ई-श्रम और AI की जुगलबंदी से कैसे बदली 30 करोड़ मजदूरों की किस्मत, जानिए...
भारत का ई-श्रम और NCS प्लेटफॉर्म AI की मदद से 30 करोड़ असंगठित श्रमिकों को रोजगार, कौशल और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ रहा है. डिजिटल पहचान, स्किल गैप विश्लेषण और AI-समर्थित टूल्स से मजदूरों को बेहतर नौकरियों और सुरक्षित भविष्य की नई राह मिल रही है.
भारत में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों श्रमिक अब टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI की मदद से बेहतर नौकरी और सामाजिक सुरक्षा के अवसर पा रहे हैं. कुछ साल पहले तक जिनके पास न औपचारिक रोजगार था और न ही कोई सुरक्षा कवच, वही श्रमिक आज डिजिटल पहचान और AI टूल्स की मदद से अपनी जिंदगी को बेहतर दिशा दे रहे हैं. नई दिल्ली के राहुल कुमार भी ऐसे ही उदाहरण हैं.
पांच साल पहले राहुल कुमार नई दिल्ली के एक कॉस्मेटिक्स वेयरहाउस में इन्वेंटरी चेकर थे. यहां उनका काम लिपस्टिक और आईलाइनर जैसे आइटम्स का मिलान करना और उस हिसाब से कागज पर लिखी सूची में निशान लगाना था.
आज एक ड्राइवर के तौर पर काम करते हुए वह पहले की तुलना में डेढ़ गुना ज्यादा कमा रहे हैं. उम्मीद है कि अगले साल तक बेसिक कंप्यूटर कोर्स पूरा करने के बाद वह खुद से स्प्रेडशीट्स बनाना सीख जाएंगे और उनकी आय अब से भी बेहतर हो जाएगी.
दोस्तों से मिली सलाह और ई-श्रम कार्ड के 12 अंकों वाले यूनिवर्सल अकाउंट नंबर ने उनके सामने रोजगार के इन नए अवसरों को खोला.
ई-श्रम भारत में अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों का बड़ा डाटाबेस है, जिसे नेशनल कैरियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल से इंटीग्रेट किया गया है. दोनों ही प्लटफॉर्म को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है और दोनों माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आधारित हैं.
मंत्रालय अब इन अनौपचारिक श्रमिकों को माइक्रोसॉफ्ट की एज्यूर ओपनएआई सर्विस से चलने वाले एनसीएस पर जेनरेटिव एआई टूल्स का इस्तेमाल करके रेगुलेटेड वर्किंग कंडीशन (काम की विनियमित परिस्थितियों) और सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) तक पहुंच वाली नौकरियों की ओर ले जा रहा है.
कुमार बाताते हैं, “मेरे दोस्तों ने मुझे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कहा, क्योंकि ड्राइवर बनकर मैं ज्यादा कमा सकता हूं. उसके बाद मैंने ई-श्रम कार्ड के लिए पंजीकरण किया और अपना काम ड्राइवर बताया. दो से तीन दिन के अंदर मुझे एक कंपनी से कॉल आ गया, जो कारें चलवाती है.”
हालांकि हाई स्कूल तक पढ़ाई किए हुए और नई दिल्ली से लगभग 20 मील (32 किलोमीटर) पूरब में स्थित गाजियाबाद में रहने वाले 25 वर्षीय कुमार का सफर अभी पूरा नहीं हुआ है.
एक बार जब उन्हें कंप्यूटिंग सर्टिफिकेट मिल जाएगा, तब वह एनसीएस में अपनी जॉब सर्च में डाटा एंट्री स्किल भी अपडेट कर देंगे.
कुमार ने कहा, “मेरा दोस्त दिन में एक फार्मेसी में स्टॉक और डाटा एंट्री मैनेज करता है और रात में ड्राइवर का काम करता है. मैं भी ऐसा करके अपनी कमाई को दोगुना कर सकता हूं.”
कुमार का यह सफर दिखाता है कि कैसे ई-श्रम, एक श्रमिक रजिस्ट्री से आगे बढ़ते हुए नौकरी पाने का माध्यम बन गया है. यह श्रमिकों को औपचारिक सेक्टर में शिफ्ट होने में भी मदद करता है, जिसमें एआई क्षमताओं से रास्ता बन रहा है.
