AWS-Google को टक्कर देने निकला देसी AI क्लाउड प्लेटफॉर्म Utho Cloud
भारत में क्लाउड इंडस्ट्री में विदेशी निर्भरता के बीच Utho Cloud एक किफायती और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है. जानिए कैसे मनोज धांडा ने सीमित संसाधनों से शुरुआत कर 3,500+ क्लाइंट्स के साथ मजबूत भारतीय क्लाउड इकोसिस्टम खड़ा किया.
भारत में डिजिटल क्रांति अपने चरम पर है. हर बिजनेस ऑनलाइन हो रहा है. लेकिन एक सवाल लंबे समय से बना रहा. क्या भारत का अपना मजबूत क्लाउड सिस्टम है. या हम अब भी विदेशी कंपनियों पर निर्भर हैं. इसी सवाल ने एक ऑन्त्रप्रेन्योर को सोचने पर मजबूर किया. और यहीं से शुरू हुई Utho Cloud की कहानी.
हाल ही में YourStory ने Utho Cloud के फाउंडर और CEO मनोज धांडा (Manoj Dhanda) से बात की. इस बातचीत में उन्होंने अपने शुरुआती सफर के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच यह स्टार्टअप कैसे खड़ा हुआ. उन्होंने भारतीय क्लाउड इकोसिस्टम की जरूरत पर भी बात की. साथ ही समझाया कि Utho Cloud कैसे विदेशी हाइपरस्केलर्स के मुकाबले सस्ता, पारदर्शी और भरोसेमंद विकल्प बन रहा है.
मनोज धांडा मिडिल क्लास परिवार से आते हैं. उनके पास संसाधनों की कमी थी, लेकिन सोच बड़ी थी. बचपन में चीजों को खोलकर समझना उनकी आदत थी. वही जिज्ञासा आगे चलकर टेक्नोलॉजी के प्रति जुनून बन गई.
मनोज बताते हैं कि उनका असली सीखना किताबों से कम और कंप्यूटर स्क्रीन से ज्यादा हुआ. उन्होंने खुद से सीखा. गलतियां कीं. रातों को सर्वर ठीक किए. और धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी की गहराई समझी.
मनोज कहते हैं, “मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से आता हूं जहां सपने बड़े थे लेकिन साधन कम थे. बचपन से मुझे चीजों को खोलकर समझने की आदत थी. जब इंटरनेट से जुड़ा तो समझ आया कि टेक्नोलॉजी बराबरी का मौका देती है. अगर आपके पास स्किल है तो आप कुछ भी बना सकते हैं. यही सोच मुझे हमेशा कुछ नया बनाने के लिए आगे बढ़ाती रही.”
उनकी पढ़ाई ने उन्हें बेसिक समझ दी. लेकिन असली सीख काम करते हुए मिली. Linux, virtualization और networking जैसे जटिल विषय उन्होंने खुद सीख लिए. यही अनुभव आगे चलकर उनके काम आया.

Utho Cloud के फाउंडर और CEO मनोज धांडा
Microhost से मिली असली सीख
साल 2010 में उन्होंने Microhost शुरू किया. यह एक छोटा सा होस्टिंग बिजनेस था. शुरुआत में काम सरल था. वेबसाइट बनाना और उन्हें होस्ट करना. लेकिन धीरे धीरे बाजार बदलने लगा.
बिजनेस को सिर्फ वेबसाइट नहीं, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए था. स्केलेबिलिटी और भरोसेमंद सिस्टम की जरूरत बढ़ी. Microhost उनके लिए एक ट्रेनिंग ग्राउंड बन गया. यहीं उन्होंने ग्राहकों की असली परेशानियां समझीं.
मनोज बताते हैं, “Microhost हमारे लिए एक सीखने का प्लेटफॉर्म था. हम रियल वर्कलोड संभाल रहे थे. डाउनटाइम से जूझ रहे थे. और ग्राहकों की जरूरत समझ रहे थे. वहीं से हमें समझ आया कि इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ सर्विस नहीं बल्कि बिजनेस की रीढ़ है. Utho में जो कुछ बना रहे हैं उसकी नींव वहीं रखी गई थी.”
यही अनुभव आगे चलकर एक बड़े विचार में बदला.
Utho Cloud की शुरुआत
जब भारत में क्लाउड का इस्तेमाल बढ़ा तो ज्यादातर कंपनियां विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भर थीं. इससे कई समस्याएं सामने आईं. लागत ज्यादा थी. डेटा कंट्रोल कम था. और नियमों को लेकर चिंता बनी रहती थी.
मनोज ने इसी गैप को पहचाना. और साल 2018 में Utho Cloud शुरू किया. एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो भारत के लिए बना हो. भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर. मनोज की पत्नी कुसुम धांडा बतौर को-फाउंडर इस स्टार्टअप से जुड़ी.
