केवल महिला उद्यमियों के स्टार्टअप में निवेश करने के लिए मायडाला की संस्थापक अनिशा सिंह ने शुरू किया निवेश फंड

By Sindhu Kashyaap
January 27, 2020, Updated on : Mon Jan 27 2020 09:31:30 GMT+0000
केवल महिला उद्यमियों के स्टार्टअप में निवेश करने के लिए मायडाला की संस्थापक अनिशा सिंह ने शुरू किया निवेश फंड
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पिछले कुछ वर्षों से, मर्चेंट मार्केटिंग प्लेटफॉर्म मायडाला (MyDala) की संस्थापक, अनीशा सिंह, महिला उद्यमियों के लिए एक ध्वजवाहक और चैंपियन रही हैं। महिलाओं को सी-सूट चुनने और अधिक नेतृत्व वाली भूमिकाएं लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहीं और सलाह दे रहीं अनीशा ने अब एक महिला केंद्रित निवेश फंड - शी कैपिटल (She Capital) शुरू करने की घोषणा की है।


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वर्तमान में सेक्टर एग्नोस्टिक, शी कैपिटल ऐसे स्टार्टअप्स में निवेश करने पर केंद्रित है जिसमें महिला या तो संस्थापक हो या सह-संस्थापक टीम का हिस्सा हो। फंड शुरुआती स्तर के स्टार्टअप में निवेश करने पर फोकस्ड है और इसका कुल कोष लगभग 200 करोड़ रुपये है। फंड के लिमिटेड पार्टनर्स (एलपी) में संस्थागत फंड और फैमिली ऑफिस शामिल हैं।


एक महिला-फोकस्ड फंड

शी कैपिटल के बारे में बोलते हुए, अनीशा कहती हैं:

“हम अलग-अलग राउंड्स में स्टार्टअप में भी सह-निवेश करेंगे। फंड किसी भी अन्य निवेश फर्म की तरह काम करेगा और निवेश थीसिस को फॉलो करेगा।”


खुद एक उपभोक्ता तकनीक की संस्थापक, अनिशा कहती हैं कि उपभोक्ता तकनीक एक ऐसा क्षेत्र होगा जिसे वे बारीकी से देखेंगी।


सवाल उठता है कि एक महिला-फोकस्ड इनवेस्टमेंट फंड ही क्यों? इस पर अनीशा बताती हैं कि इस आइडिया का जन्म कुछ साल पहले हुआ था। वे बताती हैं,

“पुरुषों और महिलाओं के बीच 170 साल का लैंगिक अंतर है, और यह सिर्फ नौकरियों या वेतन के मामले में नहीं है। अंतर पूरे बोर्ड में है।”


अनीशा बताती हैं कि कई पैनल का हिस्सा होने और महिला उद्यमियों से बातचीत और उन्हें पुश करने के बाद, उन्हें लगा कि उन्हें जमीन पर कुछ करने की जरूरत है। वे कहती हैं,

“पैनल पर बैठना और बातचीत करना एकमात्र तरीका नहीं है। मैंने गहराई से महसूस किया कि मुझे भारत में महिला उद्यमियों के लिए वास्तव में कुछ करने की आवश्यकता है, कुछ ऐसा जो इन नंबर्स को बदले। मुझे बड़े पैमाने पर कुछ करने की जरूरत थी।"


हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू रिपोर्ट, जिसमें बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) द्वारा एक विश्लेषण का हवाला दिया गया है, यह दर्शाता है कि यदि पुरुष और महिला दोनों ने उद्यमियों के रूप में समान रूप से भाग लिया, तो वैश्विक जीडीपी मौजूदा तीन प्रतिशत से बढ़कर छह प्रतिशत हो जाएगी।


लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं द्वारा स्थापित या सह-स्थापित की गई कंपनियों में निवेश 935,000 डॉलर है, जो उनके पुरुष समकक्षों में निवेश किए गए 2.1 मिलियन डॉलर के औसत से आधे से भी कम है। आश्चर्यजनक रूप से, यह असमानता महिलाओं के नेतृत्व वाली फर्मों द्वारा समय के साथ बेहतर प्रदर्शन करने, पांच साल की अवधि में 10 प्रतिशत अधिक संचयी राजस्व उत्पन्न करने के बावजूद मौजूद है।


इन सभी अध्ययनों और रिपोर्टों ने अनीशा को इस स्पेस में कुछ करने के लिए प्रेरित किया। क्लिंटन एडमिनिस्ट्रेशन के लिए काम करने और वैली में महिला उद्यमियों की मदद करने के बाद, अनिशा को लगा कि भारत में महिला उद्यमियों के लिए कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने पेशेवर सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक पोस्ट डाली जिसमें महिला उद्यमियों से पूछा गया कि उन्हें किस तरह की मदद और संसाधनों की ज़रूरत है? यह 2017 था जब उन्होंने ये सब किया। 


उन्होंने पूछा:

"क्या महिला उद्यमी खुलकर बता सकती हैं, मैं हर किसी से सुनना चाहती हूं और क्या पर्याप्त महिला उद्यमी हैं भी?" "सच कहूं तो मैं इससे पहले कभी भी लिंक्डइन पर नहीं गई थी। मेरी उस एक पोस्ट पर दस लाख से ज्यादा व्यूज थे। हर किसी ने यह पूछते हुए लिखा कि क्या मैं कुछ कर रही हूं, और तब मैंने महसूस किया कि हमारी जान पहचान के अलावा और भी कई महिला उद्यमी थीं, लेकिन उनकी तरफ वो प्रतिनिधित्व बहुत कम था।"


वह कहती हैं कि उन्हें मुझे आशा है कि अगले यूनिकॉर्न संस्थापक विजया शेखर शर्मा हैं।


क्या महिलाओं के नेतृत्व वाले फंड से मदद मिलती है?

यह समझा जाता है कि महिलाओं के नेतृत्व वाली फर्मों में अधिक निवेश की आवश्यकता है, तो क्या मौजूदा फंड भी ऐसा नहीं कर सकते हैं? जैसा कि एक निवेश फर्म का मुख्य उद्देश्य अपने एलपी में रिटर्न देना भी है। अन्य फंड जैसे साहा फंड भी हैं, जो 2015 में अंकिता वशिष्ठ द्वारा स्थापित किया गया था।


अनीशा कहती हैं,

“यह आइडिया महिलाओं द्वारा महिलाओं में निवेश करने और एक साथ ज्यादा ग्रोथ वाली कंपनियों के निर्माण के बारे में भी है। ऐसा नहीं है कि हर कंपनी को फंड मिल ही जाएगा। यह आइडिया एक निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ टेबल के दोनों किनारों को समझने के लिए है।"


कमल हसन, मोनिशा वरदान और क्लाउडिया जिसबर्ग की हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू रिपोर्ट कहती है -

“उद्यमशीलता में कदम रखने वाली महिलाओं को उचित डील मिलने की कोई संभावना नहीं है। हमारे दृष्टिकोण से, वीसी इंडस्ट्री के भीतर पूर्वाग्रह फंड को निवेश के सर्वोत्तम अवसरों के लिए आवंटित होने से रोक रहा है।”


इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कई वैली-बेस्ड वीसी फंड हैं जैसे कि फिका वेंचर्स, अर्बन इनोवेशन फंड, ग्लासविंग वेंचर्स, और हैलियट टॉयलेट्स आदि। शी कैपिटल यथास्थिति बदलने के लिए भारत का कदम है।


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