भारत के प्रज्ञाननंद ने रचा इतिहास, बने दूसरे सबसे युवा शतरंज ग्रैंडमास्टर

भारत के प्रज्ञाननंद ने रचा इतिहास, बने दूसरे सबसे युवा शतरंज ग्रैंडमास्टर

Tuesday June 26, 2018,

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चेन्नई के आर प्रज्ञाननंद ने सिर्फ 12 साल दस महीने और 14 दिन की उम्र में चेस ग्रैंडमास्टर का खिताब अपने नाम करते हुए दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए। इससे पहले 1990 में यूकक्रेन के ग्रैंडमास्टर सर्गेई करजाकिन ने यह खिताब 12 साल और 7 महीने की उम्र में हासिल किया था।

अपनी मां के साथ प्रज्ञाननंद

अपनी मां के साथ प्रज्ञाननंद


दिलचस्प बात ये है कि करजाकिन और प्रज्ञाननंद के अलावा, शतरंज के इतिहास में किसी ने भी 13 साल की उम्र से पहले प्रतिष्ठित ग्रैंडमास्टर खिताब हासिल नहीं किया है।

बीते हफ्ते शनिवार को चेन्नई के आर प्रज्ञाननंद ने सिर्फ 12 साल दस महीने और 14 दिन की उम्र में चेस ग्रैंडमास्टर का खिताब अपने नाम करते हुए दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए। इससे पहले 1990 में यूकक्रेन के ग्रैंडमास्टर सर्गेई करजाकिन ने यह खिताब 12 साल और 7 महीने की उम्र में हासिल किया था। प्रज्ञाननंद ने ओर्टिसी में ग्रेडिन ओपन प्रतियोगिता में इटली के ग्रैंडमास्टर लुका मोरोनी जूनियर को 8वें राउंड में हराया। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रज्ञाननंद ने काफी अटैकिंग अंदाज में यह गेम खेला और शुरू बनी हुई बढ़त को पीछे नहीं जाने दिया।

प्रज्ञाननंद से हार मानते हुए मोरोनी ने मैच बीच में ही सौंप दिया। इस टूर्नामेंट में प्रज्ञाननंद ने कई महत्वपूर्ण और बड़े मैच जीते। उन्होंने ईरानी खिलाड़ी आर्यन गोलामी और इटली के ग्रैंडमास्टर को परास्त किया। हालांकि सिर्फ इतने से ग्रैंडमास्टर का खिताब नहीं मिलता। प्रज्ञाननंद को अपने से 2482 रैंकिंग ऊपर के प्रतिद्विंदी से खेलना पड़ा। इस गेम को खेलते हुए जिस तरह से प्रज्ञाननंद ने अपनी पोजिशन कर रखी थी वह देखने लायक थी। कभी वह कुर्सी पर पैरों के बल खड़े हो जाता तो कभी घुटने मोड़कर बैठ जाता। लेकिन वह अपनी हर चाल बेखौफ और निडर होकर चल रहा था।

प्रज्ञाननंद की बड़ी बहन भी एक शतरंज खिलाड़ी है। वैशाली को शतरंज खेलते देख प्रज्ञाननंद इस खेल के प्रति आकर्षित हुआ। लेकिन उनके पिता रमेश बाबू डरते थे और नहीं चाहते थे कि उनका बेटा भी शतरंज खेले। क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी और शतरंज को एक महंगा खेल माना जाता है। दिलचस्प बात ये है कि करजाकिन और प्रज्ञाननंद के अलावा, शतरंज के इतिहास में किसी ने भी 13 साल की उम्र से पहले प्रतिष्ठित ग्रैंडमास्टर खिताब हासिल नहीं किया है।

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