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अंदाज लें ‘Tripoto’ का, मजा लें घूमने फिरने का

लीक से हटकर जानकारी देता है ‘Tripoto’कहानी के साथ मानचित्र और फोटो भी‘Tripoto’ के पास फिलहाल 100 जगहों की जानकारी

Harish Bisht
9th Jul 2015
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घुमने फिरने के शौकीन अगर आप हैं तो कभी Tripoto के अंदाज में घूमें। यकीनन आपको जरूर मजा आएगा और एक नया अनुभव भी मिलेगा। इस कंपनी को स्थापित किया है अनिरुद्ध गुप्ता और माइकल लिंगदोह ने। जो विभिन्न यात्राओं से जुड़ी जानकारी ना सिर्फ कहानी के तौर पर आपके सामने पहुंचाते हैं बल्कि वो उस जगह की फोटो और मानचित्र के जरिये उसका विवरण भी देते हैं। अनिरुद्ध इस काम को शुरू करने से पहले Notion Ink के संस्थापक सदस्यों में एक रह चुके हैं इसके अलावा उन्होने रॉकेट इंटरनेट के लिए भी काम किया था, जबकि लिंगदोह का ये दूसरा उद्यम है इससे पहले वो एचएसटी ऑपरेशन (जिसे अब एचएसटी सोलर कहते हैं) की स्थापना कर चुके हैं।

‘Tripoto’ के सह-संस्थापक

‘Tripoto’ के सह-संस्थापक


किसी यात्रा का मार्ग अगर कोई दूसरा यात्री बताये तो कैसा होगा। जो अपने अनुभव के साथ किसी खास जगह के प्राकृतिक नजारे और अपने शौक का भी वर्णन करेगा। इससे वेबसाइट के किसी कंटेट की प्रमाणिकता भी साबित होती है। इसके अलावा दूसरे लोग उस यात्री से सीधे जुड़ अपने अनसुलझे सवालों का जवाब भी पा सकते हैं। जबकि वेबसाइट में दिखाया गया मानचित्र यात्रा के हर ठिकाने को बताने का काम करता है। इसके अलावा उस खास जगह का चित्र किसी भी यात्री को वहां की सच्चाई जानने के लिए काफी होता है।

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आगरा जैसी जगह पर जाने के लिए रास्ते असानी से तलाशे जा सकते हैं लेकिन लीक से हटकर खास जगहों की तलाश मुश्किल होती है क्योंकि वो मानचित्र में कहीं छुपे होते हैं इतना ही नहीं ना ही उनके बारे में पर्याप्त जानकारी मिलती है। अनिरुद्ध के मुताबिक उन्होने इसी समस्या को देखते हुए हर घुमने फिरने वाली जगह को मानचित्र में खास जगह दी है साथ ही भरोसमंद जानकारी भी। जो वहां जा चुके यात्रियों से मिली है। लोग ऐसी जगहों पर घुमना ज्यादा पसंद करते हैं जो लीक से हटकर हों और ये ट्रेंड भारत में भी बढ़ रहा है। यहां के लोग सिर्फ आगरा या स्वर्ण मंदिर घूमने के अलावा दूसरी जगहों पर भी जाना पसंद करते हैं। ताकि उनको एक नया अनुभव हासिल हो।

अनिरुद्ध और माइकल की मुलाकात आईएसबी हैदराबाद में हुई जहां पर इन दोनों ने इस विचार को साझा किया। लिंगदोह के मुताबिक कोई भी बिजनेस स्कूल अपने सह-संस्थापकों से मिलने की सही जगह होता है। क्योंकि यहां पर अलग अलग पृष्ठभूमि और अलग अलग शौक रखने वाले लोग मिलते हैं। हालांकि उनको ये विचार काफी पहले ही आ गया था लेकिन उन्होने इस पर काम कुछ ही समय पहले शुरू किया है। अनिरुद्ध के मुताबिक देश में शानदार प्रौद्योगिकी टीम का निर्माण किया जा सकता है जिसे कुछ उद्यमी मानने को तैयार नहीं होते। अच्छी प्रतिभाएं कंपनियों में कैद होकर रह गई हैं या फिर उनको ढूंढना मुश्किल हो गया है। जबकि खराब प्रतिभाएं ढेरों हैं और इनका किसी कंपनी के साथ जुड़ना कंपनी के लिए आत्महत्या के समान होता है। इन लोगों को भी अपने लिए प्रौद्योगिकी टीम बनाने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा और इसके लिए इन लोगों का काफी वक्त बर्बाद भी हुआ।

शुरूआत में जब इन लोगों ने दूसरे लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की तो इन्होने आईआईटी और आईएसबी के नामों का सहारा लिया। हालांकि इनकी ये योजना काफी अच्छी थी लेकिन जल्द ही इनको पता चल गया कि ये गलत है क्योंकि कोई भी अच्छा उम्मीदवार ये देखता है कि क्या काम किया है और आप किस ब्रांड से ताल्लुक रखते हैं। उसको दूसरी चीजों से कोई वास्ता नहीं होता। फिलहाल Tripoto के पास 100 जगहों का विवरण हैं जिसे दूसरे यात्रियों ने इनके साथ साझा किया है। इनको उम्मीद है कि अगले तीन महिनों के अंदर ये ऐसे 1000 से ज्यादा जगहों की जानकारी दूसरे यात्रियों के लिए पेश करेंगे। इन लोगों का मुख्य ध्यान फिलहाल एशिया में है।

इन लोगों के सामने मुख्य चुनौती है अच्छे कंटेंट निर्माताओं की। क्योंकि इनके पास हर रोज अच्छी संख्या में लोग अपनी यात्राओं का विवरण भेजते हैं। इसके अलावा इन लोगों का मानना है कि काफी बड़ी मात्रा में मजेदार कंटेंट और फोटोग्राफ्स ऑफलाइन मौजूद है। इनको एक साथ जोड़ना और उनको डिजटाइज़ करना बड़ा काम है। इन लोगों का कहना है कि इनकी योजना स्वतंत्र गाइड सेंगमेंट शुरू करने की है ताकि कोई यात्री Tripoto की मदद से सीधे अपना टूर बुक कर सके।

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