भारतीय दस्तकारों के लिए अमेरिका में 'तिजोरी' खुलवा दी मानसी गुप्ता ने

By Ajit Harshe
June 30, 2015, Updated on : Thu Apr 08 2021 08:59:57 GMT+0000
भारतीय दस्तकारों के लिए अमेरिका में 'तिजोरी' खुलवा दी मानसी गुप्ता ने
“विचार यह था कि भारत के शिल्पकारों, जुलाहों और दस्तकारों का हस्तशिल्प उचित कीमत पर और सुविधाजनक तरीके से दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुँचाया जाए” - मानसी गुप्ता
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उद्यमी के रूप में Tjori (तिजोरी) की संस्थापक, मानसी गुप्ता ने लोगों और परिस्थितियों को संभालना सीख लिया है। Tjori उत्तरी अमरीका में भारतीय हस्तशिल्प मुहैया कराने वाली एक उत्कृष्ट ऑनलाइन दुकान है, जिसे 2013 में शुरू किया गया था।

मानसी गुप्ता

मानसी गुप्ता


मानसी ने एक उद्यमी के रूप में अब तक कई चुनौतियों का सामना किया है और जब कि अब Tjori (तिजोरी) अपने विकास पथ पर अग्रसर हो चुकी है, वह कहती हैं, “उसने मुझे एक ऐसे मनुष्य के रूप में ढाल दिया है, जो मानता है कि कोई काम शुरू करने के लिए शक्ति या किसी के पृष्ठपोषण की आवश्यकता नहीं है।”

बचपन और शुरुआती वर्ष

मानसी का जन्म और लालन-पालन जम्मू में हुआ। एक बच्चे के रूप में उन्हें घूमना-फिरना बहुत पसंद था। वास्तव में वह ऐसे परिवार से आती है, जो पर्यटन के प्रति हमेशा बड़ा उत्साही रहा है। वे लोग भारत में कहीं भी, अनेकों दूरस्थ इलाकों में घूमने जाते और वहाँ से उस जगह की खास, अनोखी चीज़ें खरीदकर ले आते। पर्यटन और हस्तशिल्प को लेकर इसी शुरुआती अनुभव ने उनके मन में भारतीय हस्तशिल्प के प्रति अनुराग पैदा कर दिया।

उनकी पढ़ाई एम एच ए सी स्कूल, नागबनी में और महाराजा हरीसिंह स्कूल, जम्मू में हुई। 2004 में वह स्नातक की पढ़ाई करने पुणे पहुँची, जहाँ उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से बी सी ए किया और फिर वेल्स विश्वविद्यालय, यू के से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। उसके बाद भारत वापस आकर कुछ समय आई बी एम में भी नौकरी की।

बाद में उन्होंने कामकाजी उद्यमियों के लिए वार्टन द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम में हिस्सा लिया और जब वे वार्टन में ही थीं, उनके मन में Tjori (तिजोरी) शुरू करने के विचार ने आकार लेना शुरू कर दिया था।

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मानसी अपनी वार्टन मोरक्को यात्रा को याद करते हुए कहती हैं कि वहाँ से वे बहुत सी हाथ से तैयार वस्तुएँ खरीदकर लाईं लेकिन हवाई जहाज से सामान ले जाने में आने वाली दिक्कतों के चलते वह अपनी मनपसंद हर चीज़ खरीदकर नहीं ला पाईं।

उद्यमिता की ओर बढ़ते कदम

वार्टन में रहते हुए उन्हें महसूस हुआ कि हाथ से बने भारतीय हस्तशिल्प की उत्तरी अमरीका में बड़ी मांग है। वे कहती हैं, “थोड़ी सी खोजबीन करने के बाद पता चला कि भारतीय हस्तशिल्प का बाज़ार 32 बिलियन यू एस डॉलर का है।” तब वे हस्तशिल्प के व्यापार में हाथ आजमाने के बारे में विचार करने लगीं। उन्हें लगा कि उत्तरी अमरीका में एक विशाल बाज़ार तो मौजूद है लेकिन परंपरागत दलालों के चलते उपभोक्ता तक पहुँचते-पहुँचते वह बहुत महंगा हो चुका होता है। इसी समस्या का समाधान उन्हें करना था।

मानसी कहती हैं, 

“विचार यह था कि भारत के शिल्पकारों, जुलाहों और दस्तकारों का हस्तशिल्प उचित कीमत पर और सुविधाजनक तरीके से उन ग्राहकों तक पहुँचाया जाए। Tjori (तिजोरी) सीमित समय में अपना सामान बेचने के मॉडल पर काम करती है, जिससे ग्राहक को नए आश्चर्य की तरह हर दिन एक नई वस्तु खरीद पाने का आनंद प्राप्त हो और उनके मन में हर वक़्त सामान के खत्म हो जाने से पहले उसे खरीद लेने की तीव्र इच्छा पैदा हो।”

