2023 में पासपोर्ट इंडेक्स पॉइंट्स में फिसला भारत, अब 144वें स्थान पर

यह गिरावट मोबिलिटी में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद आती है क्योंकि दुनिया और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएं महामारी के बाद फिर से खुल गईं. भारत की रैंकिंग में इस साल अब तक छह पायदान की गिरावट आई है, अब यह 2022 में 138 के मुकाबले 2023 में 144 वें स्थान पर है.

2023 में पासपोर्ट इंडेक्स पॉइंट्स में फिसला भारत, अब 144वें स्थान पर

Thursday March 30, 2023,

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बुधवार को प्रकाशित पासपोर्ट इंडेक्स की ताजा अपडेट से पता चलता है कि भारत का मोबिलिटी स्कोर गिर गया है. भारत ने इस वर्ष इंडेक्स में सबसे बड़ी वैश्विक गिरावट देखी है. यह 2019 में महामारी से पहले 71 के मोबिलिटी स्कोर से काफी नीचे गिर गया है. जबकि 2022 में दो पॉइंट्स बढ़कर 73 हो गया, क्योंकि महामारी के बाद मोबिलिटी बढ़ी. लेकिन मार्च 2023 तक, इसका मोबिलिटी स्कोर 70 पॉइंट है. (passport index ranking india)

यह गिरावट मोबिलिटी में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद आती है क्योंकि दुनिया और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाएं महामारी के बाद फिर से खुल गईं. भारत की रैंकिंग में इस साल अब तक छह पायदान की गिरावट आई है, अब यह 2022 में 138 के मुकाबले 2023 में 144 वें स्थान पर है.

ये निष्कर्ष पासपोर्ट इंडेक्स के नए 'टाइमशिफ्ट' फीचर द्वारा जारी किए गए थे. इस पीचर को हाल ही में एक लोकप्रिय अनुरोध द्वारा जोड़ा गया था ताकि लगातार वर्षों में एकाधिक पासपोर्टों के इंस्टेंट, पुल स्पेक्ट्रम व्यू को सक्षम किया जा सके. नतीजतन, भारत की महामारी से पहले की ऊंचाई से गिरावट ध्यान देने योग्य रही है.

इंडेक्स ने वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन और थाईलैंड सहित अन्य बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के स्कोर में भी गिरावट दिखाई. यह गिरावट इस बात का संकेत है कि इन देशों ने पिछले साल दर्ज की गई मोबिलिटी में वैश्विक वृद्धि का किस हद तक लाभ नहीं उठाया है.

भारत की सबसे तेज गिरावट को यूरोपीय संघ की नीति से जोड़ा गया है. इसने 2023 में सर्बिया जैसे देशों पर रखे गए भारतीय नागरिकों के लिए वीजा आवश्यकताओं को शुरू करने का दबाव देखा है.

यूरोपीय संघ जैसे ब्लॉक या भारत और जापान जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के साथ वीज़ा-मुक्त समझौतों की कमी के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी जैसे अन्य देशों की तुलना में चीन का प्रदर्शन जारी है. यह वर्तमान में पासपोर्ट इंडेक्स व्यक्तिगत रैंकिंग में 118वें स्थान पर है.

वहीं, मोबिलिटी ट्रेंड्स में दक्षिण कोरिया और जापान काफी नीचे थे, दोनों ने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी. दक्षिण कोरिया, जो 174 के मोबिलिटी स्कोर के साथ व्यक्तिगत रैंकिंग में 12वें स्थान पर है, का एशिया में सर्वोच्च स्कोर है. 172 के मोबिलिटी स्कोर के साथ जापान 26वें स्थान पर इसका निकटतम एशियाई प्रतियोगी है.

इस वर्ष केवल 10 देशों ने अपने मोबिलिटी स्कोर में वृद्धि देखी है. स्वीडन ने जर्मनी को पीछे छोड़ दिया, और दूसरे स्थान पर पहुंच गया. केन्या ने इस साल सबसे बड़ी बढ़त दर्ज करने के लिए व्यक्तिगत रैंकिंग में चार स्थानों की छलांग लगाई. मोबिलिटी वृद्धि दिखाने वाले दस देशों में से 40% अफ्रीकी देश थे.

पासपोर्ट इंडेक्स के को-फाउंडर, हंट बोगोसियन ने कहा, “पिछले दो वर्षों में ग्लोबल मोबिलिटी में ऐतिहासिक लाभ के बाद, क्योंकि कई देश महामारी से संबंधित वीजा नियंत्रण से उभरे हैं, इस वर्ष अब तक विकास में मंदी रही है. चीन और भारत दोनों ने अपनी पासपोर्ट मोबिलिटी में कमी देखी है, हालांकि हम मानते हैं कि चीन के फिर से खुलने के प्रभावों को अभी तक पूरी तरह से महसूस नहीं किया गया है."

"अफ्रीकी मोबिलिटी में उछाल एक प्रवृत्ति है जिसका हम बारीकी से अनुसरण कर रहे हैं: अफ्रीका में कई राष्ट्र कल की महाशक्तियाँ होंगे, और यह पासपोर्ट गतिविधि में वृद्धि में परिलक्षित हो रहा है क्योंकि अन्य राज्य प्रमुख खिलाड़ियों के साथ अपने संबंधों को गहरा करने के लिए देख रहे हैं," उन्होंने कहा.

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