फोन की घंटी बजी और बैंक अकाउंट से 50 लाख रुपये फुर्र, आप न बन जाएं अगला शिकार!

By yourstory हिन्दी
December 14, 2022, Updated on : Wed Dec 14 2022 13:26:18 GMT+0000
फोन की घंटी बजी और बैंक अकाउंट से 50 लाख रुपये फुर्र, आप न बन जाएं अगला शिकार!
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दक्षिण दिल्ली स्थित एक सिक्योरिटी सर्विस फर्म के डायरेक्टर को 50 लाख रुपये की चपत लग गई. साइबर बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया, लेकिन अनोखे तरीके से. उन्होंने फर्म के डायरेक्टर को बार-बार उनके सेलफोन पर ब्लैंक और मिस्ड कॉल देकर बैंक अकाउंट से पैसे उड़ाए. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कोई ओटीपी नहीं मांगा.


पीड़ित को कुछ दिन पहले शाम 7 बजे से 8.45 बजे के बीच कई कॉल आए. उन्होंने कुछ को उठाया लेकिन दूसरों को नजरअंदाज कर दिया क्योंकि दूसरी तरफ से कोई नहीं बोला. उन्होंने अपना फोन चेक किया तो करीब 50 लाख रुपये के RTGS (Real-time gross settlement systems) ट्रांजेक्शन के मैसेज देखे.


शुरुआती पूछताछ में पता चला कि करीब 12 लाख रुपये किसी भास्कर मंडल के खाते में ट्रांसफर किए गए जबकि 4.6 लाख रुपये अविजीत गिरि के खाते में. करीब 10-10 लाख रुपये दो अन्य खातों में ट्रांसफर किए गए. छोटी राशि के और भी ट्रांजेक्शन थे.


जांच से पता चलता है कि इस ठगी के मास्टरमाइंड झारखंड के जामताड़ा इलाके में हो सकते हैं, जबकि प्राप्तकर्ता सिर्फ खाताधारक हो सकते हैं जिन्होंने कमीशन के लिए घोटालेबाजों को किराए पर अपने खाते उपलब्ध कराए होंगे.


TOI की एक रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि यह मामला साइबर अपराधियों द्वारा किसी व्यक्ति से छीने गए धन के मामले में राजधानी से रिपोर्ट की गई सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है. बैंकों से जुड़े प्रतिबंधों को देखते हुए, आम तौर पर, बदमाश हजारों की संख्या में छोटी राशि का गबन करते हैं. हालांकि, आरोपी भाग्यशाली रहा क्योंकि पीड़ित के पास एक करंट अकाउंट था जिससे बिना किसी बाधा के बड़े ट्रांजेक्शन भी किए जा सकते थे.


हालांकि, आश्चर्य की बात यह है कि पीड़ित को बदमाशों को कोई भी जानकारी नहीं देनी पड़ी, जिसने सिर्फ कॉल के जरिए फ्रॉड को अंजाम दिया. पुलिस को संदेह है कि स्कैमर्स ने "सिम स्वैप" (SIM Swap) तकनीक का इस्तेमाल किया होगा.


अधिकारियों ने कहा कि यह एक तरह का अकाउंट टेकओवर फ्रॉड है, जो आम तौर पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन या टू-स्टेप वेरिफिकेशन में एक खामी को लक्षित करता है, जिसमें दूसरा फैक्टर या तो एक टेक्स्ट मैसेज या मोबाइल फोन पर की गई कॉल है.


एक अधिकारी ने कहा, “इस धोखाधड़ी में, स्कैमर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से भी संपर्क करते हैं और उन्हें सिम कार्ड सक्रिय करने के लिए बरगलाते हैं. एक बार ऐसा होने के बाद, वे फोन पर कंट्रोल कर लेते हैं.”


एक अन्य अधिकारी ने कहा, “बदमाश ट्रांजेक्शन के दौरान उनके द्वारा शुरू की गई समानांतर कॉल के जरिए फोन पर ओटीपी भी सुन रहे होते हैं. हालांकि, फोन हाईजैक सहित अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए भी जांच की जा रही है.”


ऐसा लगता है कि साइबर बदमाशों ने इन नए तौर-तरीकों का उपयोग करके देश भर में लोगों को निशाना बनाया है. इससे पहले, अहमदाबाद में एक कैमिकल बिजनेसमैन और एक अन्य व्यक्ति को इस साल जनवरी में मिस्ड कॉल मिलने के बाद बदमाशों ने करीब 64.4 लाख रुपये की चपत लगाई थी.


कुछ महीने पहले, मुंबई के एक कपड़ा व्यापारी के फोन पर छह मिस्ड कॉल आने के बाद उसके खाते से लगभग 1.8 करोड़ रुपये गायब हो गए. चोरों ने 14 बैंक खातों में 28 ट्रांजेक्शन कर इस घटना को अंजाम दिया.


Edited by रविकांत पारीक

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