बिहार की 1.40 करोड़ जीविका दीदियों के लिए क्यों खास है JEEViKA Sudha Bikri Kendra? जानिए
बिहार सरकार और JEEViKA की पहल से राज्य की सभी 8,053 ग्राम पंचायतों में JEEViKA Sudha Bikri Kendra खुलेंगे. पात्र जीविका दीदियों को Sudha बूथ खोलने के लिए 60 हजार रुपये तक का लोन मिलेगा. जानिए योजना की पूरी जानकारी, पात्रता और ग्रामीण महिलाओं के लिए इसके फायदे.
बिहार के गांवों में अब सिर्फ रोजगार तलाशने की नहीं, बल्कि खुद का कारोबार खड़ा करने की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है. इस बदलाव में बिहार सरकार की JEEViKA (जीविका) पहल ने अहम भूमिका निभाई है. अब इसी अभियान को एक और बड़ी दिशा मिल रही है.
इसी कड़ी में Bihar Rural Livelihoods Promotion Society (BRLPS) ने 6 जुलाई 2026 को एक आदेश जारी किया है. इसके तहत बिहार की सभी 8,053 ग्राम पंचायतों में JEEViKA Sudha Bikri Kendra (Sudha बूथ) खोले जाएंगे. यह पहल Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojna के तहत JEEViKA और COMFED के सहयोग से आगे बढ़ाई जाएगी.
इस पहल की खासियत यह है कि गांवों की महिलाओं को सिर्फ आर्थिक मदद नहीं दी जा रही है. उन्हें एक तैयार बिजनेस मॉडल से जोड़ने की कोशिश हो रही है. उनके पास अपनी दुकान होगी. Sudha डेयरी के प्रोडक्ट होंगे. उन्हें बिजनेस की ट्रेनिंग मिलेगी. और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरा काम JEEViKA के मजबूत महिला नेटवर्क के सहारे आगे बढ़ेगा.
बिहार सरकार देगी 60,000 का लोन
इस योजना का सबसे बड़ा पहलू इसका बड़ा दायरा है. बिहार की 8,053 ग्राम पंचायतों में बिक्री केंद्र खोलने का मतलब है कि Sudha डेयरी का नेटवर्क गांवों के और करीब पहुंचेगा. इससे ग्रामीण ग्राहकों को दूध और डेयरी उत्पादों के लिए बेहतर स्थानीय पहुंच मिल सकती है. वहीं महिलाओं के लिए कमाई का एक नया रास्ता तैयार होगा.
BRLPS के आदेश के मुताबिक चयनित लाभार्थी महिला को Sudha बूथ खोलने के लिए अधिकतम 60 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी. इस पैसे का इस्तेमाल Deep Freezer, Visi Cooler, ब्रांडिंग, दुकान की तैयारी और प्रोडक्ट्स खरीदने जैसे जरूरी कामों में किया जा सकता है. इसके अलावा 15 हजार रुपये का लाभार्थी योगदान रखा गया है. यानि यह रकम लाभार्थी को खुद से लगानी होगी. यह राशि वर्किंग कैपिटल के तौर पर इस्तेमाल होगी. इस तरह एक केंद्र पर कुल 75 हजार रुपये तक का खर्चा हो सकता है.
इस मॉडल में सरकार की मदद के साथ महिला की अपनी भागीदारी भी रखी गई है. यही वजह है कि इसे सिर्फ सहायता योजना के बजाय छोटे कारोबार को खड़ा करने की पहल के तौर पर देखा जा सकता है. महिला दुकान चलाएगी. बिक्री संभालेगी. ग्राहकों से जुड़ेगी. और कारोबार बढ़ने के साथ अपनी आय बढ़ाने का मौका भी उसके पास होगा.
आवेदन और चयन की प्रक्रिया भी तय की गई है. इच्छुक पात्र महिलाओं को निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा. इसके बाद दस्तावेजों और पात्रता की जांच होगी. चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन रैंडम लॉटरी का प्रावधान भी रखा गया है.
क्या है JEEViKA?
JEEViKA की शुरुआत 2006 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी, वर्ल्ड बैंक के सहयोग से. उस समय बिहार में ग़रीबी, आर्थिक बहिष्करण और महिलाओं की भागीदारी बेहद कम थी. 2011 में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत पूरे राज्य में फैलाया गया. यह योजना अब बिहार के हर ब्लॉक और हर पंचायत में पहुंच चुकी है.
