Congress president voting: 24 साल बाद गैर-गांधी अध्यक्ष का चुनाव आज, नई प्रक्रिया से डाले जा रहे हैं वोट

By Prerna Bhardwaj
October 17, 2022, Updated on : Mon Oct 17 2022 09:52:54 GMT+0000
Congress president voting: 24 साल बाद गैर-गांधी अध्यक्ष का चुनाव 
आज, नई प्रक्रिया से डाले जा रहे हैं वोट
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साल 1885 में बनी कांग्रेस पार्टी के सियासी इतिहास में अब तक 88 अध्यक्ष रह चुके हैं. आजादी के पहले के दौर में महात्मा गांधी ने 1924 में कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षता संभाली थी. वहीँ देश की आजादी के वक़्त जे बी कृपलानी के हाथों में कांग्रेस पार्टी की कमान थी. उसके बाद पी. सीतारमैया, पुरुषोत्तम दास टंडन और यू एन धेबार अध्यक्ष रहे. इसके अलावा नीलम संजीव रेड्डी, के. कामराज, एस.निजलिंगप्पा, जगजीवन राम, शंकर दयाल शर्मा, देवकांत बरुआ, के. ब्रह्मानंद रेड्डी, पी. वी. नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी ने कांग्रेस की कमान संभाली. कांग्रेस पार्टी में आखिरी अध्यक्ष सीताराम केसरी थे, जो गांधी परिवार से नहीं आते थे. सीताराम केसरी के बाद से 24 साल हो गए तब से कांग्रेस की कमान गांधी परिवार के हाथ में ही रही. आजादी से बाद से अब तक कांग्रेस के 18 अध्यक्ष रह चुके हैं. इनमें पांच अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से रहे, जबकि 13 का गांधी परिवार से दूर-दूर तक नाता नहीं था.


आज कांग्रेस के अध्यक्ष के लिए हो रहे चुनाव में दो गैर-गाँधी उम्मीदवार- मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर- चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं. कांग्रेस अध्यक्ष  पद के लिए हो रहे इस चुनाव के लिए पार्टी मुख्यालय में और देशभर में 65 से अधिक केंद्रों पर मतदान हो रहा है. वोटों की गिनती 19 अक्टूबर को होगी. इस चुनाव में इसकी वोटिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है. मतदान करते हुए अब प्रतिनिध को 1 की जगह टिक करना होगा. शशि थरूर की टीम ने उम्मीदवार के नाम के आगे 1 लिखने के विषय को उठाते हुए कहा था कि इससे भ्रम पैदा हो सकता है जिसके बाद केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण ने इसे बदला और मतदाताओं को पसंदीदा प्रत्याशी के नाम के आगे टिक का निशान लगाने को कहा गया.


बहरहाल, कांग्रेस में 24 साल बाद नेहरू-गांधी परिवार के बाहर से कोई अध्यक्ष बनेगा. कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए पिछली बार चुनाव 2000 में हुआ था जब जितेंद्र प्रसाद को सोनिया गांधी के हाथों जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा था. सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा ने इस बार अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर रहने का फैसला किया है, जिससे 24 साल के अंतराल के बाद गांधी परिवार के बाहर का सदस्य इस जिम्मेदारी को संभालेगा.