मनोज बताते हैं, “हमने देखा कि ज्यादातर कंपनियां विदेशी क्लाउड पर निर्भर हैं. लेकिन उनकी जरूरतें अलग हैं. उन्हें लागत में पारदर्शिता चाहिए. डेटा पर नियंत्रण चाहिए. और स्थानीय सपोर्ट चाहिए. Utho इसी सोच से बना. हम फीचर की दौड़ में नहीं पड़े. हमने असली समस्याओं को हल करने पर ध्यान दिया.”
Utho का मतलब है उठना. आगे बढ़ना. यही इसकी सोच भी है.
अलग सोच, अलग मॉडल
Utho ने शुरुआत से ही अलग रास्ता चुना. जहां बड़ी कंपनियां सैकड़ों सेवाएं देती हैं, वहीं Utho ने सिर्फ जरूरी सेवाओं पर ध्यान दिया. कंप्यूट, स्टोरेज और नेटवर्किंग. यानी वही 20 प्रतिशत सेवाएं जो 80 प्रतिशत जरूरतें पूरी करती हैं.
इससे सिस्टम सरल बना. लागत कम रही. और ग्राहक को समझने में आसानी हुई.
मनोज धांडा बताते हैं, “हमने यह देखा कि ज्यादातर ग्राहक कुछ ही सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए हमने वही चीजें बेहतर बनाने पर ध्यान दिया. जब आप सब कुछ करने की कोशिश करते हैं तो गुणवत्ता गिरती है. हमने तय किया कि हम कम करेंगे लेकिन अच्छा करेंगे. यही हमारी ताकत बनी.”
Utho का बिजनेस मॉडल भी अलग है. यह B2B2C मॉडल पर काम करता है. कंपनी सीधे ग्राहकों के साथ-साथ पार्टनर्स के जरिए काम करती है. इससे छोटे शहरों तक पहुंच आसान होती है. आज इसके पास 3,500 से अधिक B2B क्लाइंट हैं.
चुनौतियां और संघर्ष
लेकिन यह सफर आसान नहीं था. सबसे बड़ी चुनौती थी लोगों की सोच बदलना. कई कंपनियां मानती थीं कि विदेशी क्लाउड ही बेहतर है. उन्हें मनाना मुश्किल था.
दूसरी चुनौती तकनीकी थी. पूरी टेक्नोलॉजी खुद बनाना आसान नहीं था. इसमें समय लगा. मेहनत लगी. लेकिन इससे उन्हें पूरा कंट्रोल मिला.
मनोज बताते हैं, “सबसे बड़ी चुनौती लोगों का भरोसा जीतना था. कई लोग सोचते थे कि भारतीय क्लाउड उतना मजबूत नहीं होगा. लेकिन जब उन्होंने इस्तेमाल किया तो फर्क समझ आया. हमने पूरा सिस्टम खुद बनाया. इसमें समय लगा लेकिन इससे हमें हर चीज पर कंट्रोल मिला और हम बेहतर तरीके से ऑप्टिमाइज कर पाए.”

Utho Cloud की टीम
कम लागत, बेहतर समाधान
Utho का दावा है कि वह क्लाउड लागत को 60 से 70 प्रतिशत तक कम कर सकता है. इसका कारण है किफायती कीमत और बेहतर संसाधन प्रबंधन.
कंपनी AI-समर्थित सिस्टम का इस्तेमाल करती है ताकि समस्या आने से पहले ही उसे पहचान लिया जाए. इससे डाउनटाइम कम होता है और परफॉर्मेंस बेहतर रहती है.
आज कंपनी के पास हजारों ग्राहक हैं. देश के अलग-अलग शहरों में डेटा सेंटर हैं. और टीम लगातार बढ़ रही है.
भविष्य की योजनाएं
अब Utho Cloud भारत के अलावा दूसरे देशों के बाजारों में भी एंट्री करने की तैयारी में है. अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट में डेटा सेंटर लगाने की योजना है. लेकिन फाउंडर का फोकस सिर्फ विस्तार नहीं है. वे एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं जिस पर बिजनेस भरोसा कर सके.
Utho Cloud के फाउंडर और CEO मनोज धांडा कहते हैं, “हमारा लक्ष्य सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर देना नहीं है. हम एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं जिस पर बिजनेस पूरी तरह निर्भर हो सके. भारत में हम मजबूत इकोसिस्टम बना रहे हैं. और वैश्विक स्तर पर वहां जा रहे हैं जहां इसी तरह की जरूरत है. हमारा सपना है कि भारतीय इंजीनियरिंग दुनिया भर में पहचानी जाए.”
भारत में टेक्नोलॉजी का भविष्य तेजी से बदल रहा है. ऐसे में Utho Cloud जैसे प्लेटफॉर्म यह भरोसा देते हैं कि टेक सेक्टर में देश अपने दम पर भी खड़ा हो सकता है. और शायद यही असली आत्मनिर्भरता है.




