कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक, पाक पस्त! भारत मस्त!

By प्रणय विक्रम सिंह
May 18, 2017, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:16:30 GMT+0000
कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक, पाक पस्त! भारत मस्त!
वैश्विक मोर्चे पर भारत को पाक पर मिली एक और विजय। कुलभूषण जाधव मामले में अतरराष्ट्रीय कोर्ट (आईसीजे) ने जाधव की फांसी पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा कर अंतरिम राहत प्रदान कर दी है।
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पाकिस्तान ने सरबजीत के साथ क्या किया यह सब जानते हैं। ऐसे में इस बात की भी आशंका है कि पाकिस्तानी अदालत हालिया फैसले को दरकिनार करते हुए कुलभूषण जाधव को फांसी दे सकता है। जाधव मामले पर पाकिस्तान के बार-बार बदलते रुख से जहां संदेह पैदा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ ये भी है कि अगर वो आईसीजे का फैसला नहीं मानता है, तो वो ऐसा पहला देश नहीं होगा जो अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को मानने से इंकार करेगा। 

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पाकिस्तान की नीयत को देखने के बाद कुछ भी साफ तौर पर कहना मुश्किल है। हालांकि कोर्ट ने ये चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान अदालत के फैसले को नहीं मानता है, तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

11 जजों की बैंच के सदस्य जस्टिस रॉनी ने फैसला सुनाते हुए कहा, कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आता तब तक फांसी पर रोक लगी रहेगी। इंटरनेशनल कोर्ट के इस फैसले को फिलहाल कुलभूषण जाधव के लिए अंतरिम राहत माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान ने सरबजीत के साथ क्या किया ये सब जानते हैं। ऐसे में इस बात की भी आशंका है कि पाकिस्तान अदालत के फैसले को दरकिनार करते हुए जाधव को फांसी दे सकता है। जाधव मामले पर पाकिस्तान के बार-बार बदलते रुख से जहां संदेह पैदा हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ यह भी है कि अगर वह आईसीजे का फैसला नहीं भी मानता, तो वो एक मात्र ऐसा देश नहीं होगा जो अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को मानने से इंकार करेगा। दक्षिण चीन सागर विवाद पर चीन को आईसीजे से झटका लगा था। लेकिन, चीन ने अंतरराष्ट्रीय अदालत की तरफ से दक्षिण चीन सागर पर दिए फैसले को मानने से साफ इंकार कर दिया। इतना ही नहीं, खुलेआम चीन ने अपने बाहुबल का प्रयोग करते हुए साफ कर दिया, कि उसकी नजर में अंतरराष्ट्रीय अदालत के इस फैसले की कोई अहमियत नहीं है, क्योंकि दक्षिण चीन सागर पर सिर्फ उसका ही एकाधिकार है। ऐसे में सवाल उठता है कि पाकिस्तान भी अगर चीन की तरफ अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को ठेंगा दिखाता है, तो फिर क्या होगा?

जानकारों की मानें तो पाकिस्तान की नीयत को देखने के बाद कुछ भी साफ तौर पर कहना मुश्किल है। हालांकि कोर्ट ने ये चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान अदालत के फैसले को नहीं मानता है, तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

दीगर है कि इससे पहले भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश आज से करीब 18 साल पहले संयुक्त राष्ट्र की इस न्यायिक अदालत के आमने-सामने आए थे। वो घटना 1999 की थी जब पाकिस्तान ने उसके नौसैनिक विमान को मार गिराये जाने के मामले में हस्तक्षेप का अंतरराष्ट्रीय अदालत से आग्रह किया था। मामले की सुनवाई नीदरलैंड (हॉलैंड) के शहर हेग में स्थित पीस पैलेस के ग्रेट हॉल ऑफ जस्टिस में हुई।

गौरतलब है कि कुलभूषण जाधव के मामले में भारत सरकार की सक्रियता काबिले जिक्र और काबिले फक्र है। ध्यातव्य है कि जाधव को फांसी की सजा देने के पाकिस्तान के फैसले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि अगर पाकिस्तान ने जाधव को सुनाई फांसी की सजा पर अमल किया, तो भारत इसे पूर्व नियोजित हत्या मानेगा। उन्होंने ये भी कहा था कि जाधव भारत का बेटा है और उसे बचाने के लिए अगर आउट ऑफ द वे जाने की जरूरत पड़ेगी तो सरकार जाएगी ताकि उस भारत के निर्देष बेटे की जान बचाई जा सके। यही बात देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं, कि जाधव की जान बचाने के लिए जो कुछ भी करना होगा किया जाएगा। इस मामले पर रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड मेजर जनरल राज कादयन का कहना है कि सरकार पाकिस्तान को यह पहले बता चुका है कि जाधव को अगर फांसी दी जाती है तो वह उसे 'वॉर क्राइम' मानेंगे।

सवाल उठता है कि आखिर जाधव मामले को भारत इतनी गंभीरता के साथ शुरू से उठा रहा है जबकि इससे पूर्ववर्ती सरकारों ने इतनी सक्रियता बाकी मामलों में क्यों नहीं दिखाई? यह सवाल उठना लाजिमी है। एक निजी टेलीविजन चैनल की तरफ से जब हरीश साल्वे से पूछा गया कि जाधव मामले पर सरकार किनारे हो गई थी ऐसे में सरकार के उठाए गए कदम को वह किस तरह से देखते हैं, इसके जवाब में साल्वे ने कहा कि वह पिछले तीन साल से इस सरकार के साथ काम कर रहे हैं लेकिन ऐसी सक्रियता उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा, कि इसके लिए सबसे पहले सरकार का शुक्रिया करना चाहेंगे। सवाल ये भी उठता है कि जिस तरह से भारत सरकार ने जाधव मामले में इतनी सक्रियता दिखाई वैसा सौरभ कालिया और सरबजीत जैसे अन्य मामलों में क्यों नहीं दिखा?

शायद सौरभ कालिया मामले में भारत की सक्रियता नहीं दिखाने के पीछे सबसे बड़ी वजह ये रही होगी कि कालिया जीवित नहीं थे। किंतु यदि जाधव केस की भांति पूर्व में भी अन्य मामलों में भी सक्रिय होती तो आज तस्वीर कुछ जुदा जरूर होती।