सालों पहले से ही मेक इन इंडिया और फेमिनिज्म की प्रतिमूर्ति रही हैं किरण मजूमदार शॉ

By yourstory हिन्दी
November 23, 2017, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:15:18 GMT+0000
सालों पहले से ही मेक इन इंडिया और फेमिनिज्म की प्रतिमूर्ति रही हैं किरण मजूमदार शॉ
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आज से 30-32 साल पहले जाइए, एक बाइस तेईस साल की लड़की के बारे में कल्पना कीजिए। उससे क्या उम्मीद की जाती थी, यही न कि वो डिग्री लेकर घर बसा ले अपना। लड़कियों को पढ़ाया लिखाया तो जाता था लेकिन केवल इसलिए कि अनपढ़ लड़कियों की शादी में दिक्कत होती थी। मनमाफिक करियर क्या होता है, इससे लड़कियां वाकिफ ही नहीं थीं। ऐसे में किसी लड़की के लिए बियर बनाने की कला की पढ़ाई करना और उसको अपना व्यवसाय बनाना, किसी परीकथा से कम नहीं था।

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खुद पर अटूट विश्वास और तेज दिमाग के साथ जिसने अपने अप्रत्याशित सपने को सच कर दिखाया, आज वो शख्सियत टाइम्स की विश्व की 100 प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में से एक है और उनका नाम है किरण मजूमदार। 

फोर्ब्स, फार्चून जैसे कई सम्मानजनक संस्थानों ने भी उन्हें दुनिया की टॉप की महिलाओं में शामिल किया है। किरण मजूमदार-शॉ, बायोकॉन की प्रेसीडेंट और प्रबंध निदेशक हैं। बायोकॉन भारत की पहली जैव प्रौद्योगिकी कंपनी है। यह 1978 में स्थापित की गई थी।

आज से 30-32 साल पहले जाइए, एक बाइस तेईस साल की लड़की के बारे में कल्पना कीजिए। उससे क्या उम्मीद की जाती थी, यही न कि वो डिग्री लेकर घर बसा ले अपना। लड़कियों को पढ़ाया लिखाया तो जाता था लेकिन केवल इसलिए कि अनपढ़ लड़कियों की शादी में दिक्कत होती थी। मनमाफिक करियर क्या होता है, इससे लड़कियां वाकिफ ही नहीं थीं। ऐसे में किसी लड़की के लिए बियर बनाने की कला की पढ़ाई करना और उसको अपना व्यवसाय बनाना, किसी परीकथा से कम नहीं था। लेकिन खुद पर अटूट विश्वास और तेज दिमाग के साथ उसने इस अप्रत्याशित सपने को सच कर दिखाया। आज वो शख्सियत, टाइम्स की विश्व की 100 प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में से एक है। और उनका नाम है किरण मजूमदार। फोर्ब्स, फार्चून जैसे कई सम्मानजनक संस्थानों ने भी उन्हें दुनिया की टॉप की महिलाओं में शामिल किया है। किरण मजूमदार-शॉ, बायोकॉन की प्रेसीडेंट और प्रबंध निदेशक हैं। बायोकॉन भारत की पहली जैव प्रौद्योगिकी कंपनी है। यह 1978 में स्थापित की गई थी।

किरण ने जो बियर को बनाने के लिए जो एंजाइम विकसित किया था, उसका इस्तेमाल आज तक अमेरिकी बेवरेज कंपनी ओशन स्प्रे के लिए भी हो रहा है। किरण गर्व से कहती हैं कि आज तक, उस एंजाइम को नहीं बदला गया है। यह बहुत अच्छा लगता है कि हमने यहां सब कुछ किया, बेंगलोर में। आज से बीस-तीस साल पहले मेक इन इंडिया को उन्होंने सार्थक कर दिया था। किरण सही मायनों में एक फेमिनिस्ट हैं। आजकल की तरह फेसबुकिया फेमिनिस्ट की माफिक नहीं। जब उनके दोस्त 25 साल में शादी कर रहे थे, वो काम कर रही थीं। बिना इस बात की चिंता किये कि उम्र गुजर गई तो कौन करेगा उनसे शादी। यहां पर ये ध्यान रहे वो 21वीं नहीं बीसवीं सदी थी। किरण अपने वक्त से आगे का सोच रखती थीं। उन्होंने 44 साल में जैव प्रौद्योगिकी के अग्रणी जॉन शॉ से शादी की।

