Brands
YSTV
Discover
Events
Newsletter
More

Follow Us

twitterfacebookinstagramyoutube
Yourstory

Brands

Resources

Stories

General

In-Depth

Announcement

Reports

News

Funding

Startup Sectors

Women in tech

Sportstech

Agritech

E-Commerce

Education

Lifestyle

Entertainment

Art & Culture

Travel & Leisure

Curtain Raiser

Wine and Food

Videos

ys-analytics
ADVERTISEMENT
Advertise with us

इस गांव में गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं नन्हें लाइब्रेरियन

अलग-अलग बस्तियों में जाकर शिक्षा की अलख जगा रही है कक्षा 4 में पढ़ने वाली बच्ची...

इस गांव में गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं नन्हें लाइब्रेरियन

Monday April 30, 2018 , 4 min Read

आज हम एक ऐसी बच्ची की बात कर रहे हैं जो अपनी उम्र से कहीं ज्यादा बड़ी भूमिका निभा रही है और अपने हम उम्र और छोटे बच्चों के लिए मार्गदर्शक साबित हो रही है। सतारा के हेकलवाड़ी गांव में कक्षा 4 में पढ़ने वाली बच्ची अलग-अलग बस्तियों में जाकर शिक्षा की अलख जगा रही है।

image


9 साल की कोमल पवार के लिए गर्मी की छुट्टी का मतलब मौज-मस्ती सैर-सपाटा नहीं है। वो इन छुट्टियों में बाहर तो जरूर निकलती है लेकिन घूमने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों में किताबों के प्रति प्रेम जगाने के लिए। वो इन छुट्टियों में अपने साथ बहुत सारी किताबें लेकर निकलती है।

कहा जाता है कि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें जिस आकार में ढाला जाए वो वैसा ही रूप ले लेते हैं। बेहतर मार्गदर्शन बच्चों के भविष्य को गढ़ने में सबसे ज्यादा सहायक सिद्ध होता है। आज हम एक ऐसी बच्ची की बात कर रहे हैं जो अपनी उम्र से कहीं ज्यादा बड़ी भूमिका निभा रही है और अपने हम उम्र और छोटे बच्चों के लिए मार्गदर्शक साबित हो रही है। सतारा के हेकलवाड़ी गांव में कक्षा 4 में पढ़ने वाली बच्ची अलग-अलग बस्तियों में जाकर शिक्षा की अलख जगा रही है।

9 साल की कोमल पवार के लिए गर्मी की छुट्टी का मतलब मौज-मस्ती सैर-सपाटा नहीं है। वो इन छुट्टियों में बाहर तो जरूर निकलती है लेकिन घूमने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों में किताबों के प्रति प्रेम जगाने के लिए। वो इन छुट्टियों में अपने साथ बहुत सारी किताबें लेकर निकलती है। और बस्ती के बच्चों को उन किताबों से परिचय कराती है और किताबों से उनकी दोस्ती कराती है। कोमल कहती हैं कि "पढ़ने और जानने की ललक के बावजूद भी हमारे क्षेत्र के बच्चे किताबों से महरूम रह जाते हैं। मुझे पढ़ने पढ़ना बहुत पसंद है जिसने मुझे जानकारी और ज्ञान के साथ समृद्ध बनाया है। मैं चाहती हूं कि मेरी उम्र के बच्चे भी ये अनुभव ले सकें और किताब पढ़ने की कला से सशक्त हो सकें। यही मुझे प्रेरित करता है।"

ग्रंथपाल

ग्रंथपाल


2016 से सतारा के छोटे से पांच बस्तियों वाले हेकलवाड़ी गांव की जिला परिषद स्कूल के पुस्तकालय छुट्टियों नें भी खुले रहते हैं। पहले लाइब्रेरियन स्कूल आने को तैयार थी पर बाद में उसने अपनी असमर्थता जाहिर कर दी। इसके बाद चौथे क्लास छात्रों ने बस्तियों में जाकर किताबें बांटने का काम वोलेंटियर के तौर पर शुरू किया। टाटा ट्रस्ट 'पराग' की पहल से स्कूल में किताबों को रखने के लिए एक बॉक्स बनवाया गया है। साथ ही स्टेशनरी की चीजें भी उपलब्ध कराई जीती हैं। एक बच्चे को लाइब्रेरी वोलेंटियर बनाया जाता है और उसे लाइब्रेरी के कामों में निपुण किया जाता है। ये लाइब्रेरी वोलेंटियर हर रोज सरकारी विद्यालय में जाता है और वहां से कक्षा एक से चार तक की किताबें लेकर आता है।

नन्हें ग्रंथपाल

नन्हें ग्रंथपाल


किताबें एक साल से सात तक के बच्चों को पढ़ने के लिए दी जाती हैं। वयस्क भी किताबें ले सकते हैं। छुट्टियों में लाइब्रेरी लाइब्रेरियन के घर पर या निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र में शिफ्ट कर दी जाती है ताकि सभी बच्चों को किताबें साल भर उपलब्ध हो सकें। पर छुट्टियों के समय बच्चों को लाइब्रेरी सभालने का मौका मिलता है। गांव में ये 'छोटे ग्रंथपाल' के नाम से मशहूर हैं। ये विद्यालय की लाइब्रेरी से किताबें लेते हैं और आसपास की बस्तियों में जाते हैं। हर घर में जाकर ये सुनिश्चित करते हैं कि कोई बच्चा पढ़ने से वंचित न रह जाए। ऐसे में इनका काम ये होता है कि रोज से 20 किताबें उठाएं उन्हें बस्ती के बच्चों को दें और पुरानी किताबें वापस ले। इस प्रक्रिया में सबकी रुचि नई-नई चीजें पढ़ने में बनी रहती हैं। पुराने बैच के जाने के बाद नया बैच इस काम को बखूबी संभाल लेता है।

कोमल आगे कहती हैं कि, "पूरे दिन किताबें बांटने का काम ऐसे ही चलता रहता है। जब हम एक बस्ती में काम निपटा चुके होते हैं तो फिर हम दूसरी बस्ती की ओर रुख करते हैं। ताकि सारी बस्तियों के बच्चे पढ़ पाएं और उनके साथ बाकी लोग भी पढ़ सकें।

यह भी पढ़ें: पढ़ाई छोड़ जो कभी करने लगे थे खेती, वो आज हैं देश की नंबर 1 आईटी कंपनी के चेयरमैन