवाट बैटरी द्वारा संचालित होने वाले इस ट्रैक्टर को चलाने की लागत डीजल की तुलना में बहुत बहुत कम है और वायु प्रदूषण को कम के लिहाज से भी यह सर्वोत्तम उपाय है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी आर कंबोज ने बताया है कि यह ई-ट्रैक्टर 1.5 टन वजन वाले ट्रेलर को साथ लेकर 80 किमी तक की यात्रा कर सकता है और इस दौरान इसकी अधिकतम रफ्तार 23.17 किमी प्रति घंटे पाई गई है।

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इस ट्रैक्टर को बनाने का काम एमटेक के छात्र वेंकटेश शिंदे ने वैज्ञानिक और उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान के निदेशक मुकेश जैन की देखरेख में पूरा किया है। कुलपति प्रोफेसर बी आर कंबोज के अनुसार इस ई-ट्रैक्टर के इस्तेमाल से किसानों को अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एमटेक के छात्र का कमाल

इस ट्रैक्टर को बनाने का काम एमटेक के छात्र वेंकटेश शिंदे ने वैज्ञानिक और उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान के निदेशक मुकेश जैन की देखरेख में पूरा किया है। कुलपति प्रोफेसर बी आर कंबोज के अनुसार इस ई-ट्रैक्टर के इस्तेमाल से किसानों को अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।


मीडिया से बात करते हुए प्रोफेसर बीआर काम्बोज ने बताया है कि भारत में लगभग 80 लाख ट्रैक्टर हैं और इनमें से लगभग 4 लाख ट्रैक्टर हरियाणा राज्य में हैं। 30 हॉर्स पावर से नीचे के ट्रैक्टरों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादन के कारण भारत में वार्षिक प्रदूषण 46 लाख टन और हरियाणा में 2.3 लाख टन होता है। ऐसे में यदि डीजल ट्रैक्टरों को बैटरी से चलने वाले ट्रैक्टरों से बदल दिया जाता है तो प्रदूषण की इस मात्रा को बड़े स्तर पर कम किया जा सकता है।

किसानों को होगी बचत

हल और रोटावेटर के साथ बैटरी से चलने वाले ट्रैक्टर को संचालित करने की लागत क्रमशः 301 रुपये और 332 रुपये है, जबकि डीजल पर चलने वाले ट्रैक्टर के साथ यह लागत 353 रुपये और 447 रुपये है। ऐसे में एक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को संचालित करने की लागत डीजल वाले की तुलना में लगभग 15 से 25 प्रतिशत कम है। हालांकि ट्रैक्टर कब तक आम किसानों के लिए उपलब्ध हो जाएगा इसे लेकर किसी भी समय सीमा पर बात नहीं की गई है।


इस खास ट्रैक्टर की कीमत पर बात करते हुए कुलपति ने बताया है कि भले ही अभी यह एक प्रोटोटाइप मॉडल हो लेकिन बैटरी से चलने वाले ट्रैक्टर की कीमत लगभग 6.5 लाख रुपये है जबकि उसी हॉर्सपावर वाले डीजल ट्रैक्टर की कीमत 4.50 लाख रुपये है। हालांकि इसी के साथ उन्होने यह सुझाव भी दिया है कि अगर बैटरी से चलने वाले ट्रैक्टर का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जाता है तो इसकी कीमत आसानी से डीजल ट्रैक्टर के बराबर आ सकती है।


Edited by Ranjana Tripathi

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