कोरोनावायरस वैक्सीन: इस भारतीय बिजनेसमैन ने ऑक्सफोर्ड जेनर इंस्टीट्यूट को दान में दिये 3300 करोड़ रुपये

By yourstory हिन्दी
July 19, 2020, Updated on : Sun Jul 19 2020 09:31:30 GMT+0000
कोरोनावायरस वैक्सीन: इस भारतीय बिजनेसमैन ने ऑक्सफोर्ड जेनर इंस्टीट्यूट को दान में दिये 3300 करोड़ रुपये
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भारतीय बिजनेस टायकून लक्ष्मी मित्तल, स्टील मैग्नेट और आर्सेलर मित्तल के सीईओ ने ऑक्सफोर्ड जेनर इंस्टीट्यूट को 3.2 मिलियन पाउंड (करीब 3300 करोड़ रुपये) का दान दिया है, जो वर्तमान में अपने कोरोनावायरस वैक्सीन का परीक्षण कर रहा है।


भारतीय बिजनेस टायकून लक्ष्मी मित्तल ने ऑक्सफोर्ड जेनर इंस्टीट्यूट को 3300 करोड़ रुपये का दान दिया है।

भारतीय बिजनेस टायकून लक्ष्मी मित्तल ने ऑक्सफोर्ड जेनर इंस्टीट्यूट को 3300 करोड़ रुपये का दान दिया है। (फोटो साभार: shutterstock)


बिजनेस टूडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, अपने एक बयान में इंस्टीट्यूट ने कहा कि मित्तल का "उदार उपहार" टीकाकरण में महत्वपूर्ण प्रोफेसर के भविष्य को सुरक्षित करने में सहायता करेगा। यहां से उस पोस्ट को उनके समर्थन की मान्यता में 'लक्ष्मी मित्तल और फैमिली प्रोफेसर ऑफ वैक्सीनोलॉजी' के रूप में जाना जाएगा। वर्तमान में प्रोफेसर एड्रियन हिल इस पद को धारण करते हैं।


इसके बारे में बात करते हुए, लक्ष्मी मित्तल ने कहा कि यह साल पूरी दुनिया के लिए महामारी से उबरने के लिये बेहतर प्रयास करने का आह्वान है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर हिल का काम केवल असाधारण नहीं बल्कि आवश्यक है।


प्रोफेसर हिल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के COVID-19 वैक्सीन के मानव परीक्षणों के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर हैं। कोरोनावायरस वैक्सीन उम्मीदवार के निर्माण के लिए विश्वविद्यालय एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी कर रहा है।


वास्तव में, इस सप्ताह ऑक्सफोर्ड कोरोना वैक्सीन के पहले चरण के परीक्षणों से कुछ सकारात्मक समाचार मिलने की उम्मीद है। शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्हें अब तक के परीक्षणों में देखी गई प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया द्वारा प्रोत्साहित किया गया और जुलाई के अंत तक चरण I के डेटा को प्रकाशित करने का लक्ष्य है।


आपको बता दें कि जेनर इंस्टीट्यूट टीके के विकास में अग्रणी है। इसने पहली बार 2014 में इबोला के प्रकोप के लिए वैक्सीन विकसित करना शुरू किया था, जिसमें प्रोफेसर हिल थे।


आर्सेलर मित्तल इबोला प्राइवेट सेक्टर मोबिलाइजेशन ग्रुप के संस्थापक सदस्य थे जिन्होंने प्रकोप के खिलाफ निजी क्षेत्र से प्रतिक्रिया का समन्वय किया।



Edited by रविकांत पारीक