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रेस्टोरेंट में खाओ, बिल पर छूट पाओ और 'रेस्सी' के गुण गाओ

पुणें के रहने वाले दो युवाओं सागर और कौस्तुभ के दिमाग की उपज है एप्लीकेशनउपयोगकर्ता को रेस्टोरेंट की ओर से मिलने वाली छूट के बारे में जानकारी मुहैया करवाती एप्पअभी सिर्फ पुणें में दे रहे हैं सेवाएं , फिलहाल 40 रेस्टोरेंट के साथ है करारजल्द ही 11 शहरों के 500 रेस्टोरेंट और 10 लाख उपभोक्ताओं को सेवा देने का है भरोसा

रेस्टोरेंट में खाओ, बिल पर छूट पाओ और 'रेस्सी' के गुण गाओ

Sunday April 26, 2015 , 5 min Read

रेस्टोरेंट में खाना आज न तो आम लोगों की पहुंच से दूर है और न ही अनावश्यक महंगा। ऐसे में अगर आप को अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट में आने वाले बिल में रियायत मिल जाए तो इससे अच्छा क्या हो सकता है। होटलों में बुकिंग करवाने पर छूट दिलवाने वाली एप्प ‘होटलटुनाइट’ के उपयोगकर्ता लगातार रेस्टोरेंट के क्षेत्र में भी ऐसी ही एप्लीकेशन का इंतजार कर रहे थे और उनकी इस उम्मीद को पूरा करने का बीड़ा उठाया पुणे में रहने वाले दो युवाओं ने और नाम रखा ‘रेस्सी।’

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‘रेस्सी’ एक ऐसी एप्लीकेशन है जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता अपने आस-पास स्थित भोजनालयों के बारे में जानकारी पाने के अलावा वहां खाने पर आने वाले बिल में छूट भी पाते हैं। इस एप्प के दोनों संस्थापक, सागर पाटिल और कौस्तुभ राजपंढेरे 15 साल से एक दूसरे को जानते हैं और यह इन दोनों का पहला सामूहिक प्रयास है।

खाद्य और पेय उद्योग कौस्तुभ के लिये नया नहीं है। उन्होंने अपने जीवन के कीमती 6 साल इसी क्षेत्र की टाईनीआउल, ग्रुपआॅन और डील्सएण्डयूडाॅटकाॅम जैसी कंपनियों में सेल्स और मार्केटिंग करते हुए बिताए हैं। इसके उलट सागर हमेशा से ही एक तकनीकी विशेषज्ञ रहे और उन्होंने 2009 में ‘मास्टरवक्र्स’ के नाम से अपनी एक सफल मीडिया एजेंसी खोली जिसे 2013 में मल्टिया नामक अंर्तराष्ट्रीय एजेंसी ने अधिगृहित कर लिया।कौस्तुभ कहते हैं कि, ‘‘इस क्षेत्र में अपने कार्यकाल के लंबे समय में मैंने देखा कि रेस्टोरेंट जिस सबसे बड़ी समस्या से दो चार होते हैं वह है अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग न करना और हम इस समस्या को सुलझाने की दिशा में कुछ नया करना चाहते थे।’’ रेस्सी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार अधिकतर रेस्टोरेंट हर हफ्ते अपनी क्षमता के सापेक्ष 60 से 70 प्रतिशत उपभाक्ताओं को ही भोजन परोस पाते हैं जिसका सीधा मतलब प्रतिदिन 40 से 50 फीसदी की हानि होती है। क्योंकि अधिकतर रेस्टोरेंट में रसोई में इस्तेमाल होने वाले सामान को पहले से ही खरीद लिया जाता है इसलिये खाने पर 50 फीसदी की रियायत की पेशकश उनकी इस हानि को लाभ में बदल देती है।

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इन युवाओं ने रेस्टोरेंट व्यवसाय में होने वाले इस नुकसान को लाभ में बदलने की सोची और ‘रेस्सी’ को अवधारणा से हकीकत में बदला। सागर कहते हैं कि, ‘‘हमारा लक्ष्य रेस्टोरेंट मालिकों को उनकी क्षमता के बेहतर प्रबंधन का मौका देने के साथ ही उन्हें अंतिम क्षणों में उपभोक्ताओं तक इस रियायत की जानकारी पहुंचाने में मदद करना था।’’


