संस्करणों
दिलचस्प

पाकिस्तानी अखबारों पर लगी 200% ड्यूटी, मुंबई के दुकानदार को मिला दो लाख का बिल

yourstory हिन्दी
15th Apr 2019
Add to
Shares
45
Comments
Share This
Add to
Shares
45
Comments
Share

अपनी दुकान में बैठे आसिफ (तस्वीर साभार- इंडियन एक्सप्रेस)

इस साल फरवरी के पहले पाकिस्तानी अखबार या मैग्जीन पर भारत में कोई इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगती थी, इसलिए ये अखबार कम पैसों में भी भारत में उपलब्ध हो जाते थे। लेकिन इस साल फरवरी में पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी सामानों पर 200 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगा दी है। मुंबई में कॉपी किताबों की दुकान चलाने वाले मोहम्मद आसिफ उस वक्त हैरान रह गए जब एयरपोर्ट पर उन्हें पाकिस्तान से मंगाए गए अखबार पर 2 लाख रुपये का टैक्स मांगा गया।


मजबूरी में आसिफ को सामान छोड़ना पड़ा। दक्षिणी मुंबई के मोहम्मद अली रोड पर स्थित नाज बुक डिपो नाम से यह दुकान बीते 70 सालों से चल रही है। आसिफ बताते हैं कि उनके दिवंगत पिता अब्दुल्ला हाजी अली ने इसे खोला था। इसकी खास बात ये है कि यहां पाकिस्तान के अंग्रेजी और उर्दू अखबार आसानी से मिल जाते थे। आसिफ बताते हैं कि पाकिस्तानी अखबारों को वे लोग खरीदते थे जिनके रिश्तेदार पाकिस्तान में रहते हैं या फिर पाकिस्तान पर शोध करने वाले छात्र और विशेषज्ञ।


इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबित आसिफ बताते हैं, 'पाकिस्तान से भेजे गए माल के बंडल में कुछ पैकेट थे। जिसमें से हर बंडल का वजन 5 किलो था। पहले इतने सामान के लिए मुझे 5,000 रुपये देना पड़ता था। लेकिन अभी हाल ही में अखबारों और पत्रिकाओं पर इंपोर्ट ड्यूटी लग जाने की वजह से मुझे 2 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया। इतनी बड़ी रकम मैं दे पाने में सक्षम नहीं हूं। क्योंकि कोई भी ग्राहक 450 रुपये में अखबार नहीं खरीदेगा।'


आसिफ एयरपोर्ट से खाली हाथ ही लौट आए, लेकिन उन्होंने बाद में कस्टम ऑफिस के कई चक्कर लगाए और अधिकारियों से पैकेट छोड़ने की गुजारिश की। कस्टम अधिकारियों ने उन्हें बताया कि चुनाव की वजह से इंपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव संभव नहीं है। चुनाव खत्म होने के बाद हो सकता है कि अखबार और पत्रिकाओं पर रियायत दे दी जाए, लेकिन इसकी भी गुंजाइश कम है। 


आसिफ पाकिस्तान में कराची स्थित अपने एजेंट के माध्यम से ये अखबार और पत्रिकाएं मंगवाते थे। इनमें दैनिक और साप्ताहिक दोनों तरह की पत्र-पत्रिकाएं शामिल होती थीं। जिसमें द डेली जंग, नया वक्त, डॉन और जसारत जैसे अखबार थे जिनकी कीमत 30 से 50 रुपये थी। इसे आसिफ 10 रुपये ज्यादा कीमत पर बेचते थे। वहीं पाकीजा, खवातीन और शुआ जैसी पत्रिकाओं की कीमत 100 पाकिस्तानी रुपये होती है जिसे भारत में 200 रुपये में वे बेचते थे।


यह भी पढ़ें: MBBS की पढ़ाई के बाद UPSC: 82वीं रैंक लाकर बन गईं आईएएस

Add to
Shares
45
Comments
Share This
Add to
Shares
45
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags