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मध्यस्थता केंद्रों को फिर खड़ा करने की जरूरत: जेटली

निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए यह एक सकारात्मक पहल साबित होगी। 

PTI Bhasha
22nd Oct 2016
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भारत को महत्वपूर्ण वाणिज्यिक मध्यस्थता केंद्र बनाने पर जोर देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी के मध्यस्थता केंद्रों को पुनर्जीवित करने या फिर खड़ा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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इसका मकसद अनुबंध को लेकर विवादों का कम लागत में तेजी से निपटान करना है।

उन्होंने कहा कि भारत सुस्त विश्व अर्थव्यवस्था में उम्मीद की किरण है और उसने सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकषिर्त किया है। 

देश को निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए एक बेहतर व्यवस्था की जरूरत है जिससे विवादों का निपटान तेजी से किया जा सके।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को महत्वपूर्ण मध्यस्थता केंद्र बनाने के लिए, ‘‘हमें मध्यस्थता के लिए उचित ढांचे की जरूरत है, इस दिशा में हम आगे बढ़े हैं।’’

 उनका इशारा मुंबई में मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने के लिए हुई प्रगति की ओर था।

उधर दूसरी तरफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा लिखे ब्लॉग आलेखों और विचारों के हिन्दी संकलन अंधेरे से उजाले की ओर का लोकार्पण किया और कहा कि राजनीति की पिच पर विपक्ष में रहते हुए भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अरुण जेटली ने फुल टॉस को हमेशा बाउंड्री के बाहर भेजा है। 

इस पुस्तक में वर्णित सभी विषयों की दिशा समाज को आगे ले जाने की ओर उन्मुख है । लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन का अनुभव उनकी लेखनी में सदैव झलकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया अरुणजी को एक सफल अधिवक्ता, एक सफल राजनेता, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार के एक सफल वित्त मंत्री के रूप में जानती है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जेटली का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान आडवाणीजी के समय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता के रूप में रहा है । भारतीय जनता पार्टी के अंदर चुनाव की रणनीति बनाना, चुनाव के मुद्दों की पहचान करना, इन मुद्दों के आधार पर पार्टी के कार्यक्रमों की रूप-रेखा तैयार करना और मतदान के बाद तक के कार्यक्रम का सूक्ष्म विश्लेषण करना - इस परम्परा की भाजपा में यदि किसी ने शुरुआत की है, तो उसमें अरुण जेटली का नाम प्रमुख है।

राजनीति की पिच पर विपक्ष में रहते हुए भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अरुण जेटली ने फुल टॉस को हमेशा बाउंड्री के बाहर भेजा है।

शाह ने कहा कि जेटली ने अपने लेखों में ग्रामीण भारत की आवाज को अभिव्यक्त किया है जबकि वे एक संपन्न पृष्ठभूमि से आते हैं और वह लुटियन दिल्ली में पले बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि जेटली ने मीडिया की भी आलोचना की है जबकि उन्हें मीडिया का दुलारा माना जाता है।

वित्त मंत्री के रूप में उनके काम की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार की जीएसटी विधेयक एवं आय घोषणा योजना की दो उपलब्धियों को आगे बढ़ाने में जेटली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। भाजपा अध्यक्ष ने पारदर्शी एवं मूल्य आधारित राजनीति के लिए उनकी सराहना करते हुए कहा, ‘‘आजादी के बाद जब सार्वजनिक जीवन में मूल्यों में गिरावट आने लगी तो कुछ लोगों ने उन्हें स्थापित करने के लिए सतत संघर्ष किया। पार्टी संबद्धताओं को छोड़ यदि ऐसे नेताओं की एक सूची तय की जाए तो जेटली का नाम उनमें शामिल होगा। ’’ उन्होंने कहा कि आज जो केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की बहुमत की सरकार है, उसकी नींव डालने में अरुण जेटली, सुषमा स्वराज के संघर्ष का भी महत्त्वपूर्ण योगदान है। आजादी के बाद पारदर्शी और मूल्य आधारित राजनीति करने वाले नेताओं की जब बात होगी तो दलगत राजनीति से परे ऐसे नेताओं में अरूण जेटली का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा, कि जेटली ने हमेशा सार्वजनिक जीवन को नई उंचाइयों पर ले जाने और भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ प्रखररूप से संघर्ष करने के लिए काम किया।

प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में जेटली के आलेखों और ब्लाग आदि को संकलित किया गया है।

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