Tjori (तिजोरी)

“एक तरह से यह खजाने की खोज में लगा उद्यम है और इसीलिए हमने इसका नाम रखा है-Tjori (तिजोरी)," हल्के स्मित के साथ वे जोड़ती हैं।

"फिलाडेल्फिया में रहते हुए ही इसे शुरू करने का विचार बना था लिहाज़ा सारी योजना की रूपरेखा वहीं तैयार हुई। कह सकते हैं कि वहीं मैं कुछ आपूर्तिकर्ताओं को अपने साथ जोड़ने में भी कामयाब रही थी-मगर बहुत कम संख्या में। हम 2012 में भारत लौटे और उसी साल अक्टूबर से हमने ज़मीनी स्तर पर काम की शुरूआत की। फिर जनवरी 2013 में कम्पनी अस्तित्व में आ गई।"

वे आगे बताती हैं, "हाँ, जब हमने अपनी वेबसाइट शुरू की तो पहले दिन ही वह क्रैश हो गई। हमें कुछ दिनों के लिए काम बंद करना पड़ा जब कि हमारे पास 250 ऑर्डर्स आ चुके थे। अक्टूबर-नवंबर 2012 तक टीम के सदस्यों की संख्या पाँच हो चुकी थी।"

अपनी शुरुआत में Tjori (तिज़ोरी) सिर्फ उत्तरी अमरीका में ही अपनी सेवाएँ प्रदान करती थी मगर आज वह भारत में भी अपना काम कर रही है। मानसी के अनुसार, उनके उपक्रम की विशेषता यह है कि वह एक समयबद्ध विक्रय मॉडल है, जो अपने आप में अद्वितीय है क्योंकि वह खरीदारों में सामग्री के लोप हो जाने से पहले ही खरीद लेने की तीव्र इच्छा पैदा कर देता है।

चुनौतियाँ

Tjori (तिज़ोरी) के लगभग सभी काम मानसी खुद संभालती हैं-चाहे वह सामान मंगवाने का काम हो, आपूर्ति का काम हो, संचालन या प्रबंधन हो, चाहे अपने सामान की मार्केटिंग का काम हो। आत्मविश्वास के साथ वे जोड़ती हैं, "मैंने अब तकनीकी काम भी अपने हाथ में लेना शुरू कर दिया है।" लेकिन जिस तरह से उनका काम बढ़ रहा है, वह जानती हैं कि सारे काम वे स्वयं नहीं कर सकेंगी।

मानसी बताती हैं कि उनका सबसे चुनौतीपूर्ण समय वह था जब वे भारत में भी अपना काम फ़ैलाने की शुरुआत कर रही थीं। अपने साझेदार, अंकित के साथ मिलकर उद्यम की शुरुआत बहुत शानदार अनुभव रहा। "किसी पेशेवर साझेदार के मुकाबले मुझे अंकित से अधिक मदद मिल रही है। अंकित से मुझे हमेशा चिरस्थायी और बिना शर्त समर्थन और सहयोग मिलता रहा है। वह मेरा परामर्शदाता और निवेशक भी है। उसका मार्गदर्शन और उसकी कुछ बढ़िया और उपयोगी कार्यप्रणालियों ने Tjori (तिजोरी) को और मज़बूत बना दिया है," मानसी हमसे जानकारी साझा करते हुए कहती हैं।

प्रेरणा

मानसी के लिए अपने काम के प्रति लगातार उत्साही बने रहना कतई मुश्किल नहीं रहा क्योंकि छोटी-मोटी बातें भी उन्हें प्रेरित करने के लिए पर्याप्त होती हैं। लेकिन वे कहती हैं, "मैं किसी दबाव में काम नहीं कर सकती क्योंकि मैं ऐसा कुछ रचना चाहती हूँ, जिसके बल पर दुनिया मुझे मेरे न रहने के बाद भी याद करे।"

भविष्य की योजनाओं के सन्दर्भ में आने वाले वर्षों में वे Tjori (तिजोरी) को विकसित होता देखना चाहती हैं। वे अपनी टीम के सदस्यों या कर्मचारियों और दस्तकारों की संख्या में वृद्धि करना चाहती हैं, जिससे वे दुनिया के दूसरे देशों में भी अपनी सेवाएँ प्रदान कर सके।

नया उद्यम शुरू करने की आकांक्षी महिला उद्यमियों के लिए तीन टिप्स

  • मन की शांति और संयम बनाए रखें और पूरे समर्पण के साथ अपने काम में लग जाएँ।
  • अपने काम से प्रेम करें और वही काम करें, जिसे आप पूरे मन से चाहते है।
  • हमेशा सबसे दोस्ताना रवैया रखने की कोशिश करें।
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