स्टोरीटेलिंग, पजल, और गेम के जरिए साइंस को आसान और इंटरैक्टिव बना रहा है ज्ञानप्रो

साइंस को मुश्किल समझने वालों के लिए अनोखे तरीके से काम कर रहा है एजुकेशनल इनोवेशन "ज्ञानप्रो"

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साइंस का भूत अच्छों-अच्छों का पसीना छुड़ा देता है। लेकिन इससे क्रिएटिव शायद ही कोई चीज होती हो! साइंस को पसंद करने वाले अक्सर इसे बेहद आसान और क्रिएटिव मानते हैं। हालांकि जिन छात्रों को ये कठिन लगता है उनके लिए ज्ञानप्रो इसे अपने तरीके से आसान बना रहा है।

टीम ज्ञान प्रो

टीम ज्ञान प्रो


एक ऐसे युग में जहां शिक्षण पद्धतियां चॉक और टॉक से पीपीटी और पीपीटी से डिजिटल बोर्ड्स एनिमेशन की तरफ आगे बढ़ रही हैं, वहां बेंगलुरु स्थित ज्ञानप्रो ने छात्रों और शिक्षकों दोनों को अपनी अनूठी शिक्षा सहायता के माध्यम से मदद की है।

इसे ऐसे समझिए। एक रासायनिक प्रतिक्रिया या प्रकाश और ध्वनि की जटिल अवधारणाओं का अध्ययन करने के लिए छात्रों का एक समूह परमाणुओं या अणुओं की भूमिका लेता है। इसमें एक प्रियोडिक टेबल के लिए एक कार्ड गेम या ग्रहों पर सामान्य ज्ञान के साथ मोनोपोली गेम; बिजली ट्रांसमिशन के भविष्य के बारे में जानने के लिए वायरलेस बिजली गतिविधि या प्रकाश के बारे में जानने के लिए एक स्पेक्ट्रोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है... लेकिन कभी आश्चर्य हुआ कि जांच-आधारित शिक्षण मॉडल बच्चों को साइंस में उनकी रूचि लाता है? एक ऐसे युग में जहां शिक्षण पद्धतियां चाक और टॉक से पीपीटी और पीपीटी से डिजिटल बोर्ड्स एनिमेशन की तरफ आगे बढ़ रही हैं, वहां बेंगलुरु स्थित ज्ञानप्रो ने छात्रों और शिक्षकों दोनों को अपनी अनूठी शिक्षा सहायता के माध्यम से मदद की है।

बच्चों के बीच जिज्ञासा पैदा करना

एजुकेशनल इनोवेशन ज्ञानप्रो के संस्थापक और सीईओ सुप्रीथ किट्टनकरे का मानना है कि "हर सीखने की गतिविधि जानबूझकर, सार्थक और उपयोगी होनी चाहिए।" यह 2011 था, जब बेंगलुरु के एक मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) की वर्कशॉप लेते हुए सुप्रीथ के अंदर बच्चों के बीच तर्क कौशल के महत्व और जिज्ञासा का सम्मान करने का एहसास हुआ। सुप्रीथ कहते हैं कि "इस कार्यशाला ने मुझे व्यावहारिक और वैचारिक शिक्षा के माध्यम से सैद्धांतिक शिक्षा में महत्वपूर्ण मूल्य में वृद्धि की आवश्यकता पर एक अंतर्दृष्टि प्रदान की।"

वर्कशॉप करते स्टूडेंट्स

वर्कशॉप करते स्टूडेंट्स


2014 के बाद से, सुप्रीथ और उनकी छोटी सी टीम (कम से कम 25 कर्मचारी) पूरे भारत में 400 से अधिक साइंस कार्यक्रमों और 200 साइंस कार्यशालाओं के माध्यम से 1 लाख से अधिक स्कूल बच्चों के साथ लगी हुई है। सप्रीथ कहते हैं कि "हमारे पास कम से कम 250 एक्टिव स्कूल पार्टनर हैं, जहां हम प्रोसिनेटिया, समर कैंप, साइंस शो, साइंस वर्कशॉप, साइंस प्रदर्शनियों और टिंकरिंग प्रयोगशालाओं जैसे विभिन्न कार्यक्रमों को लागू करते हैं।"

ज्ञानप्रो वर्तमान में एक बी2बी2 सी मॉडल पर चल रही है, जहां स्कूल बच्चों के लिए उनके प्रोडक्ट खरीदते हैं, जिससे छात्रों को अपने अंतिम उपभोक्ताओं का लाभ मिलता है। नॉटिंघम ट्रेन्ट यूनिवर्सिटी, ब्रिटेन से औषध विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले सुप्रीथ कहते हैं कि "हम 70 से अधिक कॉर्पोरेट्स और गैर-सरकारी संगठनों को उनके कर्मचारी / या ग्राहक इंगेजमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से इंटरैक्टिव साइंस प्रोग्रामों के संचालन के लिए सहयोग भी कर चुके हैं।"

क्रिएटिव लर्निंग एड्स- आगे बढ़ने का रास्ता

ज्ञानप्रो ने उत्सुक युवाओं को लाभान्वित करने के लिए अब तक विभिन्न प्रकार के शैक्षिक एड्स (विजुअल, ऑडिटोरी और किनिस्थेटिक) को डिजाइन और प्रसारित किया है। शिक्षण/शिक्षा एड्स की भूमिका पर जोर देते हुए वे कहते हैं कि, "वे (एड्स) बच्चों को देखकर, सुनने और छूकर नए कौशल और तकनीकों को सीखने की अवधारणा को समझ में मदद करते हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा वे उनके आसपास के वातावरण की खोज करके अधिक सीखते हैं।"