एनसीएस पर रजिस्टर्ड श्रमिक ‘स्किल्स गैप एनालिसिस’ टूल का इस्तेमाल करके देख सकते हैं कि उनके लिए कहां बेहतर नौकरी का मौका है. साथ ही वे इस पर उपलब्ध रोडमैप मैनेजर की मदद से करियर की आगे की राह के लिए योजना भी बना सकते हैं. उन्हें माइक्रोसॉफ्ट की एज्यूर ओपनएआई सर्विस के रिज्यूम जनरेटर से अपना रिज्यूम बनाने में भी मदद मिलती है. यही नहीं, एक मॉक इंटरव्यू फंक्शन पर भी काम चल रहा है, जिससे आवेदकों को तैयारी करने में मदद मिले.
डॉ. मनसुख मंडाविया, जो भारत सरकार में श्रम एवं रोजगार और युवा मामलों एवं खेल मंत्री हैं, ने कहा, “भारत ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. 2015 में जहां इसकी कवरेज 19% थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 64.3% हो गई है, जिससे 94 करोड़ से अधिक नागरिकों को लाभ मिला है. ई-श्रम और नेशनल करियर सर्विस (NCS) जैसे प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल कर हम सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत बना रहे हैं और 100 करोड़ नागरिकों तक इसकी पहुंच के अपने लक्ष्य के करीब पहुंच रहे हैं. हम AI-प्राथमिकता वाले भविष्य के प्रति माइक्रोसॉफ्ट की प्रतिबद्धता और भारत में सामाजिक सुरक्षा को बेहतर बनाने में उसके योगदान का स्वागत करते हैं. साथ ही, माइक्रोसॉफ्ट द्वारा अपने व्यापक साझेदार और ग्राहक नेटवर्क को NCS पोर्टल पर नौकरी प्रदाता या भागीदार के रूप में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना, भारत के साथ उसके संबंधों को मजबूत करने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने की उसकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.”
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की रोजगार उप महानिदेशक अंजली रावत कहती हैं, “एआई से हमारे कामगारों को औपचारिक सेक्टर का हिस्सा बनने में मदद मिल रही है.”
सामाजिक सुरक्षा के लिए डाटाबेस
देश के लगभग 40 करोड़ अनौपचारिक कामगारों को पंजीकृत करने के लिए अगस्त, 2021 में ई-श्रम को लॉन्च किया गया था, ताकि उन्हें सामाजिक कल्याण की योजनाओं का लाभ मिल सके. इनमें कई ऐसे सड़क पर झाड़ू लगाने वाले, घरेलू काम करने वाले और दिहाड़ी मजदूर शामिल थे, जिन्होंने कोविड महामारी के दौरान शहरों में अपनी नौकरी खो दी थी और उन्हें अपने गांव लौटना पड़ा था.
रावत ने कहा, “हमारे पास इनका कोई डाटा नहीं था, इसलिए हमें नहीं पता था कि इनमें से कितने लोग सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं. हमारे पास यह पता लगाने का भी विकल्प नहीं था कि असल में कितने लोग अनौपचारिक सेक्टर से औपचारिक सेक्टर में जा सकते हैं. इसीलिए पहला कदम था यह डाटाबेस बनाना.”
यह बहुत बड़ा काम था.
भारत में असंगठित श्रमिक यानी इनफॉर्मल वर्कर उसे कहा जाता है, जिसे किसी औपचारिक अनुबंध, रेगुलेटेड वर्किंग कंडीशन या पेंशन स्कीम व हेल्थ इंश्योरेंस जैसे सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभों के बिना काम पर रखा जाता है. इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024 के अनुसार देश के कार्यबल में ऐसे लोगों का हिस्सा करीब 82 प्रतिशत है.
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर में सीनियर डायरेक्टर (आईटी) मनोज कुमार सक्सेना को महीनेभर के भीतर ई-श्रम प्लेटफॉर्म शुरू करने का काम सौंपा गया था. इस राह में उनके सामने कई चुनौतियां थीं.
सक्सेना बताते हैं, “सरकार ऐसे लोगों का ध्यान रखना चाहती थी, जिन्होंने अचानक नौकरी खो दी थी. सरकार ने सोचा कि इनकी डिजिटल पहचान बनाने और सामाजिक कल्याण की योजनाओं के फायदे इन्हें देने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाना चाहिए.”