युवा किरण

युवा किरण


किरण ने भी लैंगिक भेदभाव बारम्बार झेला है। लेकिन वो हारी नहीं, उससे लड़ीं। बैंक वाले उनको लोन नहीं देते थे, बोलते थे कि आपके पिता के नाम से देंगे। आप लड़की हो। किरण भी अड़ गईं कि जब मैं अपनी कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर हूंं तो लोन मेरे नाम से सैंक्शन क्यों नहीं हो सकता। फिर उन्हें मिले आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व अध्यक्ष, आईसीआईसीआई वेंचर्स के संस्थापक नारायणन वाघुल। नारायण उनकी पहली मीटिंग में ही किरण से खासे प्रभावित हुए। नारायण उस मीटिंग को याद करते हैं, उस पर विश्वास न करना मुश्किल था। वह मेरे कमरे में आईं, हमने आधे घंटे बिताए और मैं देख सकता था कि उसमें एक आग थी। मजूमदार इस मीटिंग के बारे में कहती हैं, वाघुल ने हमारी तकनीक का वित्त पोषण किया जो हमारे व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। जब मैं अपनी तकनीक को लॉन्च कर रही थी, तो मुझे भारत में कोई इन्वेस्टर नहीं मिला। कोई उद्यम वित्त पोषण के लिए तैयार नहीं था, कोई भी बैंक इसे छूना नहीं चाहता था। कोई भी युवा वैज्ञानिक द्वारा घरेलू-उर्जा प्रौद्योगिकी में पैसे नहीं लगाना चाहता था।

अपने माता- पिता के साथ किरण

अपने माता- पिता के साथ किरण


बॉयोकॉन, आज एक अरब डॉलर की कंपनी है और एशिया की सबसे बड़ी बायोफर्मा फर्म है। बेंगलोर में मजूमदार के किराए के घर वाले गैराज में 10,000 (आज लगभग 4 लाख रुपये) रुपये की पूंजी के साथ इसकी शुरुआत हुई थी। एंजाइम से बायोफॉर्मासुटिकल तक 1990 के दशक के उत्तरार्ध में कंपनी के बदलाव ने इसे वैश्विक पैमाने पर ले जाने के लिए संभव बना दिया था। लेकिन मजूमदार-शॉ के लिए युरेका जैसा पल 2004 में आया जब कंपनी की प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश यानि आईपीओ हुई। इसे 33 प्रतिशत से अधिक का भुगतान किया गया था। मजूमदार के मुताबिक, जब तक आप कड़ी मेहनत नहीं करते और आईपीओ के लिए नहीं जाते, तब तक आप उस मूल्य का एहसास नहीं करेंगे जो आपने बनाया है। यह देखने में काफी दिलचस्प है कि किस तरह जो लोग कहते थे, 'मेरे पास तुम्हारे लिए केवल 15 मिनट हैं', वो आज हमारे पास खुद चलकर आते हैं।

किरण मजूमदार भारत की सबसे अमीर महिलाओं में से एक हैं। उनको पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। किरण मजूमदार शॉ ने सीएनबीसी-आवाज़ के साथ बात करते हुए कहा था कि हर नारी में बहुत ही हिम्मत और ताकत है उन्हें सिर्फ अवसर चाहिए। महिलाओं को समाज से भी सपोर्ट की जरूरत है। देश की हर नारी इस देश के लिए बहुत कुछ करने की क्षमता रखती है। 

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