बॉट्स के लिए Twitter जिम्मेदार, क्या Koo नहीं लेगी वैरिफिकेशन फीस?

By रविकांत पारीक
November 11, 2022, Updated on : Fri Nov 11 2022 09:10:10 GMT+0000
बॉट्स के लिए Twitter जिम्मेदार, क्या Koo नहीं लेगी वैरिफिकेशन फीस?
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

देश का अपना स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘कू’ (Koo) वैरिफिकेशन बैज के लिए कोई फीस नहीं लेगा. कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ अप्रमेय राधाकृष्ण ने खुद यह बात कही है.


उन्होंने साथ ही ट्विटर (Twitter) को पहले बॉट्स बनाने और अब सत्यापन के लिए यूजर्स से शुल्क लेने पर आड़े हाथों लिया. गौरतलब है कि कू भारत में ट्विटर की प्रमुख प्रतिस्पर्धी है. कू उपयोगकर्ताओं को भारतीय भाषाओं में अपने विचार लिखने का विकल्प देता है और उसके पांच करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं.


दुनिया के सबसे अमीर शख्स और Tesla के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने ट्विटर का अधिग्रहण करने के बाद ब्लू टिक के लिए आठ अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने की बात की है. दूसरी ओर कू प्रतिष्ठित व्यक्तियों को आधार आधारित स्व-सत्यापन का विकल्प देती है और बिना कोई शुल्क लिए पीला वैरिफिकेशन टैग देती है.


राधाकृष्ण ने कहा कि ट्विटर बॉट, जिन्हें जॉम्बी भी कहा जाता है, बॉट सॉफ्टवेयर द्वारा नियंत्रित अकाउंट हैं. इन अकाउंट का संचालन इंसान की जगह मशीन द्वारा किया जाता है. इनका मकसद बड़े पैमाने पर किसी खास सामग्री को ट्वीट और री-ट्वीट करना है.


उन्होंने कहा, "ट्विटर पर बॉट्स को फर्जी समाचार फैलाने, स्पैमिंग और दूसरों की गोपनीयता का उल्लंघन करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है."


उन्होंने कहा कि ट्विटर ने एक समय बॉट्स को बढ़ावा दिया और अब उन्हें काबू में करने के लिए संघर्ष कर रहा है. राधाकृष्ण ने कहा कि आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका यह है कि जो खाते खुद को मनुष्य के रूप में सत्यापित नहीं करते हैं, उन्हें मंच से बाहर कर दिया जाए.


उन्होंने कहा, "ऑफलाइन दुनिया की तरह, हर इंसान ऑनलाइन दुनिया में भी एक इंसान के रूप में पहचाने जाने का हकदार है."


उन्होंने कहा, "कू लोगों के बीच भरोसेमंद और स्वस्थ बातचीत को सक्षम बनाने में यकीन रखती है. इस साल हमने स्वैच्छिक स्व-सत्यापन की पेशकश मुफ्त में की और 1.25 लाख से अधिक भारतीयों ने इस अधिकार का लाभ उठाया है."


गौरतलब हो कि भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बाद मोदी सरकार ने कुछ चीनी ऐप बैन किए थे और कई चीनी ऐप्स को बैन करने पर विचार हो रहा था. इसी बीच पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया था, जिसके बाद बैन हुए चीनी ऐप्स के भारतीय वर्जन ऐप लॉन्च होने लगे थे. तभी ट्विटर का भारतीय वर्जन कू ऐप भी लॉन्च हुआ था, जिसे मोदी सरकार समेत जनता की तरफ से भारी समर्थन मिला था.

Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close