उनकी टीम को आधार नंबर और मोबाइल नंबर की मदद से नाम, जन्मतिथि, लिंग एवं पते जैसी बेसिक जानकारी जुटाने और उसे वेरिफाई करने का सबसे बेहतर तरीका पता लगाना था. उन्हें यह भी सुनिश्चित करना था कि ई-श्रम सिस्टम पर करोड़ों कामगारों का पंजीकरण हो सके और उनकी निजी जानकारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो.
क्लाउड प्लेटफॉर्म के चयन पर सक्सेना ने बताया, “हम स्केलेबिलिटी (विस्तार के योग्य), रिलायबिलिटी (विश्वसनीयता) और सिक्योरिटी (सुरक्षा) चाहते थे. इसीलिए हम इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा एक्रेडिटेड हाइपरस्केल क्लाउड व्यवस्थाएं खंगाल रहे थे. इसीलिए हमने माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर को चुना.”
उन्होंने बताया कि अपने पीक समय में ई-श्रम पर हर सेकेंड में 1,72,000 ट्रांजैक्शन को प्रोसेस किया जा रहा था और एक दिन में 80 लाख तक पंजीकरण किए जा रहे थे.
एज्यूर कुबरनेट्स सर्विस, एज्यूर वीएम स्केल सेट्स और एज्यूर कॉसमॉस डीबी जैसे टूल्स ने इस प्लेटफॉर्म को कम लेटेंसी (न्यूनतम देरी) के साथ इतने ज्यादा वॉल्यूम को संभालने में सक्षम बनाया.
माइक्रोसॉफ्ट डिफेंडर फॉर क्लाउड, एज्यूर फायरवॉल और एज्यूर फ्रंट डोर के साथ मिलकर माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर की इन-बिल्ट एनक्रिप्शन क्षमता ने इस प्लेटफॉर्म और इसके डाटा की सुरक्षा में मदद की.
इस प्रक्रिया में 40 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत और ज्यादा टेक्नोलॉजी की जरूरत पड़ी. इन कामगारों में कई घुमक्कड़ी और कम पढ़े-लिखे हैं.
इस प्रक्रिया में देशभर में फैले 4,50,000 से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी ने सबसे अहम भूमिका निभाई. इन्हें अंतिम छोर पर डिजिटल सर्विस देने के लिए स्थापित किया गया था. इन केंद्रों पर कामगारों को अपना पंजीकरण पूरा करने के लिए अपना नाम, आधार नंबर, अपनी पढ़ाई-लिखाई और योग्यता जैसी जानकारियां डालने में मदद की जाती है.
सरकार के एआई-पावर्ड लैंग्वेज प्लेटफॉर्म भाषिणी के इंटीग्रेशन से ई-श्रम पर फोन या कंप्यूटर से पंजीकरण करना आसान हो गया है. इसे माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर पर होस्ट किया गया है और यह 22 स्थानीय भाषाओं में तुरंत अनुवाद उपलब्ध कराता है.
एक बार पंजीकरण होने के बाद श्रमिका आसानी से देख सकते हैं कि वे कौन सी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पाने के पात्र हैं. ई-श्रम के डाटाबेस में 31 करोड़ से ज्यादा श्रमिक हैं और यह प्लेटफॉर्म दुर्घटना बीमा, सार्वजनिक आवास मेडिकल सब्सिडी और खेती के लिए अनुदान जैसी मदद देने वाली 18 कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ा है. आईएलओ के अनुसार, इस प्रयास ने भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने में मदद की. यह कवरेज 2019 के 24 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64 प्रतिशत हो गई.

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के सीनियर डायरेक्टर (आईटी) मनोज कुमार सक्सेना (Left) और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में रोजगार उप महानिदेशक अंजली रावत (Right)
औपचारिक सेक्टर की ओर बढ़ते कदम
असंगठित श्रमिकों को ई-श्रम पर पंजीकरण करने के लिए मार्गदर्शन देने के बाद श्रम मंत्रालय अब उनके लिए बेहतर रोजगार को लक्ष्य बनाकर काम कर रहा है.
2022 में भारत के राष्ट्रीय रोजगार प्लेटफॉर्म एनसीएस को ई-श्रम प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट किया गया. इससे अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को देशभर के रोजगार एवं नियोक्ताओं तक पहुंच मिली. यहां उन्हें करियर काउंसिलिंग और ट्रेनिंग कोर्स भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उन्हें औपचारिक क्षेत्र में काम पाने में मदद मिलती है. इस सेक्टर में उन्हें स्वास्थ्य बीमा या सरकार के कर्मचारी प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन के जरिये रिटायरमेंट सेविंग्स जैसे लाभ मिलते हैं.
