संस्करणों
विविध

वो सिक्योरिटी गार्ड जो शहीदों के परिवार को समझता है अपना, लिखता है खत

yourstory हिन्दी
31st Oct 2018
13+ Shares
  • Share Icon
  • Facebook Icon
  • Twitter Icon
  • LinkedIn Icon
  • Reddit Icon
  • WhatsApp Icon
Share on

जितेंद्र कहते हैं कि किसी भी जवान के शहीद हो जाने के बाद उनके परिजन किस मुश्किल से गुजरते हैं इसे शायद कोई नहीं समझता। इसलिए हम सभी लोगों को उन परिवारों का दुख साझा करने का प्रयत्न करना चाहिए।

image


जितेंद्र ने अब तक 4,000 से अधिक खत लिखे होंगे। वह अपने खत में शहीद के माता-पिता, भाई-बहन और पत्नी के प्रति कृतज्ञता अर्पित करते हैं।

सूरत में गार्ड की नौकरी करने वाले जितेंद्र सिंह देश के लिए अपनी कुर्बानी दे देने वाले शहीदों के परिवारों को खत लिखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। वह एक प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे हैं और बीते 18 सालों से खत लिखने का काम कर रहे हैं। द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वह 1999 में कारगिल युद्ध से वह यह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि सेना में जाकर देश की सेवा करना एक मुश्किल काम है और इस वजह से देश के हर नागरिक का दायित्व है कि वह उन शहीदों के प्रति कृतज्ञ रहे जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी दांव पर लगा जाते हैं।'

जितेंद्र कहते हैं कि किसी भी जवान के शहीद हो जाने के बाद उनके परिजन किस मुश्किल से गुजरते हैं इसे शायद कोई नहीं समझता। इसलिए हम सभी लोगों को उन परिवारों का दुख साझा करने का प्रयत्न करना चाहिए। जितेंद्र ने अब तक 4,000 से अधिक खत लिखे होंगे। वह अपने खत में शहीद के माता-पिता, भाई-बहन और पत्नी के प्रति कृतज्ञता अर्पित करते हैं। जितेंद्र मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर जिले के कुठेड़ा गांव के रहने वाले हैं और सेना से उनका पुराना नाता रहा है।

वह बताते हैं, 'मेरे पूर्वज द्वितीय विश्व युद्ध के वक्त से ही भारतीय सेना का हिस्सा रहे हैं। मेरे पिता महार रेजिमेंट का हिस्सा रहे हैं। मैं भी सेना में जाना चाहता था, लेकिन असफल रहा। जब कारगिल युद्ध हो रहा था तो मेरे पिता मुझे शहीदों के बारे में बताते थे। उसी वक्त मैंने सोचा कि अब मैं शहीदों के परिवार को खत लिखूंगा।' आपको जानकर हैरानी होगी कि जितेंद्र हर महीने बमुश्किल 10,000 रुपये तनख्वाह पाते हैं। इतने कम पैसे में घर का खर्च चलाना तो मुश्किल ही है, साथ ही इतने बड़े काम के लिए जज्बा देखने लायक है। उन्होंन् अपने घर में खत लिखने का अलग कोना बना रखा है।

उनके पास 9 क्विंटल की स्टेशनरी है। इतना ही नहीं उनके पास 38,000 शहीदों का लेखाजोखा है। जब उनसे पूछा गया कि वे कैसे शहीदों का डेटा निकालते हैं, तो उन्होंने कहा, 'मैंने दिल्ली में सेना मुख्यालय में शहीदों के पते जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पता देने से मना कर दिया। अब मैं अखबारों और मीडिया से जानकारी जुटाता हूं और फिर उन्हीं से पता जुटाने की कोशिश करता हूं। मैं शहीदों के परिवारों को बस इतना बताना चाहता हू्ं कि वे अकेले नहीं हैं, उनके बारे में सोचने वाला एक इंसान गुजरात में भी है।' जितेंद्र ने अपने बेटे का नाम भी एक शहीद हरदीप सिंह के नाम पर रखा है जो कि 2003 में कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हो गए थे।

यह भी पढ़ें: अहमदाबाद का यह शख्स अपने खर्च पर 500 से ज्यादा लंगूरों को खिलाता है खाना

13+ Shares
  • Share Icon
  • Facebook Icon
  • Twitter Icon
  • LinkedIn Icon
  • Reddit Icon
  • WhatsApp Icon
Share on
Report an issue
Authors

Related Tags