CA की नौकरी छोड़ बनाने लगे स्विमिंग पूल, कमाई 4 करोड़!
कोयंबटूर के विकाश कुमार एम ने CA की नौकरी छोड़कर Biosphere Nature Pools शुरू की. अपने फार्महाउस के प्राकृतिक तालाब से मिले अनुभव के बाद उन्होंने इसे बिजनेस बनाया. कंपनी पौधों और प्राकृतिक जैविक सिस्टम की मदद से स्विमिंग पूल और अन्य वाटर प्रोजेक्ट्स तैयार करती है.
स्विमिंग पूल का नाम सुनते ही अक्सर नीली टाइल्स, क्लोरीन की गंध और पानी साफ रखने वाली मशीनें याद आती हैं. लेकिन कोयंबटूर के विकाश कुमार एम ने स्विमिंग पूल को अलग नजरिए से देखा. उनका मानना है कि पौधों, पानी के बहाव और प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं की मदद से भी पानी को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है.
दिलचस्प बात यह है कि विकाश ने इस काम की शुरुआत किसी बड़े बिजनेस प्लान के साथ नहीं की थी. पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रहे विकाश ने पोल्लाची में अपने प्राइवेट फार्महाउस पर एक प्राकृतिक तालाब बनाया था. यही तालाब धीरे धीरे उनके लिए एक नए सफर की शुरुआत बन गया.
इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने 2021 में Biosphere Nature Pools की शुरुआत की.
CA की नौकरी छोड़ी
विकाश कुमार ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई की और अपने करियर की शुरुआत इसी सेक्टर से की. शुरुआती दिनों में उनका काम अकाउंट्स, ऑडिट और फाइनेंस से जुड़ा था. लेकिन ऑफिस के बाहर उनकी दुनिया अलग थी. उन्हें प्रकृति और रोमांच पसंद था. पैराग्लाइडिंग, बाइकिंग, हाइकिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे शौक उन्हें हमेशा खुले वातावरण और प्रकृति के करीब रखते थे.
यही लगाव आगे चलकर उनके करियर का नया रास्ता बना. पोल्लाची स्थित अपने फार्महाउस में उन्होंने एक प्राकृतिक स्विमिंग पॉन्ड बनाने का फैसला किया. शुरुआत में यह कोई बिजनेस आइडिया नहीं था. यह उनका प्राइवेट प्रोजेक्ट था. लेकिन जब उन्होंने देखा कि तालाब की प्राकृतिक जैविक व्यवस्था मौसम बदलने के बावजूद पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर रही है, तो उनकी सोच बदलने लगी.
YourStory से बात करते हुए विकाश बताते हैं, “मेरा करियर इस दिशा में आने की कोई पहले से बनाई हुई योजना नहीं थी. मैं चार्टर्ड अकाउंटेंट था और शुरुआती सालों में नंबरों, ऑडिट और व्यवस्थित कॉर्पोरेट काम के बीच रहा. लेकिन काम के बाहर मैं हमेशा प्रकृति के करीब रहना चाहता था.”
विकाश कहते हैं, “मैं नहीं चाहता था कि मेरा बेटा क्लोरीन वाले पानी में तैरना सीखे. हर बार तैरने के बाद उसकी आंखें लाल हों. उसके शरीर से क्लोरीन की गंध आए. मैं चाहता था कि वह एक बेहतर और प्राकृतिक माहौल में तैरना सीखे.”
वह आगे कहते हैं, “पोल्लाची में अपने फार्महाउस पर प्राकृतिक स्विमिंग पॉन्ड बनाना एक निजी प्रयोग था. वहीं मैंने पहली बार देखा कि प्रकृति की अपनी व्यवस्था पानी के साथ कितने प्रभावी तरीके से काम कर सकती है.”
दोस्तों से मिला आइडिया
पोल्लाची में बना विकाश का प्राकृतिक तालाब जल्द ही दोस्तों और परिवार के लोगों का ध्यान खींचने लगा. लोग पूछने लगे कि क्या उनके फार्महाउस या वीकेंड होम में भी ऐसा बनाया जा सकता है.
2021 में विकाश ने ऐसे प्रोजेक्ट्स को वीकेंड के काम के रूप में लेना शुरू किया. यहीं से Biosphere Pools की शुरुआत हुई.
उस समय भारत में ऐसे लोगों के लिए सीमित विकल्प थे, जो क्लोरीन वाले स्विमिंग पूल से अलग कोई विकल्प तलाश रहे थे. विदेशी मॉडल और डिजाइन जरूर मौजूद थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसे सिस्टम डिजाइन और तैयार करने वाले विशेषज्ञ कम थे.
