अगर आपके रिश्तों में है कड़वाहट तो जानिए वास्तु से कैसे करें इसे दूर?

By आचार्य मनोज श्रीवास्तव
September 13, 2020, Updated on : Tue Sep 15 2020 09:25:12 GMT+0000
अगर आपके रिश्तों में है कड़वाहट तो जानिए वास्तु से कैसे करें इसे दूर?
घर के उत्तर-पूर्व में कचरा, टॉयलेट, सेप्टिक टैंक जैसे वास्तु दोष भी संबंधों को खराब करते हैं. यहाँ पर लाल, बैंगनी, या गुलाबी रंग होना भी हानिकारक है. इस रंग को क्रीम कलर में बदल दें.
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पुरुष और स्त्री की मनो-संरचना में अंतर है और इसके कारण कई बार तनाव की स्थिति बन जाती है. कहते हैं कि पुरुष अगर मंगल ग्रह से है तो स्त्री शुक्र ग्रह की निवासिनी है. इसका भी वही तात्पर्य है कि दोनों एक दूसरे से विपरीत हैं. सदियों से पुरुष का काम शिकार करना या आज के परिपेक्ष में घर के लिए आय का प्रबंध करना रहा है और महिला का काम घर का संचालन करना रहा है.


इसके कारण पुरुष अपनी दृष्टि पर एकाग्रचित रहता है – कोई अवसर हाथ से छूट न जाए और स्त्री अपनी श्रवण पर एकाग्रचित है कि कोई आहट अनसुनी न रह जाए. इसलिए जब भी पति-पत्नी के बीच मनमुटाव होता है तो स्त्री कहती है कि ये सुनते ही नहीं है और पति कहता है कि इसको दिखता ही नहीं हैं. इसमें दोनों की गलती नहीं पर उनके बीच का स्वाभाविक अंतर है. 

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सांकेतिक फोटो (साभार: shutterstock)

वर्तमान में स्थिति अलग है. अधिक से अधिक महिलाएं घर में आमदनी लाने की ज़िम्मेदारी ओढ़ रही हैं यानि अपनी श्रवण योग्यता का कॉर्पोरेट सेक्टर में उपयोग कर उस कमी को पूर्ण कर रही हैं. जो पहले एक कमज़ोर कड़ी थी जैसे कि मानव संसाधन या ग्राहक सेवा.


स्त्री-पुरुष में नैसर्गिक अंतर के अलावा भी पति-पत्नी के बीच मनमुटाव के अनेक कारण हो जाते हैं. आजकल पति-पत्नी दिन का आधे से ज्यादा समय ऑफिस में या घर के बाहर गुजारते हैं कभी-कभी इस कारण विवाहोत्तर संबंध बनने की संभावना बन जाती है और जो गृह-कलह का कारण बनती है. कई बार दोनों के अहम् भी टकराने लगते हैं जिससे भी रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है.


ऊपर दिए कई कारण ऐसे हैं जिनपर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है. जो पुरुष-स्त्री के मनोविज्ञान में अंतर है उसको तो बदला नहीं जा सकता पर अगर पति-पत्नी में प्रेम और आपसी सौहार्द है तो फिर कड़वाहट या मनमुटाव की नौबत कभी नहीं आती है. आइए जानते हैं कि आपसी प्रेम को बढ़ाने के लिए क्या वास्तु उपाय किए जा सकते हैं.



अगर आपका बेडरूम दक्षिण-पश्चिम में है तो सर्वोत्तम है, दक्षिण का शयनकक्ष भी उत्तम माना गया है. दक्षिण-पूर्व का शयनकक्ष पति-पत्नी के बीच खटपट को बढाता है, खास तौर से जब पलंग पूर्व और दक्षिण-पूर्व के मध्य रखा हुआ हो. 


वास्तु के अनुसार घर के तीन ज़ोन पति-पत्नी के आपसी प्रेम को बढाने में सहायक हैं; इनमें सबसे प्रमुख है दक्षिण-पश्चिम. घर के इस क्षेत्र में रिश्तों को निभाने की उर्जाएं हैं. उत्तर-पूर्व हमको रिश्तों में स्पष्टता लाने में सहायक है. जरूरत पड़ने पर एक दुसरे के लिए खड़े होने की दृढ़ता उत्तर-पश्चिम की उर्जा से आती है. घर के इन तीन क्षेत्र में अगर टॉयलेट या कोई अन्य वास्तु दोष है, तो इसका सीधा असर पति-पत्नी के आपसी संबंध पर पड़ता है और इसका समुचित निदान कराना जरूरी है. 


अगर घर के दक्षिण-पश्चिम में लाल रंग का आधिक्य है तो उसको पीले या क्रीम कलर में बदल दें. यहाँ पर पौधे रखना भी वर्जित है. दक्षिण-पश्चिम में दो हंसों का जोड़ा रखना भी संबंधों को सुदृढ़ बनाने में सहायक होता है. अगर हंसों का जोड़ा उपलब्ध नहीं है तो “डबल हैप्पीनेस” का सिंबल भी दक्षिण-पश्चिम में लगा सकते हैं. यहाँ पर एक फ्रेम में पति-पत्नी अपना चित्र भी फ्रेम करके लगाएं.


घर के उत्तर-पूर्व में कचरा, टॉयलेट, सेप्टिक टैंक जैसे वास्तु दोष भी संबंधों को खराब करते हैं. यहाँ पर लाल, बैंगनी, या गुलाबी रंग होना भी हानिकारक है. इस रंग को क्रीम कलर में बदल दें.


उपरोक्त उदाहरण पति-पत्नी के संबंधों के विषय में लिखे गए हैं पर इनका प्रभाव घर में बाकी संबंधों पर भी पड़ता है जैसे अगर आप संयुक्त परिवार में रह रहे हैं और परिवारजनों के बीच कड़वाहट है तो दक्षिण-पश्चिम में पूरे परिवार का एक संयुक्त चित्र लगाएं.


आचार्य मनोज श्रीवास्तव ऐसे वास्तु कंसलटेंट और ज्योतिषी हैं जिनको बीस साल से ज्यादा का कॉर्पोरेट लीडरशिप का अनुभव है। वे पूर्व में एयरटेल, रिलायंस और एमटीएस जैसे बड़े कॉर्पोरेट हाउस में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं। आजकल वे पूर्ण रूप से एक वास्तु कंसलटेंट और ज्योतिषी के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।


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