सड़क पर चलने का पाठ पढ़ाने वाले 'ट्रैफिक बाबा' दान कर गए अपनी जिंदगी

By yourstory हिन्दी
November 08, 2017, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:15:18 GMT+0000
सड़क पर चलने का पाठ पढ़ाने वाले 'ट्रैफिक बाबा' दान कर गए अपनी जिंदगी
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नोएडा की सड़कों पर नियमों के प्रति जागरुकता फैलाने में ट्रैफिक बाबा का अहम योगदान रहा है। अपने किसी करीबी को हादसे में खोने के बाद वे इतने विचलित हुए कि शहर के लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने में जुट गए। 

सड़क पर राहगीरों को ट्रैफिक नियम का पालन करना सिखाते ट्रैफिक बाबा

सड़क पर राहगीरों को ट्रैफिक नियम का पालन करना सिखाते ट्रैफिक बाबा


 उन्होंने इच्छा जताई थी कि मौत पर उनके अंग दान कर दिए जाएं। लिहाजा उनकी आंखें और पेसमेकर को दान कर दिया गया। देर होने की वजह से अन्य अंग दान नहीं हो पाए।

मौत से पहले ही उन्होंने कह दिया था कि उनके शव का अंतिम संस्कार श्मशान की बजाय विद्युत शवदाह गृह में किया जाए ताकि प्रदूषण न हो। इसलिए उनकी ख्वाहिश के मुताबिक सोमवार सुबह दिल्ली में लोधी रोड पर विद्युत शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

जिंदगी के आखिरी दिनों में 23 साल तक पूरी शिद्दत और नि:स्वार्थ भाव से लोगों को ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाने वाले ट्रैफिक बाबा यानी मुकल चंद्र जोशी का निधन हो गया। वे 83 वर्ष में थे। वृद्धावस्था में समाज सेवा करने वाले बाबा ने जाते-जाते किसी की दुनिया में उजाला कर गए। उन्होंने अपनी दोनों आँखें भी दान कर दीं। मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में रहने वाले मुकुल चंद्र 1973 में एयरफोर्स से फ्लाइट इंजिनियर के पद से रिटायर हुए थे। वह एनसीआर के नोएडा के सेक्टर-21 में करीब 23 साल से रह रहे थे। बताया जा रहा है कि वह जल्द ही अपने छोटे बेटे के पास बेंगलुरु जाने वाले थे।

उनके घरवालों ने बताया कि बीते रविवार को जिस दिन उनका निधन हुआ उस दिन सुबह वे रोज की तरह वह टहलने के लिए निकल गए। वहां से वापस लौटकर उन्होंने खुद अपने लिए चाय बनाई। इसके बाद पत्नी शोभा को कुछ देर आराम करने की बात कहकर सो गए। थोड़ी देर बाद पत्नी ने उन्हें नहाने के लिए जगाने की कोशिश की। शरीर में कोई हलचल न होने पर उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया। इसके बाद उन्हें कैलाश अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मुकुल चंद्र के बड़े बेटे नीरज जोशी सिंगापुर में मर्चेंट नेवी में कैप्टन हैं तो वहीं छोटे बेटे राजीव जोशी एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन हैं। इन दिनों वह बेंगलुरु में तैनात हैं। राजीव ने बताया कि उनके पिता ने इच्छा जताई थी कि मौत पर उनके अंग दान कर दिए जाएं। लिहाजा उनकी आंखें और पेसमेकर को दान कर दिया गया। देर होने की वजह से अन्य अंग दान नहीं हो पाए। मौत से पहले ही उन्होंने कह दिया था कि उनके शव का अंतिम संस्कार श्मशान की बजाय विद्युत शवदाह गृह में किया जाए ताकि प्रदूषण न हो। इसलिए उनकी ख्वाहिश के मुताबिक सोमवार सुबह दिल्ली में लोधी रोड पर विद्युत शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

नोएडा की सड़कों पर नियमों के प्रति जागरुकता फैलाने में ट्रैफिक बाबा का अहम योगदान रहा है। करीब 14 साल पहले सड़क हादसे में मुकुल चंद्र के एक रिश्तेदार की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। दिवाली से ठीक पहले हुए इस हादसे ने उन्हें इतना विचलित किया वे शहर के लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने में जुट गए। नोएडा ही नहीं ट्रैफिक बाबा जब बेंगलुरु अपने बेटे के पास जाते, तो वहां भी क्रॉसिंग पर खड़े होकर कन्नड़ और तमिल में रिकॉर्डेड संदेश बजाते थे। ट्रैफिक बाबा रोजाना 250 लोगों को पर्चे बांट नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करते थे। यह सारा काम वह अपने पैसों से करते थे।

अभी हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था कि वो मन की बात कार्यक्रम में इसकी बात जरूर करें, क्योकि सबसे ज्यादा सड़क हादसों में मृत्यु को लेकर हमारा देश सबसे ऊपर है। ट्रैफिक बाबा एक ऐसे व्यक्ति थे, जो नागरिक अधिकारों के साथ-साथ नागरिक का कर्त्तव्य भी समझते थे। उनके जाने से यह अभियान भी खत्म सा हो जाएगा। अभी हाल ही में पुलिस प्रशासन की ओर से 9 सितंबर को गरूड व शक्ति सेवा शुरू की गई थी। इस दिन एडीजी ने मुकुल चंद्र जोशी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया था। इससे पहले भी उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका था। यहां तक कि इलाके के ट्रैफिक ऑफिसर किसी भी कैंपेन के लिए उनकी मदद लेते थे।

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