विकाश ने इसी जगह में काम करने की कोशिश की.
शुरुआत में यह एक छोटा काम था, लेकिन धीरे-धीरे प्रोजेक्ट्स बढ़ते गए. 2024 तक यह उनका फुल टाइम बिजनेस बन गया. आज कंपनी कोयंबटूर से काम करते हुए तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा में प्रोजेक्ट्स कर रही है.
विकाश कहते हैं, “शुरुआत में मैं इसे सिर्फ वीकेंड में करता था. जब दोस्तों और परिवार के लोगों ने अपने फार्महाउस के लिए ऐसे ही पॉन्ड और पानी के फीचर बनाने को कहा, तब मुझे लगा कि यहां एक वास्तविक जरूरत मौजूद है.”

Biosphere Pools द्वारा बनाए गए कुछ स्विमिंग पूल
कैसे काम करता है Biosphere Pools
Biosphere Pools पारंपरिक स्विमिंग पूल से अलग तरीके से काम करता है. कंपनी Bio Swimming Pools, Bio Swim Ponds, Swimming Lagoons, Pondless Cascades, Streams, Decorative Ponds और बड़े Ornamental Lakes जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम करती है.
इन सिस्टम्स में पौधों, पानी के प्रवाह और जैविक फिल्ट्रेशन की भूमिका अहम होती है. कंपनी के अनुसार, कुछ सिस्टम्स में जर्मन इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसका उद्देश्य पानी को लगातार सर्कुलेट करने और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए उसका संतुलन बनाए रखने में मदद करना है.
कंपनी का मकसद सिर्फ एक सुंदर पूल बनाना नहीं है. कोशिश यह होती है कि पानी का फीचर आसपास के लैंडस्केप का हिस्सा लगे. यही वजह है कि फार्महाउस, विला और बड़े घरों के साथ-साथ रियल एस्टेट डेवलपर्स भी ऐसे प्रोजेक्ट्स में रुचि दिखा रहे हैं.
विकाश कहते हैं, “पारंपरिक पूल और जैविक फिल्ट्रेशन वाला पूल मूल रूप से अलग सोच पर काम करते हैं. पारंपरिक पूल में पानी को कीटाणुरहित और निष्क्रिय रखने की कोशिश होती है.”
वह कहते हैं, “हमारे सिस्टम में पानी के साथ एक जीवित प्राकृतिक व्यवस्था काम करती है. पौधे, फिल्ट्रेशन और लगातार सर्कुलेशन मिलकर पानी को संतुलित रखने में मदद करते हैं. हमारे लिए सबसे बड़ा फर्क यही है कि हम पानी को सिर्फ एक टैंक की तरह नहीं देखते.”
नहीं जुटाई फंडिंग
Biosphere Pools पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड कंपनी है. विकाश के अनुसार, कंपनी ने अब तक किसी भी बाहरी निवेशक से फंडिंग नहीं जुटाई है. बिजनेस की शुरुआत से लेकर अब तक ग्रोथ के लिए मुख्य रूप से कंपनी की अपनी कमाई का इस्तेमाल किया गया है.
कंपनी हर ग्राहक की जरूरत के हिसाब से अलग प्रोजेक्ट पर काम करती है. पहले जगह और जरूरत को समझा जाता है, जिसके लिए एक पेड असेसमेंट किया जाता है. इसके बाद डिजाइन तैयार कर प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू किया जाता है.
विकाश का कहना है कि कंपनी के कई नए प्रोजेक्ट्स रेफरल के जरिए आते हैं. यानी लोग किसी मौजूदा प्रोजेक्ट को देखने के बाद कंपनी से संपर्क करते हैं.
कंपनी इस वित्त वर्ष के अंत तक करीब ₹4 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने की उम्मीद कर रही है.
विकाश कहते हैं, “हमने अब तक किसी बाहरी निवेशक से फंडिंग नहीं ली है. हमने बहुत तेजी से बिजनेस बढ़ाने की कोशिश भी नहीं की. क्योंकि इस काम में रिसर्च और सही इंजीनियरिंग बहुत जरूरी है.”
वह कहते हैं कि भारत के अलग-अलग इलाकों में मौसम और परिस्थितियां बदल जाती हैं. तटीय इलाकों की नमी, दक्षिण भारत की गर्मी और पहाड़ी क्षेत्रों की ठंड के लिए एक जैसी व्यवस्था हमेशा काम नहीं कर सकती.
