इंजीनियर पति-पत्नी ने नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस, आज रेवेन्यू 212 करोड़ रुपये पार
कोयंबटूर के इंजीनियर पति-पत्नी प्रभु गांधीकुमार और ब्रिंदा विजयकुमार ने 10 रु की कीमत वाले प्रोडक्ट्स बेचकर TABP ब्रांड खड़ा कर 212 करोड़ रुपये का बिजनेस बनाया. जानिए कैसे इस जोड़ी ने ‘भारत’ के लिए FMCG मॉडल बदल दिया और गांव-गांव तक अपनी पहुंच बनाई.
भारत का असली बाजार मेट्रो शहरों में नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और गांवों में बसता है. यहां हर खरीद सोच-समझकर होती है. कीमत मायने रखती है. भरोसा मायने रखता है. और यही वह जगह है, जिसे लंबे समय तक बड़ी कंपनियों ने नजरअंदाज किया.
इसी गैप को पहचाना कोयंबटूर के उद्यमी प्रभु गांधीकुमार (Prabhu Gandhikumar) ने. उन्होंने देखा कि गांव और छोटे शहरों के लोग भी ब्रांडेड और साफ-सुथरे प्रोडक्ट चाहते हैं, लेकिन उनकी पहुंच से बाहर हैं. इसी सोच से जन्म हुआ TABP का. एक ऐसा ब्रांड, जिसने ₹10 की कीमत पर भरोसा, क्वालिटी और स्वाद को जोड़ दिया. साल 2018 में इंजीनियर पति-पत्नी प्रभु गांधीकुमार और ब्रिंदा विजयकुमार (Brindha Vijayakumar) ने मिलकर TABP की स्थापना की थी.
रगों में बिजनेस
कोयंबटूर — एक ऐसा शहर जो दिखावे से ज्यादा काम पर भरोसा करता है. यही माहौल प्रभु की सोच को आकार देता है. उनका परिवार मेटल कास्टिंग बिजनेस से जुड़ा रहा है. बचपन से ही उन्होंने बिजनेस को बहुत करीब से देखा.
फैक्ट्री का काम, लोगों को संभालना, लागत का दबाव. यही उनकी असली क्लासरूम थी. उनके दादा पी.आर. दुरईस्वामी ने 1976 में गांधी कुमार फाउंड्री की नींव रखी थी. वहीं से उन्हें मेहनत और विरासत का मतलब समझ आया.
प्रभु कहते हैं, “मैंने बहुत जल्दी समझ लिया कि बिजनेस सिर्फ आइडिया नहीं होता, हर दिन की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाना ही असली काम है, और यही आपको मजबूत बनाता है.”
उनके पिता डॉ. डी. गांधीकुमार ने उन्हें आधुनिक सोच दी. बदलते समय के साथ कैसे आगे बढ़ना है, यह उन्होंने यहीं सीखा.

साल 2018 में इंजीनियर पति-पत्नी प्रभु गांधीकुमार और ब्रिंदा विजयकुमार ने मिलकर TABP की स्थापना की थी.
अमेरिका में नौकरी छोड़ भारत लौटे
प्रभु ने PSG कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की. यहां उन्होंने सिस्टम को समझना सीखा. हर चीज को हिस्सों में तोड़कर देखना और सुधार करना.
इसके बाद वह अमेरिका गए. छह साल तक The Home Depot और TCS जैसी कंपनियों के साथ काम किया. यहां उन्होंने बड़े स्तर पर काम करने का तरीका सीखा.
प्रभु बताते हैं, “अमेरिका में मैंने देखा कि बड़े बिजनेस हर छोटी लागत को समझते हैं, सप्लाई चेन में बचाया गया हर रुपया ही असली मुनाफा बनता है, और यही सोच मैं भारत लेकर आया.”
यही अनुभव आगे चलकर TABP की नींव बना.
₹10 की ताकत और ‘भारत’ का बड़ा बाजार
TABP की शुरुआत एक अहम समझ से हुई. भारत का बड़ा हिस्सा ₹10 पर चलता है. यह सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक सीमा है.
