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वोडाफोन आइडिया के इक्विटी कन्वर्जन में देरी पर कंपनी ने UK में भारतीय राजदूत को लिखा खत

लेटर में यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल ने कहा है कि कन्वर्जन के लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन (DoT) को वित्त मंत्रालय और पीएमओ दोनों से लिखित क्लीयरेंस मिल चुकी है. उसके बाद भी कन्वर्जन में देरी हो रही है, जिससे नगदी में फंसी वोडाफोन आइडिया को फंड जुटाने और ऑपरेशन जारी रखने में दिक्कत हो रही है.

वोडाफोन आइडिया के इक्विटी कन्वर्जन में देरी पर कंपनी ने UK में भारतीय राजदूत को लिखा खत

Thursday January 05, 2023 , 3 min Read

यूके-इंडिया ट्रेड बॉडी चाहती है कि वोडाफोन आइडिया के स्थगित एजीआर पर जमा ब्याज की रकम को इक्विटी में बदलने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए. इस बारे में ट्रेड बॉडी ने यूके में इंडियन हाई कमिश्नर की मदद मांगी है.

हाई कमिश्नर विकरम के डोराएस्वामी ने इस मामले में आगे की प्रक्रिया कैसे बढ़ा जा सकता है इस बाबत वित्त मंत्रालय को लेटर लिखा है. उन्होंने कहा है कि इस मसला आने वाले महीनों में और जोर पकड़ सकता है.

लेटर में यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल ने कहा है कि इस कन्वर्जन के लिए भारतीय डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन (DoT) को वित्त मंत्रालय और पीएमओ दोनों से लिखित में क्लीयरेंस मिल चुकी है.

उसके बाद भी कन्वर्जन में देरी हो रही है, जिससे नगदी में फंसी वोडाफोन आइडिया को फंड जुटाने और ऑपरेशन जारी रखने में दिक्कत आ रही है.

लेटर में ये चेतावनी भी दी गई कि अगर इस मसले पर कैबिनेट के फैसले के हिसाब से जल्द आगे नहीं बढ़ा गया तो इसका कंपनी और भारत में इनवेस्टमेंट क्लाइमेट दोनों पर निगेटिव असर पड़ेगा.

लेटर में आगे कहा गया है, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन में बैठे लोग जो फैसले लेते हैं वो कंपनी और इसके प्रमोटर्स के सामने इक्विटी कन्वर्जन से पहले एडिशनल इक्विटी कमिटमेंट जैसी कुछ शर्तें रख रहे हैं. जबकि कैबिनेट के फैसले में ऐसी किसी शर्त का जिक्र नहीं था.

हालांकि एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया कि वोडाफोन आइडिया के प्रमोटर्स- वोडाफोन पीएलसी और आदित्य बिड़ला ग्रुप टेलीकॉम कंपनी में पर्याप्त पूंजी डालने को तैयार ही नहीं हैं. इसीलिए सरकार के लिए एजीआर पर बने ब्याज को इक्विटी में बदलने में मुश्किल आ रही है.

इस रुख ने इक्विटी फंडिंग जुटाने के कंपनी की कोशिशों को बाधित कर दिया है क्योंकि बाहरी निवेशक चाहते हैं कि पहले सरकार हिस्सेदारी ले. बैंक भी टेलीकॉम प्रमोटर्स पर दबाव बना रहे हैं कि पहले वो कंपनी में और फंड डालें तभी कंपनी के लिए और कर्ज मिलेगा.

हाई कमिश्नर ने सभी पहलुओं को जिक्र करते हुए वित्त मंत्रालय से मार्गदर्शन मांगा है. लेटर डीओटी और मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स को भी भेजा गया है.

यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों में डिएजिओ, एचएसबीसी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, वोडाफोन ग्रुप, बार्कलेज, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन, PwC, रोल्स-रॉयस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे नाम शामिल हैं.

सितंबर 2021 में सरकार टेलीकॉम रिफॉर्म पैकेज की घोषणा की थी जिसे लागू करने में वोडाफोन को दिक्कत आ रही थी. इसी संबंध में कुछ समय पहले दोनों पक्षों के बीच एक मीटिंग हुई थी. इसी मीटिंग का फॉलो अप लेने के लिए कंपनी ने हाई कमिश्नर को लेटर लिखा है.


Edited by Upasana