‘रेस्सी’ की मदद से रेस्टोरेंट मालिक अपने आसपास के क्षेत्र के उपभोक्ताओं तक उन्हें दी जाने वाली रियायत और अन्य प्रस्तावों को पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा रेस्टोरेंट मालिक डिस्काउंट टेम्पलेट्स की सहायता से उपभोक्ताओं को ऑफिस वाले दिनों और सप्ताहांत में या नाश्ते, दोपहर के खाने या रात के खाने में दिये जानी वाली छूट की जानकारी भी दे सकते हैं। साथ ही मालिक कई अन्य विकल्पों की सहायता से उपभोक्ताओं तक अन्य कई जानकारियां पहुंचा सकते हैं।

‘रेस्सी’ के उपभोक्ता मुख्यतः दो तरह की विशेषताओं का लाभ उठा रहे हैं। पहला, ‘ज़ोमेटो एपीआई’ नामक फीचर का प्रयोग करने वाले उपभोक्ता एक विशिष्ट क्षेत्र में स्थित रेस्टोरेंट को खोज सकते हैं। दूसरा, उन्हें आसपास के सिर्फ उन्हीं रेस्टोरेंट के बारे में जानकारी साझा करता है जो 15 से 60 प्रतिशत तक की रियायत दे रहे हों।

फिलहाल ‘रेस्सी’ का पुणें के कल्याणी नगर, कोरेगांव पार्क और विमान नगर जैसे संभ्रांत इलाकों में स्थित 40 रेस्टोरेंट के साथ करार हुआ है और इन इलाकों के निवासी इस एप्लीकेशन की सहायता से खाने पर छूट का लाभ उठा रहे हैं। कौस्तुभ बताते हैं कि, ‘‘इसके अलावा हमने उपभोक्ताओं को उनके आस-पास के प्रमुख रेस्टोरेंट तक पहुंचने में मदद करने के लिये देश की प्रमुख टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनी उबेर के साथ भी एक करार किया है, जो अपने नजदीकी रेस्टोरेंट तक आसानी से पहुंच सकते हैं।’’

खाने के बिल में रियायत के अलावा ये अपने उपभोक्ताओं को और भी बहुत सुविधाएं दे रहे हैं। इनके उपभोक्ताओं को हर एक हजार रुपये का बिल देने पर 50 रुपये रेस्सी अंक के रूप में दिये जाते हैं जिसकी सहायता से वे फ्लिपकार्ट पर खरीददारी करने के साथ-साथ बुकमाइशो पर मूवी के टिकट खरीदने के अलावा अपने फोन के बिल का भुगतान भी सकते हैं।

भारत में खाने-पीने का कारोबार तेजी से फैल रहा है और वर्तमान में यह करीब 48 हजार करोड़ से अधिक का बाजार है। तेजी से पंख फैलते इस कारोबार में फिलहाल ‘जोमाटो’ उपभोक्ताओं को नजदीकी रेस्टोरेंट खोजने में मदद करने में अव्वल है और ‘फूडपांडा’ उनके घरों तक खाना पहुंचाने के काम में सबसे आगे है। सागर का कहना है कि, ‘‘इस क्षेत्र में और भी कई बड़े खिलाड़ी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं लेकिन कोई भी अपने उपभोक्ताओं को अंतिम क्षणों में रियायत दिलवाने पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाया है।’’

एण्ड्राॅइड फोन के उपयोगकर्ता इस एप्प के प्ले स्टोर से मुफ्त में डाउनलोड कर इसका लाभ उठा सकते हैं और अपने आसपास के इलाकों के रेस्टोरेंट के बारे में जानकारी पा सकते हैं। इसके अलावा इस एप्प को बैंगलोर में लेसवेंचर के सहयोग से आयोजित हुई लेट्सइग्नाइट स्टार्ट-अप प्रतियोगिता के लिये चयनित किया गया जहां इसे खूब सराहा गया। ‘रेस्सी’ का लक्ष्य सितंबर 2015 के अंत तक 500 से अधिक रेस्टोरेंट और 40 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ने का है। अभी सिर्फ पुणें के निवासियों को सेवाएं दे रही इस एप्प का विस्तार आगामी 18 महीनों में 11 शहरों तक करने का विचार चल रहा है। इस विस्तार के बाद 10 लाख से अधिक उपभोक्ता और 5 हजार से अधिक रेस्टोरेंट वाली यह देश की इकलौती एप्लीकेशन होगी।