ट्रांस फैट के कारण दुनिया में 5 अरब लोगों की जिंदगी खतरे में : WHO रिपोर्ट

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की चेतावनी. लोगों की सेहत से बेखबर फूड इंडस्‍ट्री.

ट्रांस फैट के कारण दुनिया में 5 अरब लोगों की जिंदगी खतरे में : WHO रिपोर्ट

Saturday February 11, 2023,

5 min Read

पूरी दुनिया में 5 अरब लोगों पर ट्रांस फैट की वजह से हृदयरोगों का खतरा मंडरा रहा है. यह विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट कह रही है.

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने वर्ष 2018 में पहली बार इंडस्ट्रियल मास फूड प्रोडक्‍शन में इस्‍तेमाल होने वाले ट्रांस फैट को पूरी तरह खत्‍म किए जाने की बात कही थी. इसके लिए एक लक्ष्‍य निर्धारित किया गया था कि वर्ष 2023 तक ट्रांस फैट के इस्‍तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाए.

दुनिया भर में बहुत सारे देशों ने इसकी गंभीरता को समझते हुए जरूरी कदम भी उठाए. आज दुनिया भर में तकरीबन 2.8 अरब लोग ट्रांस फैट के खतरों को समझकर उससे दूरी बरत रहे हैं. इसके लिए जागरूकता अभियान से लेकर देश के स्‍तर पर बनाई गई नीतियों का भी योगदान है.

लेकिन इतनी कोशिशों के बाद भी ट्रांस फैट को पूरी तरह खत्‍म किए जाने का लक्ष्‍य अब भी हासिल नहीं हो पाया है और पूरी दुनिया में तकरीबन 5 अरब लोग अब भी ट्रांस फैट का सेवन कर रहे हैं, जिसकी वजह से उन पर गंभीर हृदय रोगों का शिकार होने का खतरा मंडरा रहा है.

ट्रांस फैट क्‍या होता है ?

ट्रांस फैट एक तरह की इं‍डस्ट्रियली प्रोड्यूज्‍ड फैट है, जिसका इस्‍तेमाल खाद्य पदार्थों के निर्माण में किया जाता है. ट्रांस फैट का इस्‍तेमाल ज्‍यादातर औद्योगिक स्‍तर होने वाले मास फूड प्रोडक्‍शन में होता है. बाजार में जितनी भी तरह के पैकेज्‍ड फूड उपलब्‍ध हैं, उनके निर्माण में ज्‍यादातर ट्रांस फैट का इस्‍तेमाल होता है. इसके अलावा बेक्‍ड आइटम्‍स, कुकिंग ऑयल और टेबल स्‍प्रेड्स में भी इस्‍तेमाल होने वाला फैट ट्रांस फैट होता है.

इसे और आसान शब्‍दों में इस तरह समझते हैं. मान लीजिए आप सुबह जल्‍दी-जल्‍दी में ऑफिस के लिए निकले हैं. ऑफिस पहुंचकर आपने सैंडविच या बर्गर ऑर्डर किया. अब इस बर्गर को बनाने में जिस फैट का इस्‍तेमाल हुआ है, वह दरअसल ट्रांस फैट है. सैंडविच में जो चीज स्‍प्रेड, मेयोनीज या और कोई भी स्‍प्रेड का इस्‍तेमाल किया गया है, अगर वह बटर या मक्‍खन नहीं है तो वो ट्रांस फैट है. शाम को आपने जो पीजा, फ्राइज, चीज बॉल्‍स या चिकन रोल ऑर्डर किया, उसमें भी ट्रांस फैट का इस्‍तेमाल हुआ है.

आपने जो चिप्‍स का पैकेट खोला है, केक और पेस्‍ट्री की स्‍लाइस मुंह में डाली है, बेक्‍ड ब्रेड ऑर्डर की है, उन सबके निर्माण में ट्रांस फैट का इस्‍तेमाल हुआ है. इसके अलावा रिफाइंड ऑइल आदि के निर्माण में भी ट्रासं फैट का इस्‍तेमाल होत है. इसलिए कहते हैं कि रिफाइंड ऑइल सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता. 

ट्रांस फैट को ट्रांस अनसैचुरेटेड फैटी एसिड या ट्रांस फैटी एसिड भी कहा जाता है. इस फैट के साथ सबसे बड़ी दिक्‍कत यह है कि यह प्राकृतिक तौर पर फूड में मौजूद ऑयल से नहीं बनता, जैसेकि दूध से मक्‍खन निकालना और घी बनाना. या सरसों, तिल, नारियल आदि को पेरकर उसके फैट से तेल बनाया जाना.

ट्रांस फैट ऐसी चीजों से बनता है, जिसे फैट में बदलने के लिए उसे लंबी बहुत तेज आंच पर मशीनी ट्रांसफॉर्मेशन की प्रक्रिया से गुजरना होता है और इस प्रक्रिया में उसमें बड़ी मात्रा में तरह-तरह के केमिकल्‍स का इस्‍तेमाल होता है. वेजिटेबल, कोनोला और पाम ऑयल उनमें से एक हैं.

ट्रांस फैट को एक और आसान उदाहरण से समझ सकते हैं. आपको डालडा का वनस्‍पति घी याद है. एक घी, जो देखने में और स्‍वाद में तकरीबन देशी घी जैसा ही लगता है, लेकिन है वो सिंथेटिक हाइड्रोजेनेटेड वेजीटेबल ऑइल से बना घी, जो बहुत ऊंचे तापमान पर मशीनों और केमिकल की मदद से जमाया गया है.

60 के दशक में जब पहली बार वनस्‍पति घी को विज्ञापनों के जरिए सेहतमंद बताकर भारत के हर मध्‍यवर्गीय घर में पहुंचाने की कोशिश की गई तो हमारी दादियां-नानियां कहती थीं कि यह नकली घी है और शरीर को नुकसान करेगा. फिर भी यह वनस्‍पति घी काफी पॉपुलर हुआ क्‍योंकि यह देशी घी के मुकाबले काफी सस्‍ता था.

हमारी दादियों-नानियों को वनस्‍पति घी के बनने की प्रक्रिया नहीं पता थी. उन्‍हें विज्ञान की भी कोई समझ नहीं थी. वो सिर्फ अपनी सहज बुद्धि और ज्ञान से इस बात को समझती थीं कि कंपनी की फैक्ट्रियों में बड़े पैमाने पर बन रही कोई चीज सेहत के लिए अच्‍छी नहीं हो सकती.

आज दुनिया भर के डॉक्‍टर, वैज्ञानिक और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन जैसी संस्‍थाएं अरबों रुपए खर्च करके की गई रिसर्च के बाद हमें बता रहे हैं कि दुनिया में 5 अरब लोगों की जान और सेहत को इस ट्रांस फैट की वजह से खतरा है. इतना ही नहीं, WHO की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल पांच लाख लोगों की मौत ट्रांस फैट का सेवन करने की वजह से होती है.

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में हर साल कोरोनरी हार्ट डिजीज से होने वाली मौतों के लिए भी ट्रांस फैट जिम्मेदार है. पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र और दक्षिण कोरिया दुनिया के उन देशों में हैं, जहां ट्रांस फैट का खतरा सबसे ज्‍यादा है.


Edited by Manisha Pandey