बड़े-बड़े ईनाम जीतने का मौका दे रहा है बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप 'स्टारपिक'

14th Jun 2019
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Trigam Mukherjee

स्टारपिक के सीईओ त्रिगम मुखर्जी


इंग्लैंड और वेल्स में चल रहा आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 अपने चरम पर है। इस बार 10 टीमें वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही हैं। लेकिन क्रिकेट का सबसे ज्यादा असर भारत पर है। इसका सबसे बड़ा कारण विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर से वर्ल्ड कप जीतने की प्रमुख दावेदार टीम होना है। जहां एक तरफ 'मेन इन ब्ल्यू' यानी भारतीय टीम इंग्लैंड में अपने मैच खेल रही होती है तो वहीं यहां भारत में उनके फैंस मैच देखने के अलावा फैंटेसी स्पोर्ट्स खेल रहे होते हैं।


फैंटेसी स्पोर्ट्स भारत में अचानक से एक बड़ा व्यवसाय बन गया है। भारत में अनुमानित 60 फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म हैं, जो कुछ साल पहले मुट्ठी भर कंपनियों थीं। इंडियन फेडरेशन ऑफ स्पोर्ट्स गेमिंग (IFSG) और KPMG की एक संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में दो मिलियन गेमर्स की तुलना में भारत में अभी लगभग 20 मिलियन फैंटेसी गेमर हैं।


इसी क्रम में स्टारपिक (StarPick) का नाम उभरकर सामने आया है। स्टारपिक का भारत के अलावा ब्रिटेन और स्वीडन में भी ऑफिस है। योरस्टोरी के साथ एक वीडियो इंटरव्यू में, स्टारपिक के सह-संस्थापक और सीईओ, त्रिगाम मुखर्जी कहते हैं: "भारत में फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म में बहुत इनोवेशन नहीं हुआ है और हम उस सभी को लाना चाहते हैं।"


त्रिगाम ने सह-संस्थापकों रोहित नायर और उल्फ एकबर्ग के साथ मिलकर 2018 में स्टारपिक की स्थापना की। कंपनी को कुछ संस्थागत फंडिंग मिली है, जब 2017 में स्टार्टअप का जन्म हुआ था तभी से उनके पास आइडियाज थे। उसी समय स्टार्टअप की कोर टीम को पूरा भरोसा था कि भारत में फैंटेसी स्पोर्टस बड़े पैमाने पर आगे बढ़ेंगे, और यह केवल क्रिकेट तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें फुटबॉल, कबड्डी, फॉर्मूला वन, गोल्फ और अन्य खेल भी शामिल होंगे।


स्टारपिक ने 2018 के आईपीएल सीजन के साथ अपने प्लेटफॉर्म की शुरुआत की और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्लेटफॉर्म पर अब 1.2 मिलियन सदस्य हैं और लगातार बढ़ रहे हैं। इसके अलावा इन्होंने हरभजन सिंह और वीवीएस लक्ष्मण सहित कई क्रिकेटरों को बतौर ब्रांड एंबेसडर साइन किया है। 


त्रिगाम का कहना है कि यह आइडिया बहुत ही सिंपल है: एक यूजर पैसे पे करता है और प्लेटफॉर्म से जुड़कर फैंटम मनी वाली टीम का मैनेजर बन जाता है, और दूसरों के साथ कंपटीशन करता है। यूजर्स अपने प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त करते हैं, जिसमें नकदी, उपहार और विदेश यात्राएं शामिल हैं। त्रिगाम कहते हैं कि सामरिक कौशल, खेल का ज्ञान, और अन्य तत्व हैं जो प्लेटफॉर्म पर प्रतिस्पर्धा करते हुए जरूरी होते हैं। विजेता कैसे बनता है ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह एक खास बजट के भीतर अपनी टीम का निर्माण कैसे करता है।





खेल शुरू

भारत में ई-गेमिंग सेगमेंट बहुत तेजी से बढ़ रहा है। IFSG-KPMG की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2018 में राजस्व चार साल की अवधि में लगभग दोगुना होकर 4,380 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसके 22.1 प्रतिशत के सीएजीआर के हिसाब से बढ़ने और 2023 तक 11,900 करोड़ रुपये को छूने की उम्मीद है। IFSG का कहना है कि भारत में तीन में से हर दो खेल प्रशंसक आज फैंटेसी गेमिंग के बारे में जानते हैं, और अनुमान है कि 2019 के अंत तक 100 मिलियन फैंस इस तरह के किसी न किसी प्लेटफॉर्म / ऐप से जुड़ेंगे। 


स्टारपिक भारत के फैंटेसी गेमिंग इकोसिस्टम के पोस्टर चाइल्ड ड्रीम इलेवन (Dream11) के साथ प्रतिस्पर्धा करता है, जो यजर्स को काल्पनिक टीम बनाने और चयनित खिलाड़ियों के वास्तविक मैच प्रदर्शन के आधार पर कैश कमाने का मौका देता है। अन्य प्रतियोगियों में मोबाइल प्रीमियर लीग, हालाप्ले,बल्लेबाजी और गेमिंग मॉन्क शामिल हैं। हालाँकि, त्रिगाम का मानना है कि फैंटेसी स्पोर्टस के पारिस्थितिकी तंत्र को आगे इनोवेशन की ओर बढ़ावा देने के लिए किसी प्रकार के सरकारी विनियमन के तहत आने की आवश्यकता है।


निकट भविष्य में, स्टारपिक अपने प्लेटफॉर्म पर और अधिक गेम्स को लाएगा, लेकिन क्रिकेट प्रमुख विषय रहेगा। त्रिगाम का कहना है कि उनके जैसे प्लेटफॉर्म भारत में खेल के विकास को बढ़ावा देंगे क्योंकि इसमें यूजर्स कम्युनिटी बनाते हैं और इसके आसपास अधिक वार्तालाप करते हैं। त्रिगाम के अनुसार, स्टारपिक की 2020 तक 5 मिलियन से अधिक यूजर्स को पंजीकृत करने की योजना है, और यह अतिरिक्त फंडिंग के राउंड को भी बढ़ा रहा है।





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