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तो, ज्ञानप्रो द्वारा विकसित कुछ जांच-आधारित सीखने/ पढ़ाने का मॉडल क्या है? साइंटिफिक स्टोरीटेलिंग, हाथों की गतिविधियां, रोल-प्लेज, पजल्स और गेम कुछ मॉडल हैं। सुप्रीथ कहते हैं कि "हम मानते हैं कि व्यस्त हाथ दिमाग को व्यस्त रखते हैं। और इसलिए हम साइंस अवधारणाओं का अनुभव करने के लिए छात्रों की सक्रिय भागीदारी को शामिल करने के लिए बहुत सारी गतिविधियां को शामिल करते हैं।" वे आगे कहते हैं कि "इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को अपने अच्छे मोटर स्किल्स, निपुणता आदि विकसित करने में मदद करती हैं और यहां तक कि उनकी स्मृति को बनाए रखने, प्रतिधारण और लिसनिंग स्किल को भी प्रभावित करने में मदद करती हैं।'

जब सुप्रीथ से उनके लर्निंग एड्स के बीच सबसे लोकप्रिय एड्स को चुनने के लिए कहा गया तो उन्होंने पहेली हल (पजल्स) के माध्यम से सीखने की विधि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि "यह तकनीक बच्चों के बीच सबसे लोकप्रिय है क्योंकि वे सीखते हैं कि "पूरी तस्वीर" वास्तव में विभिन्न भागों से बनी है।" पहेली को सुलझाने के दौरान, छात्र विज्ञान सामग्री से चिंतित नहीं होते। इसलिए वे समस्या-सुलझाने में सक्षम हैं।

अभिनव और रोमांचक शिक्षा सहायता- प्रोसाइंटिया

शिक्षा को मजेदार बनाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया प्रोसाइंटिया मॉडल एक इनोवटिव लर्निंग ऐड है। जो विशेष रूप से ग्रेड 5 से 8 के छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है। सुप्रीथ कहते हैं कि "यह स्कूल टीचर्स के लिए एक पेशेवर योजनाबद्ध और तैयार की गई STEM-आधारित गतिविधि किट है, जहां सभी गतिविधियां समय और ग्रेड स्पेसिफिक हैं।"

प्रोसाइंटिया के डिजाइन और विकास चरण में, सुप्रीथ की टीम ने सक्रिय रूप से विभिन्न शिक्षकों, साइंस शिक्षकों, स्कूल के प्रिंसिपल और स्कूल प्रबंधन के साथ बातचीत की। वे कहते हैं कि "हमने प्रोसाइंटिया को सेल्फ-फंडेड के जरिए तैयार किया और इसे विकसित करने के लिए दो साल लग गए। इसके जरिए हम स्कूल के शिक्षकों को देश भर में कक्षाओं में पेशेवरों को कार्यान्वित करने में सक्षम बनाते हैं। "

सुप्रीथ आगे कहते हैं, "सामग्रियों को स्थानीय स्तर पर हमारे कार्यालय में इकट्ठा किया जाता है। जब स्कूल आदेश देते हैं, तो हम शिक्षकों को ये सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं कि वे क्या वे कक्षाओं में छात्रों को इसे समझाने और सिखाने में सक्षम हैं। इसके अलावा, प्रत्येक बच्चे को अपनी स्वयं की गतिविधि किट मिलती है।" प्रोसाइंटिया किट में शामिल एक्टिविटी शिक्षकों को गतिशील कक्षा के वातावरण में वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से सिखाना में मदद मिलती है। इसके अलावा यह छात्रों को इन परियोजनाओं में सक्रिय रूप से संलग्न करके एक डिजाइन माइंडसेट, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, अनुकूली शिक्षा और भौतिक कंप्यूटिंग जैसे कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए उत्साहित करती है।

स्केलिंग अप और भविष्य की योजनाओं पर

सुप्रीथ पिछले चार वर्षों में ज्ञानप्रो की यात्रा को याद करते हुए बेहद गौरवान्वित महसूस करते हुए कहते हैं कि "10 बच्चों के समूह की एक कार्यशाला के रूप में शुरू होने के बाद लगभग 1 लाख बच्चों का विस्तार हुआ है। कई बच्चों और यहां तक कि उनके माता-पिता ने अक्सर साइंस को समझने के लिए ज्ञानप्रो में उत्साहवर्धक वातावरण के बारे में टिप्पणी की है।" प्रोसाइंटिया के माध्यम से, ज्ञानप्रो का उद्देश्य 2022 तक कम से कम एक लाख बच्चों के लिए विज्ञान को मजेदार, इंटरैक्टिव और शिक्षाप्रद बनाना है।

सप्रीथ कहते हैं कि "इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, हम अपने निरंतर प्रयासों को जारी रखेंगे और अगले कुछ सालों में स्कूलों में हमारी आउटरीच में वृद्धि करेंगे। हम K-10 स्कूलों में कक्षा विज्ञान अध्यापन को नए सिरे से बदलकर भारत में विज्ञान के भविष्य को शेप देने की उम्मीद करते हैं।" हालांकि यह एक दूर का सपना है लेकिन सुप्रीथ को उम्मीद है कि ज्ञानप्रो की शिक्षा से प्रेरित भविष्य में छात्र नोबेल पुरस्कार विजेता बनेंगे।

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