संयुक्शत राष्ट्र में प्रवासियों और शरणार्थियों का आयोजित हुआ पहला सम्मेलन

कई देशों ने इस समझौते के शुरूआती मसविदे को खारिज कर दिया था

Monday September 19, 2016,

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शरणार्थियों एवं विस्थापितों के बड़े पैमाने पर विस्थापन के मुद्दे पर आयोजित अब तक के पहले सम्मेलन में न्यूयार्क में दुनिया भर के नेता जुट रहे हैं और इसके साथ ही 6.53 करोड़ विस्थापितों की बदहाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में विमर्श का केन्द्रीय मुद्दा बनती जा रही है।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों को छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक नेता और राजनयिक शरणार्थियों एवं प्रवासियों के मानवाधिकारों की सुरक्षा करने वाले ज्यादा समन्वित रूख के लिए संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों को एकजुट करने वाले दस्तावेज को मंजूरी देंगे।

संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थी मामलों के उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैंडी ने बताया, ‘‘यह बेहद दिलचस्प है क्योंकि यदि हम इस दस्तावेज के जरिए कई कारकों 'देशों' को भागीदारी करवाने में सफल हो सकें तो हम आपात प्रतिक्रियाओं में आने वाली बहुत सी समस्याओं और सीरिया की स्थिति जैसी दीर्घकालीन शरणार्थी स्थितियों को सुलझा लेंगे।’’ यह एक कड़ा संघर्ष साबित हो सकता है। बहरहाल, दस्तावेज कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और यह एक ऐसे समय पर आया है, जब शरणार्थियों और प्रवासियों का मुद्दा यूरोप एवं अमेरिका में एक विभाजनकारी मुद्दा बना हुआ है।

कई देशों ने इस समझौते के शुरूआती मसविदे को खारिज कर दिया था। इस समझौते में देशों से अपील की गई थी कि वे हर साल शरणाथियों की जनसंख्या के 10 प्रतिशत लोगों को पुन: बसाएं। कई मानवाधिकार समूहों ने इस दस्तावेज को एक गंवाया गया अवसर बताया।

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