छोटे शहरों और गांवों के लोगों के पास विकल्प सीमित थे. या तो महंगे ब्रांड या बिना ब्रांड के असुरक्षित उत्पाद.
प्रभु कहते हैं, “₹10 सिर्फ एक कीमत नहीं है, यह भरोसे का स्तर है, अगर आप इस दाम में सही क्वालिटी दे देते हैं, तो ग्राहक बार-बार आपके पास लौटता है.”
यहीं से कंपनी ने लोकल फ्लेवर को पैकेज करके पेश किया. पनीर सोडा और नन्नारी जैसे स्वाद अब साफ और सुरक्षित बोतलों में मिलने लगे.
प्रभु बताते हैं, “हमने नया स्वाद नहीं बनाया, हमने वही दिया जो लोग पहले से पसंद करते थे, बस उसे साफ और भरोसेमंद बना दिया, और यही हमारी असली ताकत बनी.”

TABP की टीम
बिजनेस मॉडल
TABP का मॉडल पूरी तरह ‘भारत’-केंद्रित है. यहां फोकस है ज्यादा लोगों तक पहुंचने पर. कंपनी ₹10 में 200 ml की बोतल देती है, जो बाजार में अलग पहचान बनाता है.
मैन्युफैक्चरिंग भी अलग तरीके से होती है. कंसंट्रेट कंपनी खुद बनाती है, लेकिन बॉटलिंग अलग-अलग जगहों पर होती है. इससे लागत कम रहती है और सप्लाई आसान होती है. मार्केटिंग पर खर्च नहीं के बराबर है. कंपनी का भरोसा अपने प्रोडक्ट और दुकानदारों पर है.
प्रभु कहते हैं, “हम विज्ञापन पर खर्च नहीं करते, हम दुकान पर दिखते हैं, जब दुकानदार हमें आगे रखता है, तभी असली मार्केटिंग होती है.”
आज कंपनी के प्रोडक्ट 1.2 लाख से ज्यादा दुकानों तक पहुंच चुके हैं.
चुनौतियां
ग्रामीण भारत में बिजनेस करना चुनौती भरा है. यहां तापमान बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में प्रोडक्ट को सुरक्षित रखना मुश्किल होता है.
लॉजिस्टिक्स भी बड़ा मुद्दा है. ₹10 की बोतल को दूर तक पहुंचाना महंगा पड़ता है. इसलिए कंपनी ने सीमित दूरी में ही सप्लाई करने का मॉडल अपनाया.
प्रभु बताते हैं, “हमने कई बार डिमांड होने के बाद भी मना किया, क्योंकि हम सही सप्लाई नहीं दे सकते थे, भारत में बिजनेस में भूगोल को समझना बहुत जरूरी है.”
कंपनी ने स्वाद को भी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बदला. ज्यादा मीठा और मसालेदार फ्लेवर तैयार किए गए.
₹212 करोड़ से ₹800 करोड़ तक का सफर
आज TABP का टर्नओवर ₹212 करोड़ तक पहुंच चुका है. कंपनी ने अब तक करीब ₹60 करोड़ की फंडिंग जुटाई है. अब लक्ष्य है ₹800 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना. कंपनी तेजी से नए राज्यों में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है.
प्रभु कहते हैं, “हम सिर्फ बड़ा ब्रांड नहीं बनना चाहते, हम हर गांव तक पहुंचना चाहते हैं, जहां पानी है वहां हमारा पेय होना चाहिए, यही असली स्केल है.”
नए उद्यमियों के लिए प्रभु की सलाह साफ है, “अगर आप ‘भारत’ के लिए बना रहे हैं, तो पूरा मॉडल बदलना होगा, सिर्फ कीमत कम करना काफी नहीं है, आपको ग्राहक को असली वैल्यू देनी होगी.”
यह कहानी बताती है कि छोटे शहर से निकली सोच भी बड़ा बदलाव ला सकती है.