इस योजना की खास बात है इसका तीन-स्तरीय ढांचा. स्वयं सहायता समूह (SHG) में 10 से 15 महिलाएं मिलकर एक समूह बनाती हैं. फिर ये SHG मिलकर ग्राम संगठन (VO) बनाती हैं, और इनसे मिलकर क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) तैयार होता है.
इस योजना को चलाने और विस्तार देने का जिम्मा संभाला है BRLPS के CEO हिमांशु शर्मा (IAS) ने. YourStory की फाउंडर और CEO श्रद्धा शर्मा के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे यह योजना एक प्रयोग से शुरू होकर आज 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ग्रामीण अर्थव्यवस्था बन गई है — और वो भी महिलाओं के नेतृत्व में.
हिमांशु शर्मा ने कहा, “यह कोई राहत योजना नहीं है. यह आत्म-सम्मान, आर्थिक शक्ति और सामूहिक भरोसे की कहानी है.”
जीविका की सबसे अनोखी बात है इसका भरोसे से जुड़ा लोन सिस्टम. यहां न कोई कागज़ी काम होता है, न गारंटी लगती है, न क्रेडिट स्कोर की जरूरत होती है.
हिमांशु शर्मा ने आगे बताया, “एक महिला SHG की बैठक में आती है, 5,000 रुपये मांगती है, और उसे तुरंत मंज़ूरी मिल जाती है—क्योंकि समूह को उस पर भरोसा है. यह कोई सब्सिडी या CSR पर निर्भर मॉडल नहीं है. महिलाएं फ्रीबीज़ नहीं मांग रही हैं — वो लोन मांग रही हैं और गर्व से चुका रही हैं. यही असली सशक्तिकरण है.”
BRLPS के CEO के मुताबिक 99.5% लोन रिपेमेंट रेट यह दिखाता है कि महिलाएं इसे सरकार का पैसा नहीं, अपने समूह की पूंजी मानती हैं, और उसे बचाती हैं.
1.40 करोड़ JEEViKA दीदियों का नेटवर्क
JEEViKA की सबसे बड़ी ताकत उसका जमीन से जुड़ा हुआ महिला नेटवर्क है. बिहार में यह पहल पिछले करीब दो दशकों में ग्रामीण महिलाओं को Self Help Groups (SHGs) के जरिए आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनी है.
BRLPS की 74वीं Quarterly Progress Report के मुताबिक मार्च 2026 तक बिहार में 11,88,130 SHGs बन चुके थे. 1.40 करोड़ परिवारों की महिलाएं इन समूहों से जुड़ चुकी थी. इसके अलावा 73,515 VOs और 1,684 CLFs का नेटवर्क भी तैयार हो चुका था.
यह आंकड़ा बताता है कि JEEViKA के पास सिर्फ योजना लागू करने का प्रशासनिक ढांचा नहीं है. उसके पास गांवों में मौजूद महिलाओं का एक बड़ा और सक्रिय नेटवर्क है. यही नेटवर्क JEEViKA Sudha Bikri Kendra जैसी पहल को जमीन पर उतारने में बड़ी ताकत बन सकता है. संस्था ने ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों और कम्यूनिटी-बेस्ड एंटरप्राइजेज को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है. यानी नई Sudha बूथ की कहानी ज़ीरो से शुरू नहीं हो रही है. इसके पीछे वर्षों से तैयार किया गया सामाजिक और आर्थिक ढांचा मौजूद है.
महिला रोजगार से महिला उद्यमिता की ओर बढ़ता बिहार
बिहार सरकार की महिलाओं पर केंद्रित योजनाओं में JEEViKA की भूमिका लगातार मजबूत हुई है. ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के जरिए महिलाओं को अपना रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता देने पर जोर दिया गया है. अब JEEViKA Sudha Bikri Kendra उसी सोच को एक व्यवस्थित कारोबारी अवसर से जोड़ता दिखाई देता है.
इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि महिलाओं को सिर्फ अपना बिजनेस शुरू करने के लिए पूंजी नहीं मिलती. उन्हें नामचीन ब्रांड के साथ काम करने का मौका मिलता है. Sudha डेयरी बिहार में लंबे समय से लोगों के बीच जाना पहचाना नाम है. COMFED ने 1983 में Operation Flood कार्यक्रम के तहत बिहार में डेयरी विकास के लिए काम शुरू किया था. आज वह Sudha ब्रांड के तहत दूध और कई डेयरी उत्पादों की बिक्री करता है.
COMFED के मुताबिक उसके नेटवर्क में दूध संग्रह और बिक्री के लिए बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाएं और रिटेल पॉइंट मौजूद हैं. इससे JEEViKA Sudha Bikri Kendra के लिए सप्लाई और बाजार का एक मजबूत आधार तैयार हो सकता है. COMFED की योजनाओं में ग्रामीण और शहरी इलाकों में मार्केटिंग नेटवर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है.
ऐसे में JEEViKA और COMFED का साथ आना दोनों संस्थाओं की ताकत को जोड़ने जैसा है. एक तरफ महिलाओं का विशाल नेटवर्क है. दूसरी तरफ मजबूत डेयरी ब्रांड और सप्लाई व्यवस्था है.
गांव की दुकान से गांव की अर्थव्यवस्था तक
JEEViKA Sudha Bikri Kendra की असली ताकत इसके स्थानीय असर में दिखाई दे सकती है. जब किसी पंचायत में दूध, दही, पनीर, घी, आइसक्रीम और Sudha डेयरी के अन्य उत्पाद आसानी से मिलने लगेंगे, तो ग्राहक को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलेगी. वहीं दुकान चलाने वाली महिला के लिए रोजाना की बिक्री और नियमित आय का अवसर बनेगा.
इसका मतलब है कि बिक्री केंद्र केवल दूध बेचने वाली छोटी दुकान तक सीमित नहीं रहेंगे. सही जगह, अच्छी बिक्री और बेहतर प्रबंधन के साथ ये केंद्र ग्रामीण बाजार में डेयरी उत्पादों के छोटे लेकिन महत्वपूर्ण रिटेल हब बन सकते हैं.
BRLPS के आधिकारिक आदेश में भी केंद्र के लिए ऐसी जगह को प्राथमिकता देने की बात कही गई है जहां लोगों की आवाजाही अच्छी हो और उत्पादों की बिक्री आसानी से हो सके. लाभार्थियों को ट्रेनिंग देने और केंद्र की स्थापना के बाद उसके संचालन की निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई है.
यही इस पहल को खास बनाता है. सरकार सिर्फ दुकान खोलने की बात नहीं कर रही है. वह महिलाओं को दुकान चलाने के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर, ट्रेनिंग और संस्थागत सहयोग देने का रास्ता भी तैयार कर रही है.
आखिर में JEEViKA Sudha Bikri Kendra को सिर्फ 8,053 नई दुकानों की संख्या से नहीं देखा जाना चाहिए. यह बिहार के ग्रामीण इलाकों में महिला उद्यमिता को आगे बढ़ाने की एक मिसाल है.
JEEViKA ने जिस विशाल महिला नेटवर्क को वर्षों में तैयार किया है, अब उसे नए कारोबारी अवसरों से जोड़ने की दिशा में यह एक अहम कदम है. COMFED का Sudha ब्रांड इस मॉडल को बाजार से जोड़ता है. वहीं बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ इसे आर्थिक आधार देती है. और ग्राम पंचायत स्तर का नेटवर्क इसे लोगों के दरवाजे तक पहुंचाता है.
अगर यह मॉडल उम्मीद के मुताबिक सफल होता है, तो बिहार के गांवों में एक नई तस्वीर दिखाई दे सकती है. एक तरफ घर और परिवार की जिम्मेदारियां संभालने वाली महिला होगी. दूसरी तरफ उसी महिला की अपनी दुकान होगी. यानि वह अपने बिजनेस की मालिक होगी. और उसके सामने अपनी आमदनी बढ़ाने का मौका होगा.
यही वह बदलाव है जिसे बिहार सरकार की महिलाओं पर केंद्रित योजनाएं जमीन पर उतारने की कोशिश कर रही हैं. JEEViKA Sudha Bikri Kendra इस बदलाव को गांव की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने वाला अगला बड़ा कदम बन सकता है.
(feature image: AI generated)





