अर्थव्यवस्था पर 'श्वेत पत्र' लाने का विचार राष्ट्र-हित में छोड़ दिया : मोदी

By PTI Bhasha
September 03, 2016, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:17:15 GMT+0000
अर्थव्यवस्था पर 'श्वेत पत्र' लाने का विचार राष्ट्र-हित में छोड़ दिया : मोदी
प्रधानमंत्री का दावा, दो साल के उनके शासनकाल में काफी भ्रष्टाचार समाप्त हुआ है
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राजग के 2014 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने अर्थव्यवस्था की स्थिति पर श्वेत पत्र लाने के बारे में सोचा लेकिन इससे देश हित को नुकसान पहुंचने की आशंका से ऐसा नहीं किया।

मोदी ने कहा कि राजग सरकार के जुलाई 2014 में पहला बजट पेश करने से ठीक पहले उनके राजनीतिक सोच ने यही सलाह दी कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बजट आंकड़ों की समस्या समेत समूची अर्थव्यवस्था की स्थिति को सामने रखा जाएगा। लेकिन राष्ट्र हित ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

उन्होंने नेटवर्क 18 चैनल को दिये साक्षात्कार में कहा कि दो साल के उनके शासनकाल में काफी भ्रष्टाचार समाप्त हुआ है और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में सबसे बड़ा कर सुधार किया गया है।

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मोदी ने कहा, ‘‘आज मैं सोचता हूं पहला बजट (2014 में) पेश करने से पहले मुझे देश की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र लाना चाहिए, ऐसा विचार मुझे आया था। मेरे सामने दो रास्ते थे। राजनीति ने मुझसे कहा कि सभी बातें मुझे विस्तारपूर्वक रख देनी चाहिए।’’ नेटवर्क 18 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन राष्ट्रीय हित ने मुझे कहा कि यह जानकारी रखने से नाउम्मीदी बढ़ेगी, बाजारों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और अर्थव्यवस्था के लिये बड़ा झटका होगा। साथ ही भारत के बारे में दुनिया का नजरिया भी खराब होगा..ऐसे में अर्थव्यवस्था को इस स्थिति से बाहर निकालना मुश्किल होता..मैंने राष्ट्र हित में राजनीतिक जोखिम उठाते हुए चुप रहना उचित समझा।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति के बारे में पूरा ब्योरा नहीं दिया और न ही यह बताया कि पिछली सरकार ने किस तरीके से बजट आंकड़ों को पेश किया। उन्होंने कहा, ‘‘यह हमें आहत करता है..हमारी आलोचना हुई, इसे इस रूप में प्रचारित किया गया जैसे कि यह हमारी गलती थी लेकिन मैंने राष्ट्र हित में यह राजनीतिक नुकसान उठाया और इसका परिणाम यह रहा कि कमियों के बावजूद मैं चीजों को संभालने में सफल रहा।’’ मोदी ने विश्वास जताया कि ‘निष्पक्ष लोग’ जब मौजूदा स्थिति की तुलना 2014 से करेंगे तो उन्हें अचंभा होगा।

जीएसटी को बड़ा कर सुधार बताते हुए मोदी ने कहा कि यह भारत में कर भुगतान को सरल बनाकर बड़ा बदलाव लाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘देश में बहुत कम लोग कर देते हैं। कुछ लोग कर देते हैं क्योंकि वे देशभक्त हैं, वे देश के लिये कुछ करना चाहते हैं। कुछ इसलिए कर देते हैं, वे कानून नहीं तोड़ना चाहते। कुछ किसी भी समस्या से बचने के लिये कर देते हैं। लेकिन ज्यादातर कर नहीं देते क्योंकि प्रक्रिया काफी जटिल है। उन्हें लगता है कि वे प्रक्रिया में अटक सकते हैं और उससे बाहर नहीं निकल पाएंगे। जीएसटी कर भुगतान को इतना सरल बनाएगा कि जो कोई भी देश में योगदान देना चाहता है, वह आगे आएगा।’’ मोदी ने कहा कि राजग सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद आर्थिक स्थिति बदल गयी है। एक समय था जब जब ‘सरकार में जड़ता’ के कारण व्यापार एवं उद्योगपतियों ने बाहर देखना शुरू कर दिया था।

सरकार द्वारा आर्थिक स्थिति में सुधार के लिये उठाये गये कदमों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रणाली में सुधार तथा कारोबार सुगमता को बेहतर बनाने के लिये प्रयास किये गये हैं।प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘विश्वबैंक की कारोबार सुगमता में हमारी रैंकिंग तेजी से सुधरी है। यह सुधारों के बिना संभव नहीं था। हमारी प्रणाली, प्रक्रिया, फार्म काफी जटिल थे। अब सुधार हुए हैं, इससे हमारी रैंकिंग सुधरी है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों में फंसे कर्ज :एनपीए: की समस्या को ठीक करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बैंक अधिकारियों के साथ बैठक की और उनसे कहा कि आपके पास सरकार की तरफ से कोई कॉल नहीं आएगा। इन चीजों से स्थिति दुरूस्त हुई है..मेरा मानना है कि हम कोई ‘शाट-कट’ नहीं अपनाएंगे और परिणाम दिख रहे हैं।’’ भ्रष्टाचार के मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह सभी स्तरों पर समस्या से निपटने में लगे हैं जो इस सरकार के लिये सबसे बड़ी चुनौती है।

मोदी ने कहा, ‘‘अगर गंगा गोमुख पर साफ है तब गंगा आगे बहते हुए धीरे-धीरे शुद्ध होगी। आपने नोटिस किया होगा कि हमने कई कदम उठाये हैं जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘..हम नीतिगत फैसलों और प्रौद्योगिकी का उपयोग कर निचले स्तर के भ्रष्टाचार को खत्म कर सकते हैं..।’’

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