भारत में बनने वाले पहले बैलिस्टिक मिसाइल Prithvi की क्या है खासियत?

Prithvi को बनाने की शुरुआत 1983 में हुई थी और इसकी सबसे पहली टेस्टिंग 25 फरवरी,1988 को हुई थी. तब से लेकर अब तक इसके तीन वर्जन निकाले जा चुके हैं. पृथ्वी मिसाल के दो वर्जन इस समय सेवा में हैं, जबकि पृथ्वी-I को रिटायर किया जा चुका है.

भारत में बनने वाले पहले बैलिस्टिक मिसाइल Prithvi की क्या है खासियत?

Friday January 27, 2023,

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पृथ्वी भारत में बनने वाली पहली बैलिस्टिक मिसाइल थी जिसे इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डिवेलटमेंट प्रोग्राम (IGMDP) ने बनाया था. पृथ्वी एक रोड-मोबाइल, शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल(SRBM) है जो सिंगल स्टेज, दो इंजन और लिक्विड फ्यूल से चलती है.

Prithvi को बनाने की शुरुआत 1983 में हुई थी और इसकी सबसे पहली टेस्टिंग 25 फरवरी,1988 को हुई थी. तब से लेकर अब तक इसके तीन वर्जन निकाले जा चुके हैं. पृथ्वी मिसाल के तीनों वर्जन इस समय सेवा में हैं.

Prithvi-I(SS-150) 1,000 किलो वजह उठाकर 150 किमी रेंज तक हमला कर सकता है. यह 1994 से आर्मी में अपनी सेवा दे रहा है. यह एक साथ कई शहरों को तबाह कर सकता है. हालांकि पृथ्वी-I को अब सेवा से हटाया जा चुका है और इसकी जगह सरकार ने प्रहार मिसाइल को को सेना में शामिल किया है.

Prithvi-II(SS-250) में वजन उठाने की क्षमता 500-750 किमी है और यह 350 किमी रेंज तक हमला कर सकता है. फिलहाल यह वायु सेना को अपनी सेवाल दे रहा है. यह मिसाइल भी किसी भी देश के कई शहरों को एक साथ उड़ा सकता है. इसकी टेस्टिंग 27 जनवरी, 1996 को हुई थी. इसके डिवेलपमेंट स्टेज 2004 में पूरे हुए थे.

इसे लॉन्च हुए 27 साल हो गए हैं. इनर्शियल नैविगेशन सिस्टम की वजह से इसके नैविगेशन भी शानदार हैं. इस मिसाइल के अंदर एंटी बैलिस्टिक मिसाइल को खत्म करने वाले भी फीचर दिए गए हैं.

अभी हाल ही में बीते 20 जनवरी 2023 को रक्षा मंत्रालय ने उड़ीसा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से पृथ्वी-II न्यूक्लियर-कैपेबल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल यूजर ट्रेनिंग लॉन्च किया.

मिसाइल ने सफलतापूर्वक अपने टारगेट को पूरी सटीकता के साथ ध्वस्त कर दिया. यूजर ट्रेनिंग लॉन्च में मिसाइल सभी ऑपरेशन और टेक्निकल पैरामीटर्स पर खरा उतरा.

Prithvi-III(SS-350)- पृथ्वी I और II की लॉन्चिंग के बाद 2001 में पृथ्वी-III की लॉन्चिंग हुई. इसकी मारक क्षमता 350 किमी की है और यह 1000 किलो का वजन उठा सकता है.

यह जल सेना को अपनी सेवा देता है और इसकी रेंज भी अधिक है. सबसे पहले सितंबर 21, 2001 को इसकी सफल टेस्टिंग हुई थी. इसे धनुष नाम से भी जाना जाता है.

क्या रहा है इतिहास

भारत ने 1997 में पृथ्वी-1 मिसाइल का उत्पादन बंद कर दिया. सितंबर 2021 तक भारतीय सेना ने कथित तौर पर 75 पृथ्वी-1 के ऑर्डर दिए थे, जिसमें से 60 ही डिलीवर हो सके. भारत ने कथित तौर पर पृथ्वी मिसाइल से इक्विप्ड कई रेजिमेंट्स तैयार किए. हर रेजिमेंट में 16 मिसाइल और 4 TEL रखे गए. इन रेजिडेंट्स में 222nd, 333th, 444th और 555th मिसाइल ग्रुप शामिल हैं.

जून 1997, में इंडियन आर्मी ने 333th मिसाइल ग्रुप को पाकिस्तान के पास पंजाब इलाके में तैनात किया था. हालांकि इसकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा तो मिसाइल ग्रुप को वापस ले हटा लिया गया था.


Edited by Upasana

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