वह आगे कहते हैं, “इसलिए पहले सिस्टम को मजबूत बनाना हमारे लिए ज्यादा जरूरी रहा.”

विकाश कुमार एम — Biosphere Nature Pools के फाउंडर और क्रिएटिव हेड
क्या है चुनौतियां
विकाश के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को अपने काम के बारे में समझाना रही है. भारत में ज्यादातर लोग स्विमिंग पूल को टाइल्स, क्लोरीन और फिल्ट्रेशन मशीनों से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में लोगों को यह समझाना आसान नहीं है कि प्रकृति और जैविक सिस्टम की मदद से भी पानी को संभाला जा सकता है.
दूसरी बड़ी चुनौती सही और कुशल टीम तैयार करना है. विकाश कहते हैं कि यह काम सामान्य स्विमिंग पूल बनाने जैसा नहीं है. इसमें निर्माण कार्य के साथ पानी और जैविक सिस्टम की अच्छी समझ भी जरूरी है. अलग अलग राज्यों में काम करते हुए हर जगह अच्छी गुणवत्ता बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है.
फिर भी उन्हें भारत में इस तरह के प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ती दिख रही है. खासकर पोल्लाची, कुर्ग, अलीबाग और गोवा जैसे इलाकों में, जहां फार्महाउस और वीकेंड होम की संख्या बढ़ रही है.
लोग चाहते हैं कि उनका आउटडोर स्पेस पूरी तरह आर्टिफिशियल न लगे, बल्कि आसपास की प्रकृति से जुड़ा हुआ महसूस हो.
विकाश कहते हैं, “सबसे बड़ी चुनौती लोगों को समझाना है. एक ब्रोशर दिखाकर यह बात पूरी तरह नहीं समझाई जा सकती. लोगों को देखना और अनुभव करना पड़ता है कि प्रकृति आधारित सिस्टम वास्तव में कैसे काम करता है.”
वह आगे कहते हैं, “दूसरी चुनौती सही टीम बनाना है. मांग बढ़ाना शायद आसान हो, लेकिन अलग-अलग जगहों पर वही समझ और गुणवत्ता पहुंचाना ज्यादा मुश्किल है. इसलिए हम विस्तार से पहले टीम और ज्ञान को मजबूत करना चाहते हैं.”
भविष्य की योजनाएं
Biosphere Pools इस समय एक बड़े जैविक फिल्ट्रेशन वाले लेक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी White Sand Lagoon Pools को भी एक अलग प्रोडक्ट लाइन के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है.
अगले तीन से पांच वर्षों में विकाश का फोकस सिर्फ ज्यादा प्रोजेक्ट लेने पर नहीं है. वह एक मजबूत इन-हाउस टीम तैयार करना चाहते हैं, ताकि गुणवत्ता बनाए रखते हुए काम का विस्तार किया जा सके. साथ ही Pondless Cascades और Streams जैसे प्रोडक्ट्स को ज्यादा मानकीकृत रूप में बिल्डर्स और लैंडस्केप कॉन्ट्रैक्टर्स तक पहुंचाने की योजना है.
विकाश कहते हैं, “मेरा बड़ा सपना यह है कि जैविक फिल्ट्रेशन को लोग किसी वैकल्पिक या अजीब विचार की तरह न देखें. एक दिन यह सामान्य सवाल बन जाए कि पूल बनाते समय क्लोरीन आधारित सिस्टम ही क्यों चुना जाए.”
उनके मुताबिक, भारत में इस तरह के सिस्टम के लिए मौसम और जगह दोनों मौजूद हैं. चुनौती सही तकनीकी ज्ञान विकसित करने और लोगों का भरोसा बनाने की है.
बदलती लग्जरी
भारत में लग्जरी और वेलनेस की परिभाषा भी धीरे-धीरे बदल रही है. आज लोग सिर्फ महंगी चीजें नहीं चाहते. वे ऐसी जगह चाहते हैं, जहां वे समय बिताना चाहें और प्रकृति के करीब महसूस करें.
विकाश कुमार एम की कहानी भी इसी बदलाव से जुड़ी है. एक CA, जिसने अपने प्राइवेट फार्महाउस में बने एक तालाब से प्रयोग शुरू किया और धीरे-धीरे उसी अनुभव से बिजनेस खड़ा कर दिया.
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि भविष्य के घरों में स्विमिंग पूल कैसा दिखेगा. सवाल यह भी है कि वह आसपास की प्रकृति के साथ कितना जुड़ा होगा.




