दादासाहेब भगत: 10वीं पास, Infosys में ऑफिस बॉय... आज दो स्टार्टअप्स के CEO, PM मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
कभी Infosys में ऑफिस बॉय की नौकरी करने वाले दादासाहेब भगत आज दो सफल स्टार्टअप्स के फाउंडर हैं. जानिए कैसे 10वीं तक पढ़े भगत ने संघर्ष, सीखने की ललक और मेहनत के दम पर Ninthmotion और DesignTemplate.io जैसी कंपनियां खड़ी कीं. PM मोदी भी उनकी सराहना कर चुके हैं.
कई लोग अपनी आर्थिक परेशानियों, कम पढ़ाई या छोटे शहर को सफलता के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा मान लेते हैं. लेकिन महाराष्ट्र के बीड जिले के दादासाहेब भगत (Dadasaheb Bhagat) ने साबित कर दिया कि अगर सीखने की भूख और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती.
कभी Infosys के गेस्ट हाउस में ऑफिस बॉय की नौकरी करने वाले दादासाहेब आज दो स्टार्टअप्स खड़े कर चुके हैं. उनकी इस प्रेरक यात्रा की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) भी कर चुके हैं.
10वीं के बाद छूटी पढ़ाई
दादासाहेब भगत महाराष्ट्र के बीड जिले के एक साधारण परिवार से आते हैं. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की और इसके बाद आईटीआई का कोर्स किया. बेहतर रोजगार की तलाश में वे पुणे पहुंचे.
काफी कोशिशों के बाद उन्हें Infosys के गेस्ट हाउस में ऑफिस बॉय की नौकरी मिली. उस समय उनकी सैलरी करीब 9 हजार रुपये महीना थी. उनका काम मेहमानों को चाय-पानी देना, कमरों की व्यवस्था देखना और गेस्ट हाउस का संचालन संभालना था.
यही नौकरी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई. रोजाना वे सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स को काम करते देखते थे. धीरे-धीरे उनके मन में भी आईटी और डिजाइन की दुनिया में कुछ बड़ा करने का सपना जन्म लेने लगा.
दिन में नौकरी, शाम को पढ़ाई... ऐसे बदली किस्मत
दादासाहेब जानते थे कि सिर्फ सपना देखने से कुछ नहीं होगा. उनके पास किसी बड़े कॉलेज की डिग्री नहीं थी. इसलिए उन्होंने दिन में नौकरी जारी रखी और शाम को डिजाइन और एनीमेशन सीखना शुरू कर दिया.
कई महीनों तक उन्होंने बिना रुके नौकरी और पढ़ाई साथ-साथ की. धीरे-धीरे डिजाइनिंग में उनकी पकड़ मजबूत होती गई.
कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें डिजाइन और ग्राफिक्स से जुड़ी एक कंपनी में काम करने का मौका मिला. यहां उन्होंने एनीमेशन के साथ-साथ Python और C++ जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज की भी जानकारी हासिल की.
काम के दौरान उन्होंने महसूस किया कि डिजाइनरों का काफी समय बार-बार एक जैसे टेम्पलेट और विजुअल इफेक्ट बनाने में खर्च हो जाता है. तभी उनके मन में ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का विचार आया, जहां पहले से तैयार डिजाइन टेम्पलेट्स उपलब्ध हों और डिजाइनरों का समय बच सके.
एक्सीडेंट के बाद शुरू किया पहला Startup
दादासाहेब ने अपने आइडिया को बिजनेस में बदलने का फैसला किया. लेकिन इसी दौरान एक सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा.
ज्यादातर लोग ऐसी स्थिति में अपने सपने छोड़ देते, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. इलाज के दौरान भी वे अपने स्टार्टअप की योजना पर काम करते रहे.
इसके बाद उन्होंने अपना पहला स्टार्टअप Ninthmotion शुरू किया. इस प्लेटफॉर्म पर दुनियाभर के डिजाइनरों के लिए तैयार डिजाइन टेम्पलेट उपलब्ध कराए जाने लगे.
धीरे-धीरे उनके ग्राहक भारत के बाहर भी बढ़ने लगे. BBC Studios और 9XM जैसे बड़े ब्रांड भी उनके ग्राहकों में शामिल हुए.
पहली सफलता के बाद उन्होंने दूसरा स्टार्टअप शुरू किया. इसका मकसद ऐसा ऑनलाइन डिजाइन प्लेटफॉर्म बनाना था, जहां बिना किसी जटिल तकनीकी जानकारी के भी लोग आसानी से पोस्टर, बैनर और दूसरे डिजाइन तैयार कर सकें. बाद में इसी विजन को DesignTemplate.io के रूप में आगे बढ़ाया गया, जिसका लक्ष्य भारत से वैश्विक स्तर का डिजाइन प्लेटफॉर्म तैयार करना है.
PM मोदी ने भी की तारीफ
कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान दादासाहेब अपने गांव लौट आए. गांव में इंटरनेट और दूसरी सुविधाएं सीमित थीं. लेकिन उन्होंने काम रोकने के बजाय समाधान खोजा.
वे रोज एक पहाड़ी पर बनी गौशाला में जाकर काम करते थे, क्योंकि वहां 4G नेटवर्क बेहतर मिलता था. वहीं बैठकर उन्होंने अपनी टीम के साथ काम जारी रखा.
कुछ ही महीनों में उनके प्लेटफॉर्म पर करीब 10 हजार एक्टिव यूजर जुड़ गए. इससे साबित हुआ कि सफलता के लिए आलीशान ऑफिस नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है.
उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश का ध्यान खींचा. वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके इनोवेशन और मेहनत की सराहना की. किसी छोटे गांव से निकले युवा के लिए यह बड़ी उपलब्धि थी.
आज दादासाहेब भगत सिर्फ एक सफल उद्यमी नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उनकी कहानी बताती है कि सीमित संसाधन, कम पढ़ाई या साधारण शुरुआत कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बनते.
दादासाहेब अक्सर कहते हैं, “प्रेरणा आपको शुरुआत कराती है, लेकिन मंजिल तक अनुशासन ही पहुंचाता है.” शायद यही एक बात उनके पूरे सफर का सबसे सटीक सार भी है. उनकी कहानी हर उस व्यक्ति को यह भरोसा देती है कि अगर सीखने की इच्छा, मेहनत और धैर्य बना रहे, तो छोटी शुरुआत भी एक दिन बड़ी सफलता में बदल सकती है.
Edited by Ravi Pareek