अब तक, ई-श्रम पर पंजीकृत करीब 1.78 करोड़ कामगार एनसीएस पर साइन इन कर चुके हैं. एनसीएस के पोर्टल पर खुद लगभग 15 करोड़ लोग पंजीकृत हैं.
रावत ने बताया, “उन्हें औपचारिक सेक्टर की ओर ले जाना अगला एक्शन प्लान था.”
उन्होंने अन्य फीचर्स के बारे में भी बताया जिन्हें मंत्रालय इन प्लेटफॉर्म्स पर शुरू करने की योजना बना रहा है. इसमें ई-श्रम पर रजिस्टर करने वाले या एनसीएस पर अपना रिज्यूम बनाने वाले कामगारों का मार्गदर्शन करने के लिए एआई चैटबॉट और मोबाइल एप पर लोकेशन मैनेजर जैसे विकल्प शामिल हैं, ताकि कामगार अपने आसपास नौकरी ढूंढ सकें. इन तरीकों से जरूरतमंद लोगों को नौकरी खोजने में आसानी होगी.
रावत ने बताया, “बड़े पोर्टल आम तौर पर टियर-1 शहरों को टारगेट करते हैं, जबकि हम टियर 2 और टियर 3 शहरों को टारगेट करने की कोशिश कर रहे हैं.”
इन सभी फीचर्स ने राहुल कुमार जैसे श्रमिकों की योजनाओं को तेज करने में मदद की है.
उन्होंने कहा, “मुझे जिंदगी में बहुत कुछ करना है. मुझे अपना करियर आगे बढ़ाना है और अपनी कमाई बढ़ानी है. मैं पढ़ाई भी करना चाहता हूँ.”
भविष्य की योजनाएं
ई-श्रम और एनसीएस देश में करियर एवं नौकरी से जुड़े सभी सवालों के लिए “वन-स्टॉप सॉल्यूशन” बन रहे हैं. इन्हें लेकर आगे और भी बड़ी योजनाएं हैं.
रावत ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म से मिलने वाले डाटा से लेबर पॉलिसी (श्रम नीति) से जुड़ी जानकारी मिल सकती है, जिससे देश को भविष्य में नौकरियों के लिए स्किल सेट (कौशल) और ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) का मिलान करने में मदद मिल सकती है. जर्मनी में प्लंबर की कमी के उदाहरण के माध्यम से वह इसे समझाती हैं.
उन्होंने कहा, “मान लीजिए हमें अपने प्लंबर को भारत से जर्मनी भेजना है. ऐसे में हमें पता होना चाहिए कि वहां उन्हें किस तरह के कौशल की जरूरत होगी. इसे समझकर हम उन्हें वह कौशल दे सकते हैं. एक बार जब इन असंगठित श्रमिकों को वह कौशल मिल जाता है, तो वे विदेश में वह काम पाने के लायक हो जाते हैं.”
रावत को यह भी उम्मीद है कि इस प्लेटफॉर्म की मदद से बेईमान जॉब ब्रोकर्स को भी खत्म करने में मदद मिलेगी. इससे भारत के कामगारों को देश एवं विदेश में सुरक्षित तरीके से भर्ती किया जा सकेगा और काम पर रखा जा सकेगा. विदेश में काम करने वाले कामगारों के लिए विदेश मंत्रालय ई-माइग्रेट पोर्टल जैसे अपने डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करता है.
उन्होंने कहा, “ई-श्रम प्लेटफॉर्म ई-माइग्रेट पोर्टल के साथ इंटीग्रेटेड है. साथ ही हमारे पास रजिस्टर्ड एजेंसियां हैं, जो सही लोगों को विदेश भेजने के लिए काम करती हैं.”
दूसरे देशों में ई-श्रम और एनसीएस को डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल पब्लिक गुड्स के तौर पर ऑफर करने की भी योजना है.
जून, 2025 में हुए इंटरनेशनल लेबर कॉन्फ्रेंस का उल्लेख करते हुए रावत ने कहा, “हमने जिनेवा में अपने दोनों पोर्टल प्रदर्शित किए और कई देशों ने इनकी तारीफ की. देश शानदार काम कर रहा है.”
(feature